थानेदार समेत पूरी रेड टीम सस्पेंड... मुजफ्फरपुर चोरनिया कांड पर SSP का बड़ा एक्शन

मुजफ्फरपुर के चोरनिया कांड में SSP ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गायघाट थानाध्यक्ष समेत पूरी रेड टीम को सस्पेंड कर दिया. पॉक्सो आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान भीड़ हिंसा और फायरिंग में ग्रामीण जगतवीर राय की मौत हुई थी. जांच रिपोर्ट में लापरवाही मिलने पर छह पुलिसकर्मी सस्पेंड और दो गृह रक्षकों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है.

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पप्पू यादव और तेजस्वी यादव मृतक के घर पहुंचे.(Photo: Manibhushan Sharma/ITG) पप्पू यादव और तेजस्वी यादव मृतक के घर पहुंचे.(Photo: Manibhushan Sharma/ITG)

मणि भूषण शर्मा

  • मुजफ्फरपुर,
  • 28 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:35 PM IST

बिहार के मुजफ्फरपुर में चोरनिया कांड को लेकर वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने बड़ी कार्रवाई की है. काम में लापरवाही और विवेकपूर्ण निर्णय न लेने के आरोप में गायघाट के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह समेत पूरी छापेमारी टीम को निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई ग्रामीण एसपी राजेश कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें ऑपरेशन के दौरान गंभीर चूक सामने आई है.

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पुलिस विभाग की इस कार्रवाई से जिले के महकमे में हड़कंप मच गया है. वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, जांच में छापेमारी के दौरान कई स्तर पर लापरवाही और जोखिम भरे निर्णय सामने आए हैं. इसी आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए.

घटना 17-18 मार्च की रात की है, जब गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव में पुलिस टीम पॉक्सो एक्ट के एक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पहुंची थी. बताया जाता है कि छापेमारी के दौरान हालात अचानक बिगड़ गए और स्थिति हिंसक हो गई.

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छापेमारी के दौरान हिंसा और ग्रामीण की मौत

बताया जाता है कि पुलिस टीम के पहुंचते ही आरोपियों ने शोर मचाकर ग्रामीणों को इकट्ठा कर लिया. देखते ही देखते भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव, लाठी-डंडों और फायरिंग से हमला कर दिया. स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस टीम को मौके से निकलने में मुश्किलें आने लगीं.

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हालात बिगड़ने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह को हवाई फायरिंग करनी पड़ी और टीम किसी तरह वहां से बाहर निकल पाई. हालांकि इस अफरा-तफरी के दौरान एक ग्रामीण जगतवीर राय की गोली लगने से मौत हो गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया.

घटना के बाद दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए. ग्रामीणों ने पुलिस पर सीधे गोली चलाने का आरोप लगाया, जबकि पुलिस का कहना है कि फायरिंग आत्मरक्षा में की गई थी.

जांच और एफएसएल की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल टीम को मौके पर बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए. साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में विशेष टीम गठित कर जांच शुरू की गई. यह जांच मजिस्ट्रेट की देखरेख में की जा रही है.

ग्रामीण एसपी की रिपोर्ट में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं. रिपोर्ट के अनुसार संवेदनशील इलाके में बिना पर्याप्त पुलिस बल के छापेमारी की गई और पूर्व की घटनाओं के बावजूद पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती गई.

थानेदार राजा सिंह.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हालात को संभालने में विवेकपूर्ण निर्णय की कमी रही और स्थानीय चौकीदार द्वारा संभावित विरोध की जानकारी भी नहीं दी गई.

छह पुलिसकर्मी निलंबित, राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज

इन खामियों के आधार पर एसएसपी ने तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह समेत कुल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. इसके अलावा छापेमारी में शामिल दो गृह रक्षकों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है.

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घटना के बाद मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है. नेता पप्पू यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव मृतक के घर पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग की.

इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है. अब सवाल यह है कि इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और क्या इस कार्रवाई से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग पाएगी. यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर जिले के पुलिस ऑपरेशन और उसके बाद हुई कार्रवाई को लेकर चर्चा में बना हुआ है.

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