बंपर डिस्काउंट से FDI नियमों का उल्लंघन: पीयूष गोयल ने Amazon, Flipkart को किया तलब

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बंपर डिस्काउंट जैसी स्कीम में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों के उल्लंघन को लेकर एमेजॉन और फ्लिपकॉर्ट को तलब किया है. कन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने इसकी श‍ि‍कायत की थी.

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फ्लिपकार्ट और एमेजॉन को किया तलब फ्लिपकार्ट और एमेजॉन को किया तलब

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST

  • FDI के नियमों के कथित उल्लंघन पर एमेजॉन और फ्लिपकॉर्ट तलब
  • कोई भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सप्लायर को खास रियायत नहीं दे सकता

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बंपर डिस्काउंट जैसी स्कीम में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर एमेजॉन और फ्लिपकॉर्ट को तलब किया है. गोयल ने उद्योग एवं आंतरिक व्यापार प्रोत्साहन (DPIIT) विभाग से कहा है कि वह इस मसले पर विचार के लिए दोनों कंपनियों के प्रतिनिधि को बुलाएं.

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CAIT ने दिया प्रमाण

गौरतलब है कि कन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के प्रतिनिधि बुधवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मिले थे और उन्होंने इस बात का प्रमाण दिया था कि Amazon India और Flipkart ने किस तरह से त्योहारी सीजन के दौरान 'डीप डिस्काउंटिंग और प्रीडेटरी प्राइसिंग' की है जो एफडीआई नियमों का उल्लंघन है.

CAIT ने आरोप लगाया है कि डीप डिस्काउंट, प्रीडेटरी प्राइसिंग, एक्सक्लूसिविटी और प्रीफर्ड सेलर्स को बढ़ावा देने जैसे तरीके अपनाए हैं. इस तरह से ये कंपनियां गैर बराबरी का माहौल बना रही हैं. CAIT ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ई-कॉमर्स साइट के कामकाज की ऑडिट हो.

बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक दोनों कंपनियां अभी इस पर विचार कर रही हैं कि कॉमर्स मिनिस्टर से मिलने के लिए कौन-से एग्जीक्यूटिव को भेजा जाए. दोनों कंपनियों के शीर्ष अधिकारी जाएंगे या नहीं अभी यह तय नहीं है.

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क्या है मसला  

पीयूष गोयल से मिलने वाले CAIT के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इसके महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने किया था. खंडेलवाल ने अखबार से कहा, 'मंत्री ने दृढ़ता से कहा कि सरकार एफडीआई पॉलिसी को पूरी तरह से और पूरी भावना के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है. किसी भी हाल में प्रीडेटरी प्राइसिंग या डीप डिस्काउंटिंग की इजाजत नहीं दी जा सकती. ई-कामॅर्स में किसी भी तरह से री-रूटिंग की इजाजत नहीं दी जा सकती. एफडीआई पॉलिसी में साफ कहा गया है कि ई-कॉमर्स कंपनियां सिर्फ मार्केट पॉलिसी के रूप में काम करेंगी.'

वा‍णि‍ज्य मंत्रालय ने कहा था कि ऐसी कोई भी इकाई जिनके ऊपर ई-कॉमर्स कंपनी या उसके समूह की किसी कंपनी का नियंत्रण हो या उनके भंडार में ई-कॉमर्स कंपनी या उसके समूह की किसी कंपनी की हिस्सेदारी हो वह संबंधित ऑनलाइन मार्केट प्लेस (मंच) के जरिये अपने उत्पादों की बिक्री नहीं कर सकेगी.'

कब से बदले हैं नियम

गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत से सरकार की ओर से जारी नए नियमों के मुताबिक, कोई भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सप्लायर को खास रियायत नहीं दे सकता है. नए नियमों का उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को किसी भी तरह के पक्षपात से मुक्त करना है. ऐसे में कैशबैक, एक्सक्लूसिव सेल या किसी पोर्टल पर एक ब्रैंड के लॉन्च, एमेजॉन प्राइम और फ्लिपकार्ट एश्योर्ड जैसी डील्स या किसी तरह की खास सेवा देने पर कंपनियां फंस सकती हैं.

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