प्‍याज, तेल, चीनी और दालें... अचानक क्‍यों बढ़ने लगी महंगाई? बिगड़ रहा रसोई का बजट

पिछले एक महीने से महंगाई में उछाल जारी है. खाने के तेल से लेकर प्‍याज और अन्‍य पदार्थों की कीमतों में उछाल देखा गया है. खासकर चीनी की कीमत एक हफ्ते के दौरान 7 रुपये तक बढ़ चुकी है. इसके आलावा, प्‍याज की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है.

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दाल से लेकर चीनी तक के बढ़े दाम. (Photo: AI Generated) दाल से लेकर चीनी तक के बढ़े दाम. (Photo: AI Generated)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 22 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:41 PM IST

रसोई का बजट अब बढ़ने वाला है, क्‍योंकि पिछले एक हफ्ते के दौरान देशभर में खाने-पीने की चीजें महंगी हुई हैं. चीनी के दाम के साथ-साथ प्‍याज, टमाटर और तेल की कीमतें भी बढ़ी हैं. इसके अलावा, दाल की कीमतों में भी उछाल आया है और आगे भी तेजी का अनुमान लगाया गया है. 

रसोई के इन चीजों की कीमतों को थामने के लिए सरकार एक्टिव तो हो गई है, लेकिन महंगाई को लेकर च‍िंता बनी हुई है. पिछले एक सप्‍ताह में चीनी की कीमतें 7 रुपये तक चढ़ गई हैं और एक महीने के दौरान इसमें 17 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है, जिस कारण चीनी अब 70 रुपये प्रति किलो बिक रही है. 

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चीनी की कीमतों को कम करने के लिए सरकार क्‍या कर रही है? 
चीनी की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार तीन स्‍तरों पर काम कर रही है. बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए 31 अक्टूबर तक ड्यूटी फ्री 10 लाख टन आयात की मंजूरी दी है. इसके साथ ही जमाखोरी को रोकने के लिए स्‍टाक सीमा तय कर दी गई है. तीसरा- घरेलू उत्‍पादन बढ़ाने के लिए चीनी मिलों से इस बार जल्‍द यानी 15 अक्‍टूबर से पेराई शुरू करने को कहा है. ताकि नई फसल आने के बाद त्‍योहारों तक पर्याप्‍त चीनी उपलब्‍ध हो. 

क्‍यों बढ़ रहे चीनी के दाम? 
आलोचकों का कहना है कि चीनी के दाम में उछाल इथेनॉल की वजह से हुआ है, लेकिन सरकार ने साफ तौर पर इससे इनकार किया है. सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में उछाल की वजह- जमाखोरी और की आशंका. कुछ मील कारोबारियों और व्‍यापारियों द्वारा चीनी की जमाखोरी की आशंका जताई है. इसे रोकने के लिए सरकार ने 30 नवंबर तक कारोबारियों के लिए 400 टन की स्‍टाक सीमा तय की है. 

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क्‍यों बढ़ी प्‍याज की कीमतें? 
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 21 अगस्त को औसत खुदरा भाव ₹40.79/kg था। एक सप्ताह पहले यह ₹36.56 और एक महीने पहले ₹34.87 था. इसका मतलब है कि प्‍याज की कीमतें 4 से 5 रुपये प्रति किलो तक बढ़ चुकी हैं.कुछ जगहों पर इसकी कीमत 25 फीसदी तक बढ़ी है. इन कीमतों में उछाल की बड़ी वजह खरीफ प्‍याज की नई फसल की आवक में देरी है. 

दक्षिण भारत से खरीफ प्याज की आवक देर से हो रही है और महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में भी मानसून की देरी से खरीफ प्याज की बुवाई प्रभावित हुई है. हालांकि, इसके दाम को कंट्रोल करने के लिए सरकार बफर स्‍टाक से प्‍याज बेचने जा रही है. 

दालों के दाम क्‍यों बढ़ रहे हैं? 
पिछले एक महीने के दौरान, अरहर, मूंग, उरद और चना जैसी दालों की कीमतों में 1 रुपये से लेकर 2 रुपये की उछाल आई है. जिसके दाम बढ़ने के पीछे की वजह मानसून को माना जा रहा है. आंकड़ों के अनुसार, इस साल दलहन की बुआई का रकबा पिछले साल से 35 हजार हेक्‍टेयर कम है. अरहर की बुआई का रकबा 1.69 लाख हेक्‍टेयर कम है. ऐसे में कमजोर मानसून की आशंका से दाल की कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं. 

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तेल की कीमतों पर भी असर 
अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में पाम आयल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जो 20 महीने के उच्‍चतम स्‍तर पर पहुंच गया है. इंडोनेशिया पाम ऑयल का सबसे बड़ा उत्‍पादक है और वहां सूखे की स्थिति के कारण पाम ऑयल की कीमतों में उछाल आया है. पाम ऑयल सबसे ज्‍यादा खाने के तेल में इस्‍तेमाल किया जाता है. ऐसे में भारत इस तेल का आयात करता है और अभी आयात कम होने की वजह से इसके दाम में तेजी देखी जा रही है. 

इसके अलावा, सूर्यमुखी के तेल का आयात भी कम हो रहा है, क्‍योंकि रूस और यूक्रेन में वॉर के कारण भारत के रिफाइन तेल के आयात पर असर पड़ा है. इसके अलावा, ग्‍लोबल मार्केट में भी खाने की तेल की कीमतें बढ़ी हैं. पिछले एक महीने के दौरान खाने की तेल की कीमतें 2 से  3 फीसदी तक बढ़ चुकी है. इसमें सरसों के तेल और बाकी खाद्य तेलों की कीमतों में भी उछाल आया है. 

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