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हिमाचल: पशुपालक ने मिल्क प्लांट के बाहर बहाया 1200 लीटर दूध, जानिए वजह

Milk dumped outside the milk plant: मंडी में मिल्कफेड प्लांट ने क्षमता का हवाला देकर दूध लेने से इनकार किया तो गुस्साए पशुपालक ने 1200 लीटर दूध सड़क पर बहा दिया. पशुपालक सरकार की नीतियों और दूध खरीद व्यवस्था से नाराज हैं.

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मिल्क प्लांट के स्टाफ ने पशुपालकों का दूध लेने से किया इनकार (Photo-ITG)
मिल्क प्लांट के स्टाफ ने पशुपालकों का दूध लेने से किया इनकार (Photo-ITG)

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में पशुपालकों की नाराजगी एक बार फिर सड़क पर उतर आई है. लगातार दूसरे दिन मिल्क प्लांट ने दूध लेने से मना कर दिया तो गुस्साए पशुपालकों ने 1200 लीटर दूध मिल्कफेड के गेट के बाहर ही उड़ेल दिया. यह घटना चक्कर स्थित मिल्कफेड प्लांट की है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

वीडियो में पशुपालक सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं. वे कह रहे हैं कि सुक्खू सरकार मंचों पर किसानों और पशुपालकों का भला करने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है.

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, शनिवार और रविवार को चक्कर मिल्क प्लांट के स्टाफ ने पशुपालकों का दूध लेने से साफ इनकार कर दिया. बल्ह क्षेत्र के पशुपालक रवि सैनी ने गाड़ी से 1200 लीटर दूध निकालकर प्लांट के गेट के बाहर फेंक दिया. रवि सैनी ने बताया कि इस मनमानी के चलते उनका 50 हजार रुपये का नुकसान हुआ है.

रवि सैनी 4 साल से डेयरी फार्मिंग कर रहे हैं. उनके पास 30 गायें हैं. उन्होंने एक करोड़ रुपये का कर्ज लेकर डेयरी व्यवसाय शुरू किया है. हर महीने बैंक में लाखों रुपये की किस्त जमा करनी पड़ती है. वे कहते हैं, “अगर हर महीने ऐसे ही कट लगते रहे तो कर्ज कैसे चुकाऊंगा?” पशुपालकों का आरोप है कि चक्कर मिल्क प्लांट में महीने के चार दिन ऐसे ही आते हैं, जब दूध खरीदने में कट लग जाता है. इससे उनका रोज का नुकसान हो रहा है.

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वहीं, मिल्कफेड प्लांट प्रभारी विश्वकांत शर्मा ने इस घटना पर कहा कि प्लांट की क्षमता सिर्फ 1 लाख लीटर दूध की है. इससे ज्यादा दूध स्टोर नहीं किया जा सकता. इसलिए एरिया के हिसाब से दूध लिया जा रहा है. कुछ दिन पहले पशुपालकों को इस बारे में निर्देश भी दिए गए थे. उन्होंने पशुपालक की इस हरकत की निंदा की और कहा कि इसकी शिकायत पुलिस में की जाएगी.

पहले भी हो चुकी परेशानी
यह पहली बार नहीं है जब पशुपालक सुक्खू सरकार से नाराज हैं. कुछ महीने पहले भी दूध का भुगतान न होने की शिकायतें आई थीं. अब दूध न लेने की समस्या बढ़ गई है. पशुपालक कह रहे हैं कि सरकार की व्यवस्था में बदलाव का नारा तो दिया गया, लेकिन पशुपालकों को राहत नहीं मिल रही. 

पशुपालकों की मांग क्या है?
पशुपालक चाहते हैं कि मिल्क प्लांट अपनी क्षमता बढ़ाए या फिर दूध लेने की व्यवस्था सुधारे, जिससे उनका रोज का दूध बर्बाद न हो. वे कहते हैं कि डेयरी फार्मिंग उनके स्वरोजगार का जरिया है. अगर सरकार मदद नहीं करेगी तो उनका पूरा व्यवसाय बंद हो जाएगा. पशुपालक अब सरकार से तुरंत समाधान की मांग कर रहे हैं.

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