गाड़ियों की नंबर प्लेट पर दिख रहे शुरुआती 4 अंक सिर्फ अंक नहीं होते. बल्कि उस शहर की पहचान भी होते हैं, जिस शहर में उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन होता है. क्या हो अगर किसी शहर में इतनी गाड़ियां रजिस्टर हो जाएं कि उस शहर को अपनी पहचान यानी नंबर प्लेट के उन डिजिट को बदलना पड़े.
ऐसा ही कुछ पुणे के साथ होने वाला है. गाड़ियों के नंबर प्लेट पर दिखने वाली पुणे की पहचान अब बदलने वाली है. लगभग 37 साल से पुणे की गाड़ियों के नंबर प्लेट पर MH-12 कोड दिखता था. अगले कुछ दिनों में ये नंबर सिर्फ इतिहास बन जाएगा. क्योंकि नई गाड़ियों में इस कोड के नंबर प्लेट नहीं मिलेंगे. इसकी जगह MH-61 कोड इस्तेमाल होगा.
पुणे आरटीओ (RTO) में मौजूदा अल्फान्यूमेरिक रजिस्ट्रेशन कॉम्बिनेशन खत्म हो गए हैं. अधिकारियों की मानें तो MH-12 कोड के तहत आखिरी ZZ सीरीज के सभी 9999 नंबर इस हफ्ते खत्म हो गए हैं. इसके बाद आरटीओ अब नए MH-61 कोड से रजिस्ट्रेशन शुरू करने की तैयारी में है.
ट्रांसपोर्ट कमिशनर ऑफिस के एक अधिकारी ने बताया कि नई गाड़ियों का MH-61 कोड के तहत रजिस्ट्रेशन सोमवार से शुरू हो जाएगा. फिलहाल नेशनल इंफॉर्मेशन सेंटर (NIC) सिस्टम कुछ बैकेंड टेस्टिंग में लगा हुआ है.
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आम लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू करने से पहले फैंसी नंबर्स के लिए आवेदन मांगे गए हैं. इन स्पेशल नंबर्स के लिए व्हीकल ओनर्स को एक्स्ट्रा चार्ज देना होता है. फैंसी नंबर्स की प्रक्रिया के पूरा होने के बाद नए MH-61 कोड के तहत सामान्य गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन शुरू किए जाएंगे.
पुणे आरटीओ (RTO) के पास इस समय 44.88 लाख से ज्यादा लाइव रजिस्टर्ड व्हीकल हैं. आरटीओ अधिकारियों की मानें तो इनमें से ज्यादातर लाइव व्हीकल का रजिस्ट्रेशन 2011 के बाद हुआ है. इससे पहले रजिस्टर्ड ज्यादातर गाड़ियां या तो स्क्रैप हो चुकी हैं या दूसरे इलाकों में ट्रांसफर हो गई हैं.
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1 जुलाई 1989 से पुणे में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर MH-12 कोड यूज किया जा रहा है. यानी एमएच 12 कोड का पुणे की गाड़ियों से रिश्ता 37 साल पुराना है. देश भर में व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर का जो फॉर्मेट लागू है, उसके तहत किसी नंबर प्लेट के शुरुआती दो डिजिट राज्य की पहचान बताते हैं.
इसके बाद के दो नंबर्स आरटीओ कोड के लिए होते हैं. इसके बाद मैक्सिमम दो अफ्लाबेट और फिर यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर आते हैं. इस सिस्टम में आई (I) और ओ (O) को छोड़कर अल्फान्यूमेरिक कॉम्बिनेशन के जरिए आम तौर पर 59 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन नंबर बनाए जा सकते हैं. पुणे में ये संख्या पार हो चुकी है.
आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क