बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और सीतामढ़ी के पूर्व सांसद अर्जुन राय ने पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने साफ कर दिया कि वह सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण करेंगे. उनके इस फैसले ने बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है.
रविवार को मुजफ्फरपुर के चांदनी चौक स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में अर्जुन राय ने अपने राजनीतिक भविष्य का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक RJD में रहने के बाद अब उन्हें महसूस हुआ कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा और उन सिद्धांतों से दूर हो चुकी है, जिनके आधार पर लालू प्रसाद यादव ने इसे खड़ा किया था.
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अर्जुन राय ने कहा कि मौजूदा नेतृत्व के दौर में पार्टी की दिशा बदल गई है. उनका आरोप है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में RJD अब उन मूल नीतियों पर नहीं चल रही, जिनसे कभी पार्टी की पहचान बनी थी. इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया.
तेजस्वी के नेतृत्व पर उठाए सवाल
प्रेसवार्ता के दौरान अर्जुन राय ने कहा कि उनका फैसला किसी व्यक्तिगत नाराजगी का नहीं, बल्कि राजनीतिक सोच और विचारधारा का है. उन्होंने कहा कि पार्टी में अब पहले जैसी कार्यशैली और वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं रही. यही वजह है कि उन्होंने खुद को RJD से अलग करने का निर्णय लिया.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भारतीय जनता पार्टी की नीतियों से वह प्रभावित हैं. साथ ही बिहार भाजपा की कार्यशैली को भी उन्होंने सकारात्मक बताया. अर्जुन राय ने कहा कि वह भाजपा के साथ मिलकर राज्य और देश के विकास के लिए काम करना चाहते हैं.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सोमवार को वह औपचारिक रूप से BJP की सदस्यता ग्रहण करेंगे. ऐसे में बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनका यह कदम राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है.
अनुच्छेद 370 और परिसीमन पर केंद्र सरकार की तारीफ
अर्जुन राय ने केंद्र सरकार के कई फैसलों की खुलकर सराहना की. उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे देश की एकता और अखंडता मजबूत हुई है.
उन्होंने बिहार में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का भी स्वागत किया. उनके मुताबिक सरकार जनहित में लगातार महत्वपूर्ण फैसले ले रही है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों का दूरगामी असर देखने को मिलेगा.
अर्जुन राय के इन बयानों को भाजपा की विचारधारा के प्रति उनके झुकाव के तौर पर भी देखा जा रहा है. यही वजह है कि उनके भाजपा में शामिल होने की घोषणा को महज दल बदल नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है.
उत्तर बिहार की राजनीति पर पड़ सकता है असर
अर्जुन राय उत्तर बिहार के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. सीतामढ़ी और आसपास के इलाकों में उनकी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है. ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले उनका BJP में जाना चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि RJD के एक वरिष्ठ और पुराने चेहरे के पार्टी छोड़ने से विपक्षी गठबंधन पर भी असर पड़ सकता है. खासकर उत्तर बिहार में इसका राजनीतिक संदेश दूर तक जा सकता है, जहां चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प रहने की संभावना है.
हालांकि, अर्जुन राय के इस्तीफे और उनके आरोपों पर राष्ट्रीय जनता दल की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. अब सभी की नजर सोमवार पर टिकी है, जब वह औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे. इसके बाद बिहार की चुनावी राजनीति किस दिशा में जाती है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी.
मणि भूषण शर्मा