FPIs Sell Off: आखिर कब पलटेगा खेल? शेयर बाजार से लगातार भाग रहे ये निवेशक

FPI Sell Off In October: विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार के प्रति बेरुखी जारी है. अक्टूबर महीने में अब तक एफपीआई की तगड़ी बिकवाली देखने को मिली है और निकासी का आंकड़ा सितंबर महीने में कुल निकासी का स्तर पार कर चुका है.

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अक्टूबर में जारी है विदेशी निवेशकों की बिकवाली. (Photo: Reuters) अक्टूबर में जारी है विदेशी निवेशकों की बिकवाली. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:22 PM IST

भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) से विदेशी निवेशकों का मूड लगातार खराब चल रहा है और इसका अंदाजा एफपीआई की बिकवाली (FPIs Sell Off) के बढ़ते आंकड़े को देखकर लगाया जा सकता है. सितंबर महीने में तगड़ी निकासी के बाद अक्टूबर में भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इंडियन इक्विटी से 52000 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल लिए हैं और ये आंकड़ा पूरे सितंबर महीने में की गई बिकवाली के पार निकल गया है.  

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लगातार दूसरे महीने दनादन बिकवाली
विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार के पैसे निकालने का ये लगातार दूसरा महीना है. पीटीआई की रिपोर्ट में डिपॉजिटरी के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि प्रतिकूल ग्लोबल परिस्थितियों के बीच अक्टूबर महीने में अब तक एफपीआई ने 52,100 करोड़ रुपये की बिकवाली की है. इससे पहले सितंबर महीने में भी एफपीआई ने Indian Stock Market से 35,861 करोड़ रुपये की नेट निकासी की थी. 

2026 में अब तक 2.13 लाख करोड़ साफ
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो सितंबर और अक्टूबर महीने में बिकवाली से पहले जुलाई और अगस्त महीने में विदेशी निवेशकों का निवेश आया था. एफपीआई ने भारतीय शेयरों में जुलाई महीने के दौरान 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जबकि इसके अगले अगस्त महीने में 29,631 करोड़ रुपये लगाए थे. 

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हालांकि, इससे पहले लगातार बिकवाली का सिलसिला जारी थी. कुल मिलाकर हालिया बिकवाली के बाद एफपीआई के आउटफ्लो पर नजर डालें, तो 2026 में अब तक FPI ने भारतीय इक्विटी से 3.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो कि पूरे 2025 के दौरान निकाले गए 1.66 लाख करोड रुपये से कहीं ज्यादा है. 

FPIs का मूड क्यों है खराब? 
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार के प्रति मूड खराब होने के पीछे के कारणों की बात करें, तो रिपोर्ट में इसके पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार जारी वृद्धि और मजबूत डॉलर को बताया गया है, जिनसे विदेशी निवेशकों के सेंटीमेंट पर निगेटिव इम्पैक्ट डाला है. 

हालांकि, 16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने मामूली खरीदारी की थी. इसे लेकर जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटिजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 5.3 फीसदी से घटकर 5.08 फीसदी तक की मामूली गिरावट और डॉलर के मुकाबले रुपये का मजबूत होना एफपीआई के रुख में अस्थायी बदलाव के पीछे रहे.

लंबे समय से शेयर मार्केट में भारी-उतार चढ़ाव का सामना कर रहे निवेशकों को बीते सप्ताह जोरदार फायदा हुआ. मार्केट में तेजी के बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2,256.94 अंक या 3.11 फीसदी की बढ़त में रहा, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 625.7 अंक या 2.77 फीसदी चढ़ा.

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