प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के सहयोग से मछली पालन करना अब आसान हो गया है. नई तकनीकों का इस्तेमाल कर किसान अपनी आय में इजाफा कर रहे हैं. देवरिया की महिला मत्स्य पालक मनोरमा सिंह बायोफ्लॉक तकनीक के माध्यम सालाना 7 से 8 लाख का मुनाफा कमा रही हैं.
3 साल पहले मछली पालन की शुरुआत की
जनपद के भाटपार रानी तहसील की पिपरापट्टी ग्राम निवासी महिला मत्स्य पालक मनोरमा सिंह कुछ साल पहले तक अपनी 5 एकड़ भूमि पर खेती करके डेढ़ से दो लाख रुपये ही हासिल कर पाती थीं. तकरीबन 3 साल पहले उन्हें बायोफ्लॉक मछली पालन की जानकारी हुई तो उन्होंने विकास भवन स्थित मत्स्य पालन विभाग से सम्पर्क किया यहां उन्हें इस बारे में पूरी जानकारी मिली और उन्हें इसकी ट्रेनिंग भी दिलाई गई.
25 डिस्मिल पर मछली पालन
मनोरमा सिंह ने 25 डिस्मिल पर मछली पालन और शेष जमीन पर चारे की बुवाई की है. कृत्रिम टैंक से निकलने वाले पानी का उपयोग खेती में कर रही है. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है. वह फ़ंगेसियस और तिलपिया प्रजाति की मछली का पालन कर रही हैं जो फ़ास्ट ग्रोइंग फ़िश है.
सरकार दे रही अनुदान
बायोफ्लॉक विधि से मछली पालन करना इसके तहत 0.1 एयर जमीन पर एक मीटर गड्ढा खोदकर (35 मीटर लंबा ×35 मीटर चौड़ा )कृत्रिम तालाब का निर्माण कराया जाता है. इसमें तारपोलिन बिछाकर उसमें पानी भरकर ग्रोइंग फ़िश डाला जाता है. सरकार इसके लिए 8 लाख 40 हज़ार रुपये का अनुदान दे रही है. इससे एक साल में 16 टन मछली का उत्पादन होगा.
किसानों का बढ़ेगा मुनाफा
जिलाधिकारी अखण्ड प्रताप सिंह ने इसके लिए विशेष पहल की है उनका कहना है कि योजना का मुख्य उद्देश्य तटीय शहरों,एवं नदियों के किनारे बसे कस्बों, गांवो तक इस योजना का लाभ पहुंचाना है. DM ने बताया कि जनपद में अभी भी मछली का बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है. अगर बायोफ्लॉक विधि से मछली पालन भी होगा और यहां के किसानों को मुनाफा होगा.