क्‍या किराना स्‍टोर्स और दुकानदारों पर भी लगेगा UPI चार्ज? आया ये बड़ा अपडेट

यूपीआई को लेकर नई बहर छिड़ी हुई है. आलोचकों का कहना है कि इस यूपीआई चार्ज से छोटे व्‍यापारी भी प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि, अब सरकार की ओर से एक बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि कस्‍टमर्स और छोटे व्‍यापारियों पर इसका असर नहीं होगा.

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क्‍या छोटे व्‍यापारियों को भी देना होगा यूपीआई चार्ज. (Photo: ITG) क्‍या छोटे व्‍यापारियों को भी देना होगा यूपीआई चार्ज. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 08 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:48 PM IST

पिछले कुछ दिनों से UPI पर एमडीआर चार्ज को लेकर बहस तेज है. आम UPI कस्‍टमर्स से लेकर छोटे व्‍यापारियों तक इसे लेकर हड़कंप मचा हुआ है. ऐसा कहा जा रहा है कि अगर मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट (MDR) लागू होता है तो इसका असर व्‍यापक पड़ सकता है और ऑनलाइन पेमेंट बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. 

कुछ लोगों का यह भी दावा है कि इसका भार इनडायेक्‍ट तरीके से आम यूजर्स पर भी बढ़ सकता है. हालांकि, वित्त मंत्री ने कहा है कि अभी इसके लागू करने को लेकर कोई विचार नहीं किया गया है, लेकिन अगर फ्यूचर में ये चार्ज लागू भी किया जाता है तो कस्‍टमर्स पर इसका असर नहीं होगा, 

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लेकिन अब सवाल यह भी उठता है कि क्‍या इससे किराना स्‍टोर्स, आइसक्रीम बेचने वाले, छोटे- दुकानदार, स्‍वीट्स स्टोर्स, ठेले वाले या छोटे दुकानदार भी प्रभावित होंगे, उन्‍हें भी यह चार्ज देना पड़ेगा? इसका जवाब IAMAI के तहत काम करने वाली भारतीय भुगतान परिषद (पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया – PCI) संस्‍था ने दिया और एक बड़ी जानकारी शेयर की है. 

छोटे व्‍यापारियों पर भी नहीं लगेगा चार्ज
उद्योग निकाय PCI ने एक्‍स पर लिखा कि UPI के यूज के लिए कंज्‍यूमर्स से चार्ज लेने का कोई प्रस्‍ताव नहीं है और किराना स्‍टोर जैसे छोटे व्‍यापारी बिना MDR का पेमेंट किए UPI का यूज सकते हैं. यह स्पष्टीकरण भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2026 के बाद आया है, जिससे यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि UPI यूजर्स और व्यापारियों को जल्द ही शुल्क का सामना करना पड़ सकता है. 

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पीसीआई ने कहा कि यूपीआई 2016 में लॉन्च होने के बाद से कंज्‍यूमर्स के लिए मुफ्त रहा है, और हर भारतीय बिना लेनदेन शुल्क का भुगतान किए तत्काल डिजिटल भुगतान करना जारी रख सकता है. काउंसिल ने यह भी स्‍पष्ट किया कि छोटे व्‍यापारियों को UPI पेमेंट करने के लिए मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट (MDR) का पेमेंट करना अनिवार्य नहीं है. पीसीआई के अनुसार, छोटे से छोटे व्यवसायों के लिए भी डिजिटल भुगतान को सुलभ बनाना यूपीआई के विकास का मुख्य आधार रहा है. 

क्‍या होता है एमडीआर चार्ज? 
मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट (MDR) वह चार्ज है, जो व्‍यापारी डिजिटल ट्रांजेक्‍शन को पूरा करने के लिए बैंकों या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं. हालांकि, कंज्‍यूमर्स इस चार्ज का पेमेंट नहीं करते हैं, लेकिन ये दावा किया जा रहा है कि एमडीआर पेमेंट छोटे व्‍यापारियों को UPI स्‍वीकार करने से रोक सकता है या फिर कंज्‍यूमर्स के लिए लागत में बढ़ोतरी कर सकता है. जबकि समर्थकों का कहना है कि इससे पेमेंट इंफ्रा, साइबर सुरक्षा और नए तरीके से फंडिंग करने में मदद मिलेगी.  

मर्चेंट रेट का मतलब ये नहीं कि कस्‍टमर्स भरेंगे पैसा 
पीसीआई ने इस बात पर जोर दिया कि मर्चेंट सर्विस चार्ज, जहां लागू हो, व्‍यापारियों और सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच एक कमर्शियल समझौता है. इसका यह मतलब नहीं है कि कंज्‍यूमर्स को UPI पेमेंट करने के लिए भुगतान करना होगा. PCI ने कहा कि ग्‍लोबल स्‍तर पर डिजिटल पेमेंट सिस्‍टम में व्‍यापारी सर्विस चार्ज एक आम खासियत है. भले ही कंज्‍यूमर्स फ्री और सुविधाजनक डिजिटल पेमेंट सर्विसेज का लाभ उठा रही है. 

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