बैंकों में फ्रॉड रोकने को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने बड़ा संकेत दिया है. आयोग ने कहा है कि क्रेडिट अप्रेजल और क्रेडिट मॉनिटरिंग में सही ट्रेनिंग की कमी, फ्रॉड की एक वजह है. इसी वजह से बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने की सलाह दी गई है. यह बात 3 अगस्त के उस सर्कुलर में कही गई है, जो सतर्कता जागरूकता सप्ताह को लेकर जारी हुआ. इसका मकसद जागरूकता बढ़ाना है. साथ ही पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में ईमानदारी को बढ़ावा देना भी इसका हिस्सा है.
सर्कुलर में प्रिवेंटिव विजिलेंस इनिशिएटिव्स पर जोर दिया गया है. इस साल सतर्कता जागरूकता सप्ताह 26 अक्टूबर से 1 नवंबर, 2026 तक मनाया जाएगा. इसकी थीम 'समृद्धि के लिए ईमानदारी' रखी गई है. आयोग ने इस आयोजन को जागरूकता और ईमानदारी बढ़ाने के मकसद से जोड़ा है. आयोग ने सभी संगठनों को 17 अगस्त से 16 नवंबर तक 3 महीने का प्रिवेंटिव विजिलेंस कैंपेन चलाने को कहा है.
यह सलाह उसी तैयारी का हिस्सा है, जो सतर्कता जागरूकता सप्ताह से जुड़ी है. इस कैंपेन के दौरान काम को तय फोकस एरिया में बांटने की बात कही गई है. इस दौरान 5 मोर्चों पर फोकस रहेगा. इनमें लंबित शिकायतों का निपटारा शामिल है. लंबित मामलों के निपटारे पर भी जोर रहेगा. बाकी फोकस कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम, डिजिटल इनिशिएटिव्स और कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट पर रहेगा.
रिपोर्ट में 20 केस स्टडीज
कैपेसिटी बिल्डिंग पहल के तहत आयोग ने एडवाइजरी बोर्ड ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंशियल फ्रॉड्स (ABBFF) की एक रिपोर्ट का जिक्र किया है. ABBFF ने 'फ्रॉड के तौर-तरीके और जड़ कारणों का विश्लेषण' नाम से यह रिपोर्ट तैयार की है. इसमें 20 केस स्टडीज शामिल हैं. आयोग ने इसे कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम की डिटेल बताते हुए रखा है.
सीवीसी ने कहा, 'ABBFF ने देखा है कि क्रेडिट अप्रेजल और क्रेडिट मॉनिटरिंग में सही ट्रेनिंग की कमी, फ्रॉड की एक वजह है. पब्लिक सेक्टर के बैंक और वित्तीय संस्थान इन केस स्टडीज के जरिए इन पहलुओं पर जोर देने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चला सकते हैं.' सर्कुलर में कहा गया है कि सभी मंत्रालय, विभाग और संगठन सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें. आयोग चाहता है कि इससे जुड़े सभी लोग इसमें हिस्सा लें. मकसद यह है कि कैंपेन पीरियड के दौरान अच्छे नतीजे हासिल किए जा सकें.
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