जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में स्थित देबरा गांव ऑर्गेनिक खेती के नए मॉडल के रूप में उभर रहा है. जैविक खेती ने ना सिर्फ किसानों के चेहरों पर राहत की चमक लौटाई है, बल्कि यह साबित कर दिया है कि सही समर्थन मिले तो पहाड़ी इलाकों में भी खेती की तस्वीर बदली जा सकती है. गांव के किसान के मुताबिक, इस बार फसल इतनी अच्छी आई है कि इसे 'बंपर हार्वेस्ट' कहा जा रहा है.
उधमपुर में देबरा गांव में खेती का माहौल बदल रहा है. ऑर्गेनिक फूलगोभी की बंपर फसल हो रही है. जिससे ना सिर्फ मिट्टी में नई जान आ रही है बल्कि किसानों की कमाई भी बढ़ रही है और उनका जीवन बेहतर हो रहा है.
देबरा गांव के किसान पहले पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन अब वे जैविक खेती की ओर मुड़ रहे हैं. जैविक खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं होता. इसके बजाय प्राकृतिक तरीकों से खेती की जाती है, जैसे गोबर की खाद, नीम का इस्तेमाल और कंपोस्ट. इससे मिट्टी स्वस्थ रहती है, फसलें पौष्टिक होती हैं. बाजार में इनकी कीमत भी अच्छी मिलती है.
इस बार जैविक फूलगोभी की फसल इतनी जबरदस्त आई है कि किसान खुश हैं. फूलगोभी बड़ी-बड़ी, साफ-सुथरी और स्वाद में भी बेहतरीन है. गांव के किसान के मुताबिक, इस बदलाव में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना का बहुत बड़ा हाथ है. इस योजना के तहत किसानों को हर साल 6000 रुपये की सीधी मदद मिलती है, जो तीन किश्तों में उनके बैंक खाते में आती है. यह पैसा किसानों को बीज, खाद और अन्य जरूरी चीजें खरीदने में मदद करता है.
देबरा गांव के किसान बताते हैं कि पीएम-किसान की मदद से वे जैविक खेती की ओर आसानी से बढ़ सके हैं. इससे उनकी आय बढ़ी है और वे ज्यादा आत्मविश्वास के साथ नई तकनीक अपना रहे हैं.
वहीं, उधमपुर जिले के मुख्य कृषि अधिकारी हरबंस सिंह ने बताया कि उधमपुर के किसानों में सब्जियों के प्रति बहुत रुचि है. जिले में करीब 3800 हेक्टेयर जमीन पर सब्जी की खेती हो रही है. किसानों को हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एचईडीपी) के तहत हाइब्रिड बीज दिए जा रहे हैं. किसान विदेशी किस्मों की सब्जियों और ऑफ-सीजन सब्जियों में बहुत दिलचस्पी दिखा रहे हैं.