रियल एस्टेट टाइकून निरंजन हीरानंदानी ने हाउसिंग सेक्टर को लेकर बड़ी चेतावनी दे दी है. उनका कहना है कि अब भारत में सस्ते घर मिलना मुश्किल है और उन्होंने इसे लेकर जमीन की बढ़ती कीमतों, कंट्रक्शन कॉस्ट और सरकारी चार्ज को आम खरीदारों की पहुंच से घरों को दूर करने के लिए जिम्मेदार ठहराया.
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर तुरंत पॉलिसी में दखल नहीं दिया गया तो अगले कुछ सालों में यह संकट और गहरा सकता है. एक इंटरव्यू में बोलते हुए हीरानंदानी ने कहा कि इंडस्ट्री की सस्ते घर देने में नाकामयाबी एक गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौती बन रही है.
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि अफोर्डेबल हाउसिंग खत्म हो गई है. ऐसा कोई घर है ही नहीं, जहां 50 लाख या उससे कम में मिल जाए. इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि जमीन, कंस्ट्रक्शन कॉस्ट, डेवलपमेंट और सरकारी चार्ज मिलाकर घर खरीदना मुमकिन नहीं है. यह हाउसिंग का एक ऐसा सेगमेंट है, जो एक मुसीबत है. सरकार और इंडस्ट्री एक दिन इसका खर्च उठाएंगे.
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, 2025 में भारत के आठ सबसे बड़े शहरों में 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी नए घरों की सप्लाई का सिर्फ़ 17% होगी, जबकि 2018 में यह 52.4% थी. ये आंकड़े ज़्यादा महंगी रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज़ की ओर लगातार बदलाव को दिखाते हैं.
40 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट में 20 हजार रुपये सरकार को
हीरानंदानी ने कहा कि सरकार के लगाए गए चार्ज प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों में एक बड़ा कारण हैं, जिससे डेवलपर्स के पास घर सस्ते बनाने के लिए बहुत कम जगह बचती है. उन्होंने कहा कि जब मैं मुंबई में 40 हजार रुपये प्रति स्क्वॉयर फुट का घर बेचता हूं, तो 20 हजार रुपये पहले सरकार को जाते हैं.
उन्होंने स्टाम्प ड्यूटी, लेबर सेस और डेवलपमेंट से जुड़े दूसरे चार्ज को रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की फ़ाइनल सेलिंग प्राइस में जोड़ने वाली कॉस्ट बताया. उन्होंने कहा कि आप जो भी जोड़ते हैं. मैं अनऑफिशियल कॉस्ट की बात नहीं कर रहा हूं. मैं ऑफिशियल कॉस्ट की बात कर रहा हूं, और मैं आपको डॉक्यूमेंट पर दिखा सकता हूं. हीरानंदानी के अनुसार, इन चार्ज को कम करना मुश्किल होगा क्योंकि सरकारें पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को फाइनेंस करने के लिए प्रॉपर्टी से जुड़े रेवेन्यू पर निर्भर रहती हैं.
चार्ज कम नहीं करने वाली सरकार
उन्होंने कहा कि आज आप इसे कम नहीं कर सकते, क्योंकि सरकार को लगता है कि उनके लिए यह इकट्ठा करना जरूरी है, चाहे वे मेट्रो कर रहे हों या रोड या जो भी वे किटी में जोड़ रहे हों. वे इसे कम नहीं करने वाले हैं. उन्होंने कहा कि स्टाम्प ड्यूटी और रेडी रेकनर रेट भी कम होने की उम्मीद नहीं है.
अभी और बदतर होने वाला है
हीरानंदानी ने चेतावनी दी कि जमीन की बढ़ती कीमतें, रेगुलेटरी खर्च और महंगाई का दबाव घर खरीदना और भी मुश्किल बना सकता है. उन्होंने कहा कि जमीन की कीमत बढ़ने, इन सभी चार्ज बढ़ने और अब मिस्टर ट्रंप की वजह से महंगाई बढ़ने से यह सब मिलकर इसे और भी महंगा बना देगा.
कुल बिक्री में सस्ते घरों की घटती हिस्सेदारी का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने अनुमान लगाया कि हालात और खराब हो सकते हैं. हीरानंदानी ने कहा कि अगले कुछ सालों में हालात और भी खराब होने वाले हैं.
रियल एस्टेट टाइकून ने इस ट्रेंड का भी विरोध किया कि कमी के लिए सिर्फ़ डेवलपर्स को ही जिम्मेदार ठहराया जाए. उन्होंने कहा कि शुरू में वे बिल्डर्स को दोष दे रहे थे, जो एक अच्छा हौवा है और आप उन्हें बुरा-भला कह सकते हैं, लेकिन इसकी भी एक लिमिट है.
हीरानंदानी ने कहा कि इस चुनौती के लिए सरकारों, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और प्राइवेट डेवलपर्स को शामिल करते हुए एक बड़ी पॉलिसी की ज़रूरत है. उन्होंने चेतावनी दी कि इसलिए सरकार को बहुत जल्दी कोई समाधान निकालना होगा, नहीं तो यह एक बड़ी मुसीबत बन जाएगी. यह देश ऐसा नहीं कर सकता जैसा वह कर रहा है. हीरानंदानी ने कहा कि यह मुद्दा बहुत ज़रूरी है और चेतावनी दी कि अगर घरों की किफ़ायत पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसके नतीजे रियल एस्टेट सेक्टर से कहीं आगे तक जा सकते हैं.
आजतक बिजनेस डेस्क