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US-Iran Deal Impact: आम लोगों से इकोनॉमी तक... ट्रंप-ईरान डील से भारत को एक नहीं, ये 10 बड़े फायदे

आजतक बिजनेस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:59 AM IST
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग खत्म हो गई है और होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस के जहाजों की आवाजाही भी शुरू हो गई है. यूएस-ईरान के बीच हुए ये शांति समझौता (US-Iran Peace Deal) दुनिया के लिए बेहद राहत भरा है और इसका तत्काल असर भी दिखने लगा है. खासतौर पर इससे भारत को एक नहीं, बल्कि कई बड़े फायदे होने वाले हैं, जो आम आदमी से लेकर भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) तक से जुड़े हुए हैं. (Photo: ITG)

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पहला फायदा: Oil-Gas संकट 
मिडिल ईस्ट में जंग की आग में पाकिस्तान, ब्रिटेन, साउथ कोरिया से लेकर बांग्लादेश, भारत तक झुलसे. अमेरिका-इजरायल ने बीते 28 फरवरी को ईरान पर हमले की शुरुआत की, तो ईरान ने भी पलटवार कर दिया और बड़ा कदम उठाते हुए होर्मुज स्ट्रेट बंद किया. ईरान के इस फैसले ने कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आग लगा दी और 100 दिन से ज्यादा समय तक तेल दुनिया को डराता हुआ नजर आया. इससे तेल आयात पर निर्भर देशों में संकट खड़ा हो गया. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार इजाफे के साथ ही एलपीजी शॉर्टेज और सिलेंडर की महंगाई ने आम लोगों को झटका दिया. अब Hormuz Strait रिओपन होने से ये संकट कम होगा. (Photo: File ITG)

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दूसरा फायदा: पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता! 
मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते सरकारी तेल कंपनियों को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा था. इसके चलते 4 साल बाद बड़ा फैसला लेते हुए OMCs ने देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए. एक बार नहीं, बल्कि सिर्फ 10 दिनों में ही चार बार Petrol-Diesel Price Hike किया गया. पेट्रोल 7.40 रुपये प्रति लीटर, तो डीजल 7.52 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया. इसके अलावा देश में पेट्रोल पंपों पर भी पैनिक बायिंग समेत नो- फ्यूल जैसे बोर्ड देखने को मिले. पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्रूड ऑयल का सीधा असर पड़ता है और Crude में 1 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा भारत में 50-60 पैसे प्रति लीटर तक दाम बढ़ा सकता है. अब तेल आयात फिर से सुचारू होने से क्रूड सस्ता हुआ है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती होने की उम्मीद बढ़ गई है, जो आम जनता के लिए राहत भरी बात है. (Photo: ITG)

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तीसरा फायदा: महंगे LPG सिलेंडर से निजात 
अमेरिका-ईरान पीस डील से देश की जनता को महंगे एलपीजी सिलेंडर से निजात मिल सकती है. भारत में गैस का ज्यादातर आयात खाड़ी देशों से होता है और युद्ध से सप्लाई चेन टूटने से देश में LPG Crisis भी देखने को मिला था. इससे निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए, फिर भी LPG Cylinder Price Hike कंपनियों को करना पड़ा. अब युद्ध थमने से गैस आयात फिर से बहाल होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा कीमतों में कटौती करने की उम्मीद बढ़ी है. (Photo: ITG)

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चौथा फायदा: महंगाई का खतरा कम 
कच्चा तेल और महंगाई का सीधा कनेक्शन है. तेल की कीमतों में आग लगती है, तो पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाता है और खासतौर पर डीजल की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ता है, जिससे खाने-पीने की चीजों के साथ ही अन्य रोजमर्रा के जरूरत की चीजों पर महंगाई की मार पड़ती है. कच्चे तेल में गिरावट से महंगाई का गहराता हुआ जोखिम भी कम होता नजर आ रहा है. (Photo: Pixabay)

