भारत ही नहीं... पूरी दुनिया में चीनी का संकट, इस देश ने बिगाड़ा खेल!

भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में चीनी की कीमत में इजाफा हो रहा है, जिस कारण चीनी का संकट पैदा होता हुआ दिख रहा है. इसके पीछे दो वजह ब्राजील और मौसम को माना जा रहा है.

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दुनिया में चीनी को लेकर संकट. (Photo: ITG) दुनिया में चीनी को लेकर संकट. (Photo: ITG)

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्‍ली,
  • 23 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:41 PM IST

भारत में त्योहारों के मौसम शुरू होने के पहले ही चीनी की बढ़ती कीमतों से जायका कड़वा हो रहा है. सरकार कह रही है की इथेनॉल की वजह से चीनी के दाम में कोई इजाफा नहीं हो रहा है, लेकिन फिर भी चीनी की दिक्‍कत आई है. जिस कारण दुनिया को चीनी का एक्‍सपोर्ट करने वाला देश, अब चीनी आयात करने जा रहा है. 

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सरकार के मुताबिक, वर्तमान में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी कई कारकों के संयोजन के कारण हुई है. इनमें घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम होना, त्योहारी मौसम से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम संबंधी कारणों से गन्ने की फसल को नुकसान, ग्‍लोबल स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग के कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं. 

वर्तमान सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने की उम्मीद है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों द्वारा शुरुआती अनुमान लगभग 343 LMT लगाया गया था. गन्ने की फसल रेड रॉट (लाल सड़न) और टॉप बोरर रोग से प्रभावित हुई है. इसके अलावा, समय से पहले ज्‍यादा बारिश के कारण हुए जलभराव ने भी फसल को नुकसान पहुंचाया है. हालांकि सरकार का दावा है कि उत्पादन अनुमान से कम होने के बावजूद, देश में पर्याप्त चीनी का भंडार उपलब्ध है, जो अक्टूबर में नए पेराई सीजन के शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. 

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पूरी दुनिया में चीनी की कीमत बढ़ रही
लेकिन चीनी की कीमतों में उछाल सिर्फ़ भारत में नहीं है. चीनी की संकट अब पूरी दुनिया पर दिखाई दे रही है. दुनिया में गन्ने की सबसे ज्‍यादा खेती करने वाले ब्राज़ील में भी चीनी की संकट गहरा रही है. US डिपॉर्टमेंट ऑफ फॉरेन एग्रीकल्चर सर्विस के डेटा के मुताबिक, ब्राज़ील दुनिया के 24% गन्ना उत्पादन करता है, जिसके बाद भारत 16%  गन्ना उत्पादन करता है.

ब्राजील इथेनॉल में बढ़ा रहा उत्‍पादन
ब्राज़ील अपनी गन्ने को इथेनॉल उत्पादन की तरह मोड़ रहा है, जिसके चलते ब्राजील में भी चीनी की संकट खड़ी हो चुकी है. ब्राज़ील की नेशनल सप्लाई कंपनी कोनाब के मुताबिक, चीनी के उत्पादन में लगभग 3% कटौती हो सकती है यानी इस साल ब्राज़ील में चीनी का उत्पादन लगभग 43 मिलियन टन कम रहने का अनुमान है. वहीं दूसरी वजह एलनीनो को लेकर है, जिसकी वजह से ब्राजील के मध्य और दक्षिणी हिस्से में बरसात में देरी और तापमान में बढ़ोतरी की वजह से गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ा है. यानी पूरी दुनिया को चीनी निर्यात करने वाले ब्राज़ील में किसानों का इथेनॉल की ओर रुख करना वर्ल्ड शुगर सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहा है. 

मौसम बिगाड़ रहा खेल
वहीं बाकी देशों में मौसम की वजह से चीनी की कीमतों में उछाल आने की संभावना है. वेलोर इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल सक्रिय एल नीनो के चलते चीनी उत्पादन वाले क्षेत्रों में नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है. मौसम का बदलाव भारत और थाइलैंड जैसे गन्ना उत्पादन रीजन में प्रभाव डाल रहा है. दुनिया में कुल गन्ना उत्पादन के 6% गन्ना पैदा करने वाले थाईलैंड में अगले सप्ताह से मौसम का निगेटिव असर होगा. एलनीनो की वजह से बरसात में कमी की अशंका जताई गई है. 

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अमेरिकी कमोडिटी बाज़ार के मुताबिक़, अमेरिकी चीनी वायदा कीमतें 17 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर कारोबार कर रही हैं और मई 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब बनी हुई हैं.वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति और अधिक सीमित होने की संभावनाओं के कारण बाजार को सपोर्ट मिल रहा है. इसके अलावा, दशकों के सबसे मजबूत अल नीनो ने उत्पादन संबंधी जोखिमों को बढ़ा दिया है. विश्लेषकों ने 2026/27 में वैश्विक चीनी की कमी के अपने अनुमानों को बढ़ाया है. गन्ने और चुकंदर की कम बुवाई के कारण 2027/28 में यह कमी और भी बढ़ने की संभावना है.

क्‍यों इथेनॉल की ओर बढ़ रहा ब्राजील? 
भारत, यूरोपीय संघ (EU) और थाईलैंड को प्रतिकूल मौसम की स्थिति के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में माना जा रहा है. इसी बीच, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें ब्राजील जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में गन्ने को चीनी उत्पादन के बजाय इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने को प्रोत्साहित कर रही हैं. ब्राजील ने जुलाई के अंत में अनिवार्य इथेनॉल मिश्रण की दर को बढ़ाकर 32% कर दिया, जो एक महीने पहले 30% और एक साल पहले 27% थी. इससे चीनी की उपलब्धता में और कमी आ सकती है. इससे वैश्विक बाजार में चीनी की मांग पर दबाव और बढ़ सकता है. 

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