'ग्राहकों से कैश या लेंगे एक्‍स्‍ट्रा पैसा...' UPI चार्ज पर क्‍या बोले व्‍यापारी और दुकानदार?

आजतक से बातचीत में दिल्‍ली-नोएडा के व्‍यापारियों ने कहा कि यह चार्ज उनके कारोबार को प्रभावित कर सकता है. वहीं कुछ व्‍यापारियों ने यह भी माना कि अगर उनका बिजनेस प्रभावित होता है तो वह कस्‍टमर्स से ही एक्‍स्‍ट्रा चार्ज वसूलेंगे, जबकि ज्‍यादातर व्‍यापारियों ने यह कहा कि वह अब कैश को प्राथमिकता देंगे.

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बिजनेस को प्रभावित करेगा यूपीआई का ये चार्ज, बोले ट्रेडर्स. (Photo: ITG) बिजनेस को प्रभावित करेगा यूपीआई का ये चार्ज, बोले ट्रेडर्स. (Photo: ITG)

भूपेन्द्र चौधरी / हिमांशु शर्मा / आदित्य के. राणा

  • नई दिल्‍ली,
  • 17 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:05 PM IST

केंद्र सरकार ने जबसे 2000 रुपये से ज्‍यादा के UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी का मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट (MDR) लागू करने का ऐलान किया है, तबसे दुकानदारों से लेकर व्‍यापारी और आम लोगों के बीच घबराहट बढ़ चुकी है. बहुत से लोग कह रहे हैं कि इस चार्ज का पूरा भार अंतत: ग्राहकों पर ही पड़ने वाला है. 

जबकि दुकानदारों और व्‍यापारियों के बीच ये डर है कि उनका मार्जिन कम हो जाएगा या फिर उन्‍हें नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. राजनीतिक गलियारों में भी UPI पर चार्ज को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. हालांकि, सरकार का तर्क इन सबसे अलग है. 

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NPCI के सर्कुलर में कहा गया है कि यह चार्ज सिर्फ 4 फीसदी चुनिंदा व्‍यापारियों को ही प्रभावित करेगा. 96 फीसदी छोटे व्‍यापारी इसके तहत नहीं आते हैं. इन 4 फीसदी ट्रेडर्स से ही 2000 रुपये से ज्‍यादा के ट्रांजेक्‍शन पर MDR वसूला जाएगा, वह भी अधिकतम 300 रुपये. 1 लाख रुपये महीना कमाने वाले व्‍यापारियों और 2000 रुपये तक का ट्रांजेक्‍शन हासिल करने वाले कारोबारियों पर इसका कोई असर नहीं होगा. 

लेकिन सरकार के इस तर्क के बावजूद भी लोग UPI पर नए नियम को लेकर परेशान हैं. ऐसे में Aajtak की टीम ने नोएडा, दिल्‍ली और कुछ छोटे शहरों के व्‍यापारियों, दुकानदारों और ग्राहकों से UPI पर चार्ज को लेकर बातचीत की और ये जानने की कोशिश कि वे इस चार्ज को लेकर क्‍या सोचते हैं?   

UPI चार्ज पर नोएडा के लोगों ने क्‍या कहा? 
किशन नाम के एक व्‍यक्ति ने कहा‍ कि UPI चार्ज का बोझ पूरी तरह से दुकानदार पे निर्भर है. सरकार तो कह रही है कि आम आदमी को 1 रुपये भी एक्स्ट्रा नहीं देना है, लेकिन सवाल तो यह है कि अगर हमने दुकानदार से 2500 का समान लिया, तो वह कहेगा कि कैश में पेमेंट कीजिए, नहीं तो हम UPI पेमेंट नहीं लेंगे. अगर UPI पेमेंट करते हैं तो आपको एक्‍स्‍ट्रा चार्ज भरना होगा. इससे हमे ही निपटना होगा, सरकार थोड़ी ही आएगी दुकानदार से सेटलमेंट करवाने. 

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वहीं शगुन ने कहा कि इस चार्ज से व्‍यापारी ही नहीं, हमें भी दिक्‍कत होगी. अगर व्‍यापारियों पर ये चार्ज बढ़ेगा तो कहीं ना कहीं वे हमसे ही वसूलेंगे. अगर वे सीधे नहीं लगा पाए तो किसी ना किसी चार्ज के बहाने वे हमसे ही वसूलेंगे. एक अन्‍य युवक अमित ने कहा कि जब GST आई थी तो कस्‍टमर्स को ही भार उठाना पड़ा था और इस चार्ज को लेकर व्‍यापारी जनता से ही वसूलेगा. जतिन, कशिश जैसे युवाओं का भी मानना है कि ये चार्ज आखिर में जनता पर ही आने वाला है. 

नोएडा-दिल्‍ली के दुकानदारों और व्‍यापारियों ने क्‍या कहा? 
UPI पर चार्ज को लेकर नोएडा के व्यापारियों और दुकानदारों ने भी सवाल उठाया है. व्यापारियों का कहना है कि भले ही यह चार्ज ग्राहक पर सीधे नहीं लगाया जा रहा, लेकिन इसका असर कारोबार के मार्जिन और कारोबार की लागत पर पड़ सकता है.

एक दुकानदार विकास जैन ने UPI पेमेंट पर सरकार के नए नियम को लेकर कहा है कि महंगाई और प्रतिस्पर्धा के दौर में यह कदम व्यापारी और ग्राहकों दोनों के लिए अनुचित है. सरकार का ये फैसला कारोबार के लिए खतरा बन सकता है. जैन का मानना है कि सरकारी टैक्स पहले ही बहुत ज्‍यादा है. इस बीच, इस नए चार्ज से ग्राहक कैश की ओर वापस लौट सकते हैं, जिससे डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलने के बजाय नुकसान होगा. 

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अरिफ अली (इंटीरियर का काम करने वाले) के अनुसार, ₹2000 से ज्‍यादा ऑनलाइन भुगतान पर चार्ज लगाना गलत है. जब पहले से ही टैक्स दे रहे हैं, तो हर ₹2,000 के ऊपर ये चार्ज देना उचित नहीं. आज के समय में ज्यादातर लोग डिजिटल पेमेंट करते हैं क्योंकि कैश का फ्लो कम है. इस फैसले से व्यापारी डिजिटल पेमेंट के विकल्प कम करेंगे ताकि बार-बार चार्ज कटने से बचा जा सके. इससे ना तो डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलेगा और ना ही कस्टमर के लिए ठीक रहेगा.

'चार्ज बढ़ा तो, कस्‍टमर्स पर डाल देंगे बोझ'  
नोएडा के हार्डवेयर और सप्लाई के कारोबारी राजेश ओझा ने कहा कि ज्यादा भुगतान का फैसला उचित नहीं है. आज के समय में ज्यादातर लोग कैशलेस ट्रांजेक्शन को अपनाकर ₹10, ₹20 या ₹50 के नोट नहीं रखते, ₹500 से नीचे कैश लेकर चलना भी मुश्किल हो गया है. दुकानदार और व्यापारी अब मोबाइल पेमेंट जैसे पेटीएम पर निर्भर हैं, जिसमें 0.4 तक का चार्ज लगना भारी पड़ रहा है. इससे व्यापारियों का मुनाफा कम हो सकता है. उन्‍होंने कहा कि अगर ये चार्ज लगाया गया तो दुकानदार इसका बोझ ग्राहकों पर डाल देंगे. 

पेट्रोल पंप पर 2 हजार रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर 5 रुपये का तय MDR है. डीलरों का कहना है कि उनका प्रति लीटर मुनाफा सीमित है, इसलिए हर बड़े UPI भुगतान पर 5 रुपये का खर्च भारी पड़ सकता है. कुछ डीलरों ने छूट नहीं मिलने पर 2 हजार रुपये से ऊपर UPI भुगतान की जगह कैश लेने की बात कही है.

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UPI पर चार्ज को लेकर एक्‍सपर्ट्स क्‍या सोच रहे?  
सीए  किशलय आनंद का कहना है कि कम मुनाफे वाले कारोबारियों को डर है कि नई भुगतान लागत का असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा. कुछ कारोबारी संगठनों को आशंका है कि बड़े UPI भुगतान की जगह नकद भुगतान बढ़ सकता है. उत्तर प्रदेश युवा व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष शर्मा ने कहा कि छोटे कारोबारियों का मुनाफा पहले ही बहुत कम है और इस फैसले से कमाई पर सीधा असर होगी और लागत बढ़ेगी. अंशिका इलेक्ट्रिकल्स के विनीत शर्मा ने कहा  कि UPI से पेमेंट लेना अब हमारी आदत बन चुकी है, लेकिन अगर बड़े पेमेंट पर हर बार अतिरिक्त शुल्‍क लगता है तो कुछ दुकानदार कैश को प्राथमिकता दे सकते हैं. 

अलवर के व्‍यापारियों की क्‍या है चिंता? 
अलवर के यहां के व्यापारियों ने बताया कि लगभग 90% लेन-देन अब ऑनलाइन होते हैं, और औसतन बड़े लेन-देन ₹2,000 से अधिक के ही होते हैं. ऐसे में, इस नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट की वजह से व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा. व्यापारी मानते हैं कि उनकी कमाई कम हो जाएगी, क्योंकि पहले से ही उन्हें जीएसटी और अन्य करों का बोझ उठाना पड़ता है. अब इस नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट से स्थिति और भी कठिन होगी. अगर ये चार्ज लागू हो जाता है तो कैश को ही प्राथमिकता दी जाएगी. 

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