
Subsidy On Betel Vine Farming: भारत में पान के सेवन को लेकर गजब ही क्रेज है. जगह-जगह पान की पीक से लाल होती दीवारें और सड़कें इसके उदाहरण है. अलग-अलग तरीके के पान का स्वाद के लिए दूर-दूर तक चले जाते हैं. धार्मिक आयोजनों में पान का काफी महत्व है. देश के कई राज्यों में पान के बेल की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. फिलहाल सरकार की भी तरफ से इसकी खेती को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है.
मगही पान की दुनिया है दीवानी
बनारसी पान के स्वाद की पूरी दुनिया दीवानी है. इस पान के सेवन के लिए दूर-दूर से लोग वाराणसी पहुंचते हैं. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि वाराणसी के इस मशहूर पान की खेती बिहार के मगध क्षेत्र में होती है. इसे केंद्र सरकार की तरफ से जीआई टैग भी मिल चुका है. इसी कड़ी में अब बिहार सरकार मगही पान की खेती करने वाले इच्छुक किसानों को मगही पान, चाय और प्याज की खेती के लिए पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है. 300 वर्ग मीटर में मगही पान की खेती में आने वाली लागत 70 हजार 500 रुपये आंकी गई है. 50 प्रतिशत सब्सिडी के मिलने के बाद किसानों के खाते में कुल 32250 रुपये पहुंचेंगे. फिलहाल नवादा, गया, नालंदा और शेखपुरा जिले को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है. 10 सिंतबर से बिहार उद्यान विभाग द्वारा इसके लिए आवेदन भी शुरू कर दिया गया है.
यहां करें आवेदन
विशेष उद्यानिकी फसल योजना के तहत चलाई जा रही है इस योजना का लाभ बिहार के किसान राज्य के उद्यान निदेशालय की ऑफिशियल वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं, इस बारे में अधिक जानकारी के लिए जिले के उद्यान विभाग कार्यालय से भी जानकारी हासिल कर सकते हैं.

कैसे होती है पान की खेती
पान की खेती के लिए ठंड और छायादार जगह की आवश्यकता होती है. इसकी खेती के लिए 20 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान उपयुक्त है. इसके लिए हम बांस के माध्यम से बरेजा (छायानुमा संरचना) तैयार करते हैं. ताकि तापमान का संतुलन बना रहे और पान के पौधे को नुकसान ना हो. ये खेती जून-जूलाई में शुरू हो जाती है, जबकि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में अगस्त और सितंबर में भी पान के पौधों की रोपाई की जाती है. इसके अलावा कई राज्यों में इसकी खेती फरवरी मार्च से लेकर अगस्त महीने तक की जाती है.
मिट्टी का बेड तैयार कर करते हैं पौधे की रोपाई
पान के पौधों की रोपाई के लिए मिट्टी का बेड तैयार किया जाता है. इसमें जमीन की पहले जुताई की जाती है. फिर मिट्टी से बेडनुमा आकार की संरचना तैयार की जाती है. फिर इसकी हल्की सिंचाई की जाती है. उसके बाद पान के पौधे की रोपाई की शुरुआत होती है. इस दौरान दो पौधों के बीच दूरी का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. यहां किसान कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेमी और पौधे से पौधे की बीच की दूरी 15 सेमी रखते हैं.