बिल्डरों की कथित धोखाधड़ी और घर खरीदारों की शिकायतों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि क्या अब ऐसा कोई बिल्डर बचा है, जिसके खिलाफ शिकायत सामने नहीं आई है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद एमिकस क्यूरी ने बताया कि कोर्ट के आदेश की खबर जैसे-जैसे लोगों तक पहुंच रही है, वैसे-वैसे और घर खरीदार अपनी शिकायतें लेकर सामने आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि पांच और वरिष्ठ नागरिकों ने शिकायत दर्ज कराई है, इन लोगों ने साल 2009 में सात फ्लैट खरीदे थे, लेकिन इतने साल बीतने के बाद भी उन्हें अपने फ्लैट नहीं मिले हैं. शिकायत करने वाले सभी लोग 80 साल से अधिक उम्र के हैं.
2009 में खरीदे फ्लैट, अब तक नहीं मिला कब्जा
कोर्ट को बताया गया कि इन वरिष्ठ नागरिकों ने करीब 17 साल पहले सात फ्लैट खरीदे थे, लेकिन अभी तक उन्हें फ्लैट की डिलीवरी नहीं मिली है, मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शिकायतकर्ता सभी 80 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं, इस उम्र में आखिर वो अब कहा जाएं.
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) से लंबित मामलों की सूची दाखिल करने को कहा था. हालांकि, इन घर खरीदारों की शिकायत उस सूची में शामिल नहीं की गई. एमिकस क्यूरी ने आरोप लगाया कि RP अब नए दावों को स्वीकार नहीं कर रहा है और कोर्ट के सामने मामले की पूरी तस्वीर भी नहीं आ रही है. उन्होंने कहा कि कुछ प्रोजेक्ट को इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (IRP) में शामिल क्यों नहीं किया गया, इसका जवाब RP को देना चाहिए.
प्रोजेक्ट सूची में नहीं तो खरीदारों को नहीं मिलेगा फायदा
कोर्ट को यह भी बताया गया कि अगर किसी प्रोजेक्ट को IRP में शामिल ही नहीं किया गया है तो उस प्रोजेक्ट के घर खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का लाभ नहीं मिल पाएगा, ऐसे में लंबित मामलों और संबंधित प्रोजेक्ट की सही जानकारी कोर्ट के सामने रखना महत्वपूर्ण है. देश में ऐसे लाखों लोग हैं जिन्होंने सालों पहले अपना फ्लैट बुक कराया था, लेकिन आजतक अपने घर के पजेशन मिलने का इंतजार कर रहे हैं.खासतौर पर दिल्ली -एनसीआर में ऐसे सैकड़ों मामले हैं जिसमें लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई अपने लिए फ्लैट बुक करने में लगा दी, लेकिन उनको घर नहीं मिला.
अनीषा माथुर