युद्ध खत्म, अमेरिका ने कहा- अब इस बात का है खतरा... हिल गए दुनिया भर के शेयर बाजार

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क को इस हफ्ते सबसे तगड़ी आर्थिक चोट पहुंची है. उनकी कंपनी SpaceX की पिछले हफ्ते लिस्टिंग हुई थी, खूब चर्चा हुई. लेकिन हफ्तेभर में ही कंपनी के शेयर का बुरा हाल हो गया है.

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अमेरिकी फेड ने दिया है ब्याज दर में बढ़ोतरी के संकेत. (Photo: AI) अमेरिकी फेड ने दिया है ब्याज दर में बढ़ोतरी के संकेत. (Photo: AI)

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:07 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर समझौते हुए तो ऐसा लगा अब सबकुछ ठीक-ठाक हो जाएगा. लेकिन एक संकट टला तो दूसरा घेरने लगा. हफ्ते के पहले दिन ही अमेरिकी शेयर बाजार हिल उठा, और फिर उसने बारी-बारी से दुनिया भर के बाजार को झकझोर दिया. 

दरअसल, अमेरिका में जॉब डेटा अच्छा आते ही अचानक फेडरल रिजर्व का मूड बदल गया. कुछ दिन पहले तक ब्याज दरों में कटौती की बात हो रही थी, लेकिन मजबूत जॉब डेटा और बढ़ती महंगाई की वजह से फेड ने साफ कर दिया कि अब कटौती की उम्मीद छोड़ दें, उल्टा इस साल एक बार ब्याज दर बढ़ सकता है. अमेरिकी फेड रिजर्व का ये एक फैसला दुनिया भर के बाजारों के लिए किसी भूकंप से कम साबित नहीं हो रहा है. 

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फेडरल रिजर्व के नवनियुक्त चेयरमैन केविन वॉर्श, जो कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी हैं, उनसे ब्याज दरों में राहत की उम्मीद की जा रही थी. लेकिन उनके भविष्य के अनुमानों ने निवेशकों को डरा दिया है. ऊंची ब्याज दर के डर से विदेशी संस्थागत निवेशकों ने उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में डालना शुरू कर दिया है. 

जल्द ब्याज दर बढ़ने की संभावना

फेड फंड्स फ्यूचर्स के मुताबिक सितंबर तक रेट हाइक की संभावना 80% से अधिक आंकी जा रही है. इस बीच फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने के संकेत और ग्लोबल अनिश्चितता ने अमेरिकी डॉलर को बेहद मजबूत कर दिया है, जिससे जापान की करेंसी येन संकट में है, यूरोप और ब्रिटेन की करेंसीज पर भी दबाव बना हुआ है. 

वहीं दूसरी तरफ दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क को इस हफ्ते सबसे तगड़ी आर्थिक चोट पहुंची है. उनकी कंपनी SpaceX की पिछले हफ्ते लिस्टिंग हुई थी, खूब चर्चा हुई. लेकिन हफ्तेभर में ही कंपनी के शेयर का बुरा हाल हो गया है. लिस्टिंग के बाद SpaceX का शेयर 16 जून को बढ़कर 225 डॉलर तक पहुंच गया था, जो कि मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान फिसलकर 147 डॉलर के करीब पहुंच गया. यानी हफ्तेभर में इस कंपनी का एक-तिहाई मार्केट कैप स्वाहा हो गया. यही नहीं, केवल एक दिन में एलॉन मस्क की नेटवर्थ करीब 152 बिलियन डॉलर घट गई. 

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एलॉन मस्क को तगड़ा झटका
 
एलॉन मस्क को क्या झटका लगा है? स्पेसएक्स ने लिस्टिंग के तुरंत बाद AI कोडिंग स्टार्टअप Cursor को 60 अरब डॉलर के ऑल-स्टॉक सौदे में खरीदने का ऐलान किया, जिससे इक्विटी डाइल्यूट हो गई. इसके तुरंत बाद ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट आई कि कंपनी 20 अरब डॉलर का बॉन्ड जारी कर कर्ज जुटाने वाली है. कंपनी के वित्तीय दस्तावेजों से पता चला कि स्पेसएक्स की सहयोगी कंपनी xAI भारी ऑपरेटिंग लॉस कर रही है. इसके बाद शॉर्ट-सेलर्स और निवेशकों ने हाई वैल्यूवेएशन पर सवाल उठाते हुए स्पेसएक्स में भारी मुनाफावसूली की, जिसने वैश्विक टेक मार्केट का मूड खराब कर दिया.

SpaceX के शेयर में भूचाल से अमेरिका शेयर बाजार भी हिल गया, और जब अमेरिकी शेयर बाजार हिलता है तो उसका असर दुनिया के बाजारों में देखने को मिलता है. मंगलवार सुबह दक्षिण कोरिया का बाजार लहूलुहान हो गया. दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में 10% का लोअर सर्किट लग गया. किसी भी देश के मुख्य इंडेक्स में 10 फीसदी का लोअर सर्किट लगना मामूली बात नहीं है. हालांकि पिछले कुछ महीनों में कोरियाई मार्केट में एकतरफा रैली देखने को मिली थी.

बता दें, कोस्पी इंडेक्स का आधा हिस्सा सेमीकंडक्टर और टेक शेयरों पर निर्भर है. विदेशी निवेशकों ने एक ही दिन में 4 ट्रिलियन वॉन से अधिक के शेयर बेच डाले. जिससे चिप बनाने वाली कंपनी Samsung Electronics और SK Hynix के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. बाजार को संभालने के लिए एक्सचेंज को पहले 'साइडकार' और फिर लेवल-1 'सर्किट ब्रेकर' लागू कर ट्रेडिंग को रोकना पड़ा. 

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भारतीय बाजार पर भी तगड़ा असर

बाजार के जानकारों का मानना है कि दक्षिण कोरिया के बाजार में भारी गिरावट के पीछे  AI और सेमीकंडक्टर को लेकर पिछले एक साल में जो हाई वैल्यूवेएशन का बबल बना है, उसे एक दिन फटना तो तय ही था. अमेरिकी फेड रिजर्व के संकेत से उसे मौका मिल गया. 

एशियाई बाजारों में मचे इस हाहाकार की लपटें मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार तक भी पहुंची. पिछले हफ्ते आईटी दिग्गज एक्सेंचर द्वारा कमजोर रेवेन्यू गाइडेंस दिए जाने से भारतीय आईटी सेक्टर पहले ही दबाव में था, और इस वैश्विक संकट ने आग में घी डालने का काम किया. चौतरफा भारतीय बाजार में बिकवाली का माहौल रहा. नैस्डैक और कोस्पी के तर्ज पर भारतीय आईटी शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई. ऊंची ब्याज दरें हमेशा आईटी और ग्रोथ स्टॉक्स के भविष्य के मुनाफे की वैल्यू को कम करती हैं, जिससे FII की और बिकवाली बढ़ने का डर सताने लगा है. 

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