तिमाही GDP आंकड़ों पर सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाए सवाल, बोले-15% हो सकती है गिरावट 

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि कुछ इंडेक्स का सहारा लिया जाए तो तीसरी तिमाही की जीडीपी माइनस 10 से 15 फीसदी (-10 से -15%) हो सकती है. सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में इसे पॉजिटिव (+0.4 फीसदी) बताया गया है. 

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सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाए सवाल (फाइल फोटो) सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाए सवाल (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 01 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 8:12 AM IST
  • शुक्रवार को आया था जीडीपी का आंकड़ा
  • दिसंबर तिमाही में 0.4% ग्रोथ का आया डेटा
  • सुब्रमण्यम स्वामी ने आंकड़े पर उठाया सवाल

बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सरकार द्वारा दिसंबर में खत्म इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं. स्वामी ने कहा है कि कुछ इंडेक्स का सहारा लिया जाए तो जीडीपी माइनस 10 से 15 फीसदी (-10 से -15%) हो सकती है. गौरतलब है कि सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में इसे पॉजिटिव (+0.4 फीसदी) बताया गया है. 

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सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि Laspeyres प्राइस इंडेक्स नंबर का इस्तेमाल किया जाए तो दिसंबर तिमाही की जीडीपी ग्रोथ -10 फीसदी और Paasche इंडेक्स का इस्तेमाल किया जाए तो यह -15 फीसदी हो सकती है. इन इंडेक्स में एमएसएमई और असंगठित क्षेत्र के आंकड़ों को भी शामिल किया जाता है जिनमें नेगेटिव ग्रोथ हुई है. 

क्या कहा स्वामी ने 

स्वामी ने एक ट्वीट में कहा,  'एमएसएमई और असंगठित क्षेत्र में हुए नेगेटिव ग्रोथ के गेस्ट‍िमेट को जीडीपी में जोड़ा जाए तो Laspeyres प्राइस इंडेक्स के मुताबिक जीडीपी ग्रोथ -10 फीसदी होगी, न कि +0.4 फीसदी. इसी तरह Paasche इंडेक्स का इस्तेमाल करें तो यह -15 फीसदी होगा.' 

असल में Laspeyres प्राइस इंडेक्स से अर्थव्यवस्था में कीमत के स्तर, रहन-सहन की लागत और महंगाई का अनुमान लगाया जाता है. इसी तरह Paasche प्राइस इंडेक्स से वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों और मात्रा में हुए बदलाव के मुताबिक कीमतों में बदलाव का मापन किया जाता है. 

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मंदी से बाहर निकला देश! 

गौरतलब है कि मंदी के दौर का सामना करने वाली भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुक्रवार को आखिर अच्छी खबर आ गई. केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 0.4 फीसदी की बढ़त हुई है. यानी भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से बाहर निकल गई है.

भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना की वजह से इतिहास में पहली बार तकनीकी रूप से मंदी के दौर में पहुंची थी. जब कोई अर्थव्यवस्था लगातार दो तिमाही गिरावट में रहती है, तो यह मान लिया जाता है कि वह तकनीकी रूप से मंदी के दौर में पहुंच चुकी है.

इस वित्त वर्ष की जून में होने वाली पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में 23.9 फीसदी की गिरावट आई. इसके बाद फिर सितंबर की दूसरी तिमाही में जीडीपी में 7.5 फीसदी की गिरावट आई. 

 

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