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पांचवां फायदा: शेयर बाजार के लिए पॉजिटिव
US-Iran Deal शेयर बाजार के लिए भी पॉजिटिव है. दरअसल, ग्लोबल टेंशन, युद्ध, जियो-पॉलिटिकल तनाव का सीधा असर शेयर बाजारों पर पड़ता है. भारत की बात करें, तो ये लंबे समय से प्रभावित है. इजरायल-फिलिस्तीन जंग, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-ईरान संघर्ष हर तनाव में बाजार ने लंबे समय तक बड़ी गिरावट झेली. लेकिन युद्ध खत्म होने की खबर से अचानक बाजार में हरियाली देखने को मिली. शेयर बाजार निवेशकों की धारणा में सुधार से सेंसेक्स-निफ्टी में तेजी आई. (Photo: Pexels)

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छठा फायदा: विदेशी निवेशकों की वापसी
मिडिल ईस्ट जंग थमने से लगातार भारतीय शेयर बाजार से भाग रहे विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद बढ़ गई है. ऐसा होने पर शेयर बाजार को भी सपोर्ट मिलेगा. बता दें कि इस साल 2026 के ज्यादातर महीनों में FPIs शुद्ध बिकवाल बने हैं. सिर्फ फरवरी महीने को छोड़कर अब तक उनकी निकासी का सिलसिला जारी है. डिपॉजिटरी के आंकड़े देखें, तो जनवरी से अब तक 2.87 लाख करोड़ रुपये की निकासी की गई है. जो इससे पिछले साल की समान अवधि के 1.66 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. (Photo: Reuters)

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सातवां फायदा: रुपया होगा मजबूत
अमेरिका-ईरान में जंग से चरम पर पहुंची ग्लोबल टेंशन खत्म होने और Crude Oil Price कम होने से इंडियन करेंसी रुपया को भी फायदा होगा और ये दिखने भी लगा है. मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 8 पैसे बढ़त के सात 94.63 पर खुला, जबकि सोमवार को यह 94.71 पर बंद हुआ था. बीते दिनों ये 95 का आंकड़ा पार कर चुका था. अब क्रूड का भाव घटने से भारत का तेल आयात बिल कम होगा और इससे देश का व्यापार घाटा भी घटेगा, जो करेंसी पर दबाव कम करने में मददगार साबित होगा. (Photo: Pixabay)

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आठवां फायदा: 90 लाख प्रवासियों को फायदा
मिडिल ईस्ट की जंग ने तेल-गैस का संकट ही नहीं गहराया, बल्कि लाखों लोगों के सामने रोजगार समस्या को भी खड़ा कर दिया था. दरअसल, रिपोर्ट्स के मुताबिक तकरीबन 90 लाख भारतीय खाड़ी देशों में काम करते हैं. अब US-Iran Peace Deal से इन भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और रोजगार को लेकर पैदा हुए जोखिम कम हो सकेगा. (Photo: Reuters)
 

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नौंवा फायदा: आयात-निर्यात में तेजी 
वेस्ट एशिया संघर्ष ने आयात-निर्यात पर भी गहरा असर डाला था. जंग के दौरान मरीन इंश्योरेंस और माल ढुलाई की लागत बढ़ी, अब युद्ध खत्म होने से ये लागत घटेगी, जिससे भारतीय प्रोडक्ट्स का खाड़ी देशों के बाजारों में निर्यात आसान होगा. UAE, सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में आर्थिक गतिविधियां तेज होने से भारत के इंजीनियरिंग सामान, फूड प्रोडक्ट्स, जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल और केमिकल्स की डिमांड बढ़ सकती है. अगर आयात की बात करें, तो ईरान से भारत आने वाले (India Import From Iran) सामनों में सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन के साथ ही कांच के बर्तन सबसे ज्यादा मात्रा में आयात किए जाते हैं. (Photo: ITG)

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दसवां फायदा: चाबहार का भारत को लाभ
मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने और ईरान संघर्ष खत्म होने से भारत को Chabahar Port के जरिए बड़े फायदे मिल सकते हैं. जो भारत के लिए अफगानिस्तान, मिडिल ईस्ट और रूस तक पहुंच का खास रास्ता है. इससे माल ढुलाई सुचारू होगी, शिपिंग कॉस्ट में कमी आएगी, भारतीय निर्यातकों को सस्ता और तेज रास्ता मिलेगा. इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) को रफ्तार मिलेगी. भारत ने चाबहार पोर्ट के विकास में बड़ा निवेश किया है. (Photo: Reuters) 

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