आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आरा के अगिआंव में पूर्व राजद विधायक अरुण यादव के पिता स्वर्गीय भुनेश्वर यादव की तृतीय पुण्यतिथि कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे. वहां उन्होंने प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर और हवन-पूजन में भाग लेकर श्रद्धांजलि दी. इसके बाद लालू यादव ने मंच पर प्रस्तुत पारंपरिक गोड़ नाच और लोकगीतों का आनंद लिया और कलाकारों को सम्मानित किया.
लालू यादव इस पूरे आयोजन के दौरान करीब ढाई से तीन घंटे तक मौजूद रहे. राजद सुप्रीमो के आगमन की खबर मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह भर गया. बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ता अपने नेता की एक झलक पाने को बेताब नजर आए. ये आयोजन श्रद्धांजलि के साथ भोजपुर की लोक परंपरा और लालू के पुराने ठेठ अंदाज का गवाह बना.
आरा के अगिआंव स्थित पूर्व राजद विधायक अरुण यादव के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में लालू प्रसाद यादव का पुराना गंवई अंदाज देखने को मिला. राजद सुप्रीमो ने सबसे पहले स्वर्गीय भुनेश्वर यादव की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया. इसके बाद वे हवन-पूजन कार्यक्रम में बैठे और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्निकुंड में आहुतियां देकर धार्मिक अनुष्ठान पूरा किया.
मंच से बांटे पैसे
पुण्यतिथि कार्यक्रम के दौरान मंच पर भोजपुर की समृद्ध लोक संस्कृति से जुड़े पारंपरिक गोड़ नाच और लोकगीतों की खास प्रस्तुति हुई. लालू यादव ने काफी देर तक बैठकर कलाकारों की इस प्रस्तुति का पूरा आनंद लिया. लोक कलाकारों के हुनर और गायकी से प्रभावित होकर राजद प्रमुख ने मंच से ही अपने हाथों से उन्हें नकद राशि देकर सम्मानित और प्रोत्साहित किया.
कलाकारों के लिए भगवान हैं लालू: सोनू
लालू यादव के इस अंदाज पर राजद एमएलसी सोनू राय ने कहा कि लालू प्रसाद यादव का लोगों से जुड़ने का एक बेहद अनूठा स्वभाव है. उन्होंने कहा कि आलोचना करने वाले भले ही सोशल मीडिया पर लिखें, लेकिन गोड़ऊ नाच जैसी लोक परंपराओं को बढ़ावा देना केवल मनोरंजन नहीं बल्कि पुरानी विरासत को जीवित रखना है. विलुप्त होती लोक कलाओं को बचाने वाले कलाकारों के लिए लालू यादव किसी भगवान से कम नहीं हैं.
सोनू राय ने आगे कहा कि यदि आज की युवा पीढ़ी इन लोक कलाओं को अपनी आंखों से नहीं देखेगी तो भविष्य में ये सब सिर्फ किताबों में पढ़ने को मिलेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि लालू यादव द्वारा दिया गया ये प्रोत्साहन लोक कलाकारों के मान-सम्मान और रोजगार दोनों से सीधा जुड़ा है. उन्होंने जोर दिया कि देश में रहते हुए अपनी पुरानी परंपराओं का सम्मान करना हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है.
सोनू कुमार सिंह