बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की सियासी तपिश के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को तगड़ा झटका लगा है. आरजेडी के प्रवक्ता रहे मृत्युंजय तिवारी ने गुरुवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया. तिवारी ने तेजस्वी यादव के करीबी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा ये लोग पार्टी को दीमक की तरह चाटकर बर्बाद कर दिया है. ऐसे लोगों से तेजस्वी यादव घिरे हुए हैं और अब उनका पार्टी में रहना उचित नहीं है.
बिहार की सियासत में मृत्युंजय तिवारी एक जाना पहचाना नाम है .पार्टी के कद्दावर ब्राह्मण चेहरा और वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का आरजेडी से इस्तीफा देना महज एक पद छोड़ना नहीं है, बल्कि उस गहरे दर्द का सार्वजनिक होना है जिससे लालू परिवार के अपने सदस्य भी पिछले कुछ समय से जूझ रहे हैं.
तेजस्वी यादव के कुछ खास करीबियों के चलते ने सिर्फ वफादार नेता ही बल्कि घर के अपने भी बगावत पर मजबूर हुए. मृत्युंजय तिवारी क्या तेजस्वी के उन्हीं करीबियों के चलते पार्टी से छोड़ी है, जिनसे लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य और बेटे तेज प्रताप यादव यादव परेशान होकर अलग हो गए थे? रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप भी तेजस्वी के करीबी नेताओं पर ही सवाल उठाते रहे हैं?
मृत्युंजय तिवारी के निशाने पर तेजस्वी के करीबी
आरजेडी से इस्तीफा देने वाले मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि आरजेडी जब अपने सबसे बुरे दौर में थी तब लालू प्रसाद यादव ने मुझे बुलाकर पार्टी के प्रवक्ता और मीडिया इंचार्ज की जिम्मेदारी सौंपी थी. मैंने पूरी ईमानदारी से जिम्मेदारी निभाई और विचारधारा को आगे बढ़ाया, लेकिन पार्टी ने मेरे साथ जैसा व्यवहार किया, उसके चलते पार्टी में रहना मुश्किल हो गया है. पिछले 7-8 महीनों में मुझे अपमानित किया गया, जिसे लेकर मैंने पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से शिकायत की और तेजस्वी यादव से इस बारे में बताया, लेकिन उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया.
मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि पार्टी में कुछ लोग खुद को इतना बड़ा समझते हैं कि वो तेजस्वी यादव की नहीं सुनते. तेजस्वी प्रसाद यादव को उन्होंने हाईजैक कर रखा है. तिवारी ने दावा किया कि लालू प्रसाद और राबड़ी देवी अब पार्टी के कामकाज को प्रभावित करने में सक्षम नहीं हैं. आरजेडी के मुट्ठी भर लोगों ने पार्टी को अपने नियंत्रण में ले लिया. संगठन के भीतर परिस्थितियां इस हद तक बदल गई थीं कि उन्हें अब पार्टी से जुड़े रहना उचित नहीं लगा.
रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप की भी पुरानी टीस
मृत्युंजय तिवारी की ओर से तेजस्वी यादव के करीबियों से परेशान होने की बात कही, लेकिन किसी नेता का नाम नहीं लिया. तेजस्वी के करीबियों के चलते तिवारी पहले नेता नहीं हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ी हो. तिवारी की शिकायत भी बिल्कुल नई नहीं है. कुछ समय पहले लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य और बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने भी बिल्कुल इन्हीं शब्दों और इसी दर्द को बयां किया था. तेज प्रताप यादव और बेटी रोहिणी आचार्य भी तेजस्वी के करीबियों के चलते पार्टी को अलविदा कहा था.
रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप ने तेजस्वी यादव के मुख्य राजनीतिक सलाहकारों (विशेष रूप से संजय यादव और रमीज खान) पर सीधा निशाना साधा था. रोहिणी ने आरोप लगाया था कि ये 'सलाहकार' तेजस्वी को परिवार और जमीन से काट रहे हैं, मनमर्जी चला रहे हैं और पार्टी के समर्पित लोगों का अपमान कर रहे हैं.
तेज प्रताप यादव ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि कुछ लोग तेजस्वी यादव के इर्द-गिर्द घेरा बनाकर बैठे हैं जो किसी को उन तक पहुंचने नहीं देते. अब मृत्युंजय तिवारी ने भी तेजस्वी यादव के करीबी नेताओं पर भी निशाना साधा है और उन्हें दीमक कहा है. ऐसे में मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे और लालू के बेटे और बेटी की नाराजगी की जड़ें एक ही 'सिंडिकेट' से जुड़ी हैं.
कौन है तेजस्वी यादव के करीबी जो निशाने पर हैं
तेजस्वी यादव के सबसे करीबी नेताओं में राज्यसभा सांसद संजय यादव और राजनीतिक सलाहकार रमीज नेमत खान (रमीज) उनकी कोर टीम का हिस्सा हैं, इसके अलावा पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और विधायक शक्ति सिंह यादव, वरिष्ठ नेता मनोज झा, और सुनील सिंह को उनके करीबी और विश्वासपात्र माना जाता है. तेज प्रताप यादव ने इन्हीं पांचों नेताओं को अपने निशाने पर लिया करते हैं तो रोहिणी आचार्य भी संजय यादव व रमीज खान को घेर चुकी है.
रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप जिस 'अहंकार' और 'दीवार' के खिलाफ घर के अंदर लड़ रहे थे, मृत्युंजय तिवारी उसी दीवार से टकराकर पार्टी से बाहर हो गए. मृत्युंजय तिवारी ने अपने इस्तीफे के बाद साफ़ कहा कि इस सिंडिकेट के आगे लालू प्रसाद यादव और पूर्व सीएम राबड़ी देवी भी मजबूर हैं, वे भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं, यही लाचारी रोहिणी के बयानों में भी झलकती थी तो तेज प्रताप यादव ने इन्हीं लोगों को लेकर पार्टी से अलग राह चुन ली.
आरजेडी सूत्रों की माने तो मृत्युंजय तिवारी मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव से नाखुश थे और उन्होंने पार्टी नेतृत्व से इसकी शिकायत की थी. ऐसे में तिवारी ने कहा कि उन्होंने सुनील सिंह और तनवीर हसन सहित कई वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में आरजेडी कार्यालय में अपना इस्तीफा सौंप दिया.
कुबूल अहमद