बिहार में सिस्टम की लापरवाही! जिस ट्रॉली से जवान बेटे को ले गए अस्पताल, उसी पर शव लेकर लौटे घर

बिहार के वैशाली से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली मार्मिक तस्वीर सामने आई है. लालगंज में 31 वर्षीय मोनू कुमार की अस्पताल में मौत के बाद परिजनों को शव घर ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन नहीं मिला. मजबूर परिवार उसी ट्रॉली पर शव रखकर घर लौटने को मजबूर हुआ, जिस पर मोनू को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था.

Advertisement
एंबलेंस नहीं मिलने पर बेटे का शव लेकर आता परिवार. (Photo:Screengrabs) एंबलेंस नहीं मिलने पर बेटे का शव लेकर आता परिवार. (Photo:Screengrabs)

aajtak.in

  • वैशाली,
  • 03 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:14 AM IST

बिहार के वैशाली से सामने आई एक तस्वीर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ इंसानी बेबसी की कहानी भी बयां कर रही है. जिस ठेले (ट्रॉली) पर एक परिवार अपने 31 साल के बेटे को इलाज की उम्मीद में अस्पताल लेकर पहुंचा था, कुछ देर बाद उसी ठेले पर उसका शव रखकर घर लौटना पड़ा. अस्पताल में युवक की मौत के बाद परिवार को शव ले जाने के लिए न एंबुलेंस मिली और न ही शव वाहन. मजबूर परिजन ठेले पर शव लेकर घर जाने को मजबूर हो गए.

Advertisement

मामला वैशाली के लालगंज थाना क्षेत्र के कसेरा टोला वार्ड नंबर 6 का है. यहां रहने वाले 31 वर्षीय मोनू कुमार घर के पास पानी से भरे गड्ढे में गिर गए थे. हादसे के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई. परिवार के लोग किसी तरह मोनू को ठेले पर रखकर लालगंज रेफरल अस्पताल पहुंचे.

अस्पताल ने नहीं दिया एंबुलेंस
परिजनों को उम्मीद थी कि अस्पताल में इलाज से मोनू की जान बच जाएगी, लेकिन डॉक्टर ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. इसके बाद सामने आई दूसरी मुश्किल थी- शव को घर कैसे ले जाया जाए?

परिजनों के मुताबिक, उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से शव घर ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध कराने की मांग की. आरोप है कि उन्हें एंबुलेंस या शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया. काफी इंतजार और कोशिश के बाद परिवार के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा.

Advertisement

जिस ठेले पर मोनू को अस्पताल लाया गया था, उसी ठेले पर उनका शव रख दिया गया. इसके बाद परिवार उसी ठेले को लेकर अपने घर की ओर चल पड़ा. इस दौरान किसी के लिए यह सिर्फ एक ठेला था, लेकिन उस परिवार के लिए यही उनके बेटे को आखिरी बार घर पहुंचाने का सहारा बन गया.

वीडियो देख गुस्साए लोग
इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी है. सवाल उठ रहा है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के बाद अगर किसी मरीज की मौत हो जाए तो शव को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था क्या है? क्या गरीब परिवारों के लिए ऐसी सुविधा सिर्फ कागजों तक सीमित है?

घटना को लेकर वैशाली के सिविल सर्जन ने कहा है कि मामले की जांच कराई जाएगी. अगर जांच में डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

मोनू के परिवार के लिए यह सिर्फ अस्पताल की व्यवस्था का सवाल नहीं है. यह उस आखिरी सफर की कहानी है, जिसमें बेटे को कंधा देने के बजाय परिवार को उसी ठेले का सहारा लेना पड़ा, जिस पर वह जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचा था.

(इनपुट- विकास कुमार)

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »