नाव धीरे-धीरे पानी को चीरती हुई आगे बढ़ रही थी और दूर-दूर तक केवल पानी का साम्राज्य नजर आ रहा था. बिहार के खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड का भरतखंड गांव इस समय बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब चुका है.
जिन गलियों और रास्तों पर कभी चहल-पहल रहती थी, वहां अब सिर्फ पानी का कब्जा है. गांव में दाखिल होने के लिए नाव ही अकेला जरिया बची है. आजतक की टीम इसी नाव के जरिए भरतखंड पहुंची और बाढ़ से बिगड़े जमीनी हालात का जायजा लिया.
भरतखंड गांव उस संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां गंगा, कोसी, गंडक और बागमती नदियों का सीधा असर देखने को मिलता है. इस समय बाढ़ का पानी गांव के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले चुका है.
कम्युनिटी किचन से राहत
बाढ़ की वजह से ग्रामीणों का आम जीवन पूरी तरह ठप हो गया है. राशन, पानी और दूसरी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को नाव के सहारे ही पानी के बीच से रास्ता तय करना पड़ रहा है. आपदा की इस मुश्किल घड़ी में स्थानीय प्रशासन की ओर से राहत कार्य शुरू किए गए हैं.
प्रभावित ग्रामीणों को भोजन मुहैया कराने के लिए गांव में कम्युनिटी किचन चलाया जा रहा है. भोजन मिलने से लोगों को खाने-पीने की बड़ी चिंता से राहत मिली है.
इसके साथ ही, गांव में स्वास्थ्य सेवाओं का भी इंतजाम किया गया है. डॉक्टरों की टीम के साथ जरूरी दवाइयां मुहैया कराई जा रही हैं. बाढ़ के बीच गांव में ही इलाज की सुविधा मिलने से मरीजों को दूर-दराज के अस्पतालों में जाने की मशक्कत से निजात मिली है.
महिलाओं के लिए अस्थायी शौचालयों की व्यवस्था
पानी से घिरे इस गांव में महिलाओं के लिए स्वच्छता और बुनियादी जरूरतें एक बड़ी चुनौती बनी हुई थीं. इस समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अस्थायी शौचालयों का निर्माण करा रही है, ताकि महिलाओं को असुविधा का सामना न करना पड़े.
नाव पर निर्भर ग्रामीण
आजतक से बातचीत करते हुए ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ ने उनके जीने के ढर्रे को पूरी तरह बदल दिया है. हर छोटे-बड़े काम के लिए वो नाव पर निर्भर हैं. हालांकि, सरकारी मदद मिलने से लोगों में थोड़ा संतोष जरूर दिखाई दिया.
यह भी पढ़ें: जिंदगी भर की कमाई से बनाए घर, अब खुद हथौड़ा चला रहे ग्रामीण... यूपी में बाढ़ ने उजाड़े आशियाने
ग्रामीणों का कहना है कि खाना, दवा और बुनियादी सुविधाएं मिलने से स्थिति काबू में है. भरतखंड गांव की ये तस्वीर पानी के बीच टिके उन लोगों के धैर्य को दिखाती है, जो इस वक्त सिर्फ बाढ़ का पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं.
रोहित कुमार सिंह