₹162 करोड़ की बिक्री, 1.54 लाख लोगों को फायदा... देश के 'हुनरमंदों' को रेलवे ने दिया बड़ा बाजार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘Vocal for Local’ विजन से जुड़ी रेलवे की ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ (OSOP) योजना के तहत देशभर के कारीगरों, बुनकरों और छोटे उत्पादकों को अपने सामान बेचने का प्लेटफॉर्म मिल रहा है. योजना के तहत अब तक ₹162.39 करोड़ से ज्यादा की बिक्री हो चुकी है और 1.54 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा मिला है.

Advertisement
रेलवे ने 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' स्कीम के जरिए स्थानीय कारीगरों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराया है. (Photo: PIB) रेलवे ने 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' स्कीम के जरिए स्थानीय कारीगरों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराया है. (Photo: PIB)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:40 PM IST

रेलवे स्टेशन अब सिर्फ ट्रेन पकड़ने और उतरने की जगह नहीं रह गए हैं. देशभर के रेलवे स्टेशनों पर स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे उत्पादकों के सामान को बाजार देने वाली 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' (OSOP) योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'Vocal for Local' अभियान को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने का एक बड़ा माध्यम बन रही है. रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, OSOP के तहत अब तक ₹162.39 करोड़ से ज्यादा के उत्पादों की बिक्री हो चुकी है.

Advertisement

इस योजना का मकसद रेलवे के विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल स्थानीय और क्षेत्रीय उत्पादों को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए करना है. यानी जिस स्टेशन पर यात्री ट्रेन का इंतजार करता है, वहीं उसे उस क्षेत्र की खास कला, हस्तशिल्प, कपड़ा या स्थानीय उत्पाद खरीदने का मौका मिल रहा है. इससे एक तरफ यात्रियों को स्थानीय उत्पादों तक आसान पहुंच मिल रही है, तो दूसरी तरफ छोटे कारोबारियों और कारीगरों को बड़े बाजार से जुड़ने का मौका मिल रहा है.

2,000 से ज्यादा स्टेशनों पर OSOP स्टॉल

रेलवे के मुताबिक, OSOP नेटवर्क में अब 2,300 से ज्यादा आउटलेट शामिल हैं, जो 2,000 से अधिक रेलवे स्टेशनों तक पहुंच चुके हैं. इस पहल से अब तक 1.54 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा मिला है. इनमें करीब 1.50 लाख प्रत्यक्ष लाभार्थी हैं, जिन्हें रेलवे स्टेशनों पर अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिला है.

Advertisement

यह पहल प्रधानमंत्री मोदी के 'Vocal for Local' और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के विजन से भी जुड़ती है. इसका फोकस सिर्फ स्थानीय सामान बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे उद्यमियों को ऐसा प्लेटफॉर्म देना है, जहां वे बिना बड़े रिटेल नेटवर्क या महंगे बाजार के सीधे ग्राहकों तक पहुंच सकें.

25 मार्च 2022 को शुरू हुई थी ये योजना

'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' योजना की शुरुआत 25 मार्च 2022 को हुई थी. शुरुआत में इसे देश के 19 स्टेशनों पर 15 दिन के पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था. इसके बाद योजना का चरणबद्ध तरीके से विस्तार किया गया. इसके तहत स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों को स्टेशन पर स्टॉल लगाने की सुविधा दी जाती है. स्टॉल रोटेशन के आधार पर उपलब्ध कराए जाते हैं और इसके लिए अपेक्षाकृत कम शुल्क लिया जाता है. इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा स्थानीय विक्रेताओं को रेलवे के विशाल यात्री नेटवर्क तक पहुंच देना है.

मधुबनी पेंटिंग से कांचीपुरम सिल्क तक

OSOP आउटलेट्स पर उस क्षेत्र की स्थानीय पहचान से जुड़े अलग-अलग उत्पाद बेचे जा रहे हैं. इनमें हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम, टेक्सटाइल, खिलौने, लेदर प्रोडक्ट, ज्वेलरी और पारंपरिक सामान शामिल हैं. कई स्टेशनों पर स्थानीय खाद्य उत्पाद भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

Advertisement

इस नेटवर्क में बिहार की मधुबनी पेंटिंग और भागलपुरी सिल्क, असम का गमोसा और मेखला चादर, राजस्थान का कोटा डोरिया और सांगानेरी प्रिंट, कर्नाटक के चन्नापटना खिलौने और तमिलनाडु का कांचीपुरम सिल्क जैसे उत्पाद शामिल हैं.

इसी तरह महाराष्ट्र की कोल्हापुरी फुटवियर, उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद ब्रासवेयर और बनारसी क्राफ्ट जैसे पारंपरिक उत्पाद भी रेलवे स्टेशनों के जरिए यात्रियों तक पहुंच रहे हैं. इससे स्थानीय कला और संस्कृति को नए ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है.

पश्चिम बंगाल में OSOP के 378 स्टॉल

राज्यवार आंकड़ों में पश्चिम बंगाल 378 OSOP यूनिट के साथ सबसे आगे है. इसके बाद महाराष्ट्र में 205, तमिलनाडु में 199 और उत्तर प्रदेश में 196 यूनिट हैं. ये आंकड़े दिखाते हैं कि रेलवे का विशाल स्टेशन नेटवर्क अब स्थानीय उत्पादों के लिए एक बड़े बिक्री प्लेटफॉर्म के तौर पर भी इस्तेमाल हो रहा है. खासकर छोटे कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों के लिए यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें अपने क्षेत्र से बाहर के ग्राहकों तक पहुंच बनाने का मौका मिलता है.

₹500 से ₹1,000 में 15 दिन स्टॉल

OSOP की एक बड़ी खासियत इसकी कम लागत वाली बाजार सुविधा है. योजना के तहत 15 दिनों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस ₹500 से ₹1,000 के बीच रखी गई है. स्टेशन की कैटेगरी के हिसाब से शुल्क अलग हो सकता है. स्टॉल रोटेशन के आधार पर दिए जाते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा स्थानीय उत्पादकों को मौका मिल सके. रेलवे ने इन आउटलेट्स पर UPI, BHIM, POS मशीन और डिजिटल वॉलेट जैसे कैशलेस पेमेंट विकल्पों को भी बढ़ावा दिया है.

Advertisement

स्थानीय से राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच

दरअसल, 'Vocal for Local' का बड़ा मकसद स्थानीय उत्पादों को सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है. OSOP इसी सोच को रेलवे के नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ाता है. एक छोटे शहर या कस्बे का कारीगर जहां पहले अपने आसपास के बाजार तक सीमित रह सकता था, अब रेलवे स्टेशन के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्रियों तक पहुंच बना सकता है. वहीं यात्री भी किसी क्षेत्र की स्थानीय कला, शिल्प और उत्पाद को आसानी से खरीदकर अपने साथ ले जा सकता है.

₹162 करोड़ से ज्यादा की बिक्री, 2,000 से अधिक स्टेशनों तक पहुंच और 1.50 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष लाभार्थी बताते हैं कि OSOP धीरे-धीरे रेलवे के पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को स्थानीय कारोबार और संस्कृति से जोड़ने वाला बड़ा प्लेटफॉर्म बन रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के 'Vocal for Local' के संदेश के बीच रेलवे का यह मॉडल स्थानीय कारीगरों को ग्राहक, बाजार और पहचान-तीनों उपलब्ध कराने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »