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UP: गन्ना छोड़ किसान को नींबू की खेती से हो रहा चार गुना मुनाफा, बाघ का डर भी हुआ कम

कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव पुरैना ता महाराजपुर के किसान ने बाघ के डर से गन्ने की खेती छोड़ नींबू और हल्दी की खेती करना शुरू कर दिया है. इस खेती से किसान को गन्ने की खेती के मुकाबले चार गुना मुनाफा हो रहा है.

नींबू की खेती से किसान को हो रहा लाखों का मुनाफा नींबू की खेती से किसान को हो रहा लाखों का मुनाफा

कहते हैं, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती... इसी का एक उदाहरण पीलीभीत में देखने को मिला. जिले के कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव पुरैना ता महाराजपुर के किसान हर्षित सरकार ने बाघ व अन्य जंगली जानवरों के खौफ से गन्ने की खेती बंद कर दी थी. कई सीजन खाली बैठने के बाद अब नींबू और हल्दी की खेती शुरू कर दी. जिससे उन्हें चार गुना मुनाफा हो रहा है. वहीं, नींबू की गंध से जंगली जानवर खास तौर पर बाघ का डर खत्म हो गया है. डीएम पुलकित खरे ने भी किसान के इस प्रयास की सराहना की है.           

दरअसल, डीएम पुलकित खरे इन दिनों वन विभाग के एक जागरुकता कार्यक्रम में जंगल से सटे गांव पुरैना ता महाराजपुर पहुंचे थे. उन्होंने लोगों से बाघ के आतंक को लेकर चर्चा की. तभी वहां मौजूद किसान हर्षित सरकार ने बताया कि उसने बाघ व अन्य जंगली जानवरों के डर से गन्ने के खेत में जाना बंद कर दिया था. जिससे उसे काफी नुकसान हुआ, बाद में उसने गन्ने की खेती बंद कर नींबू और हल्दी की फसल करना शुरू कर दिया. उसने बताया कि प्रति एकड़ खेती से लगभग 01 लाख 80 हजार तक की कमाई हो रही है और बाघ का डर भी खत्म हो गया.

ये सुनकर और जानकारी जुटाकर जिला अधिकारी किसान से खुश हो गए. हौसला अफजाई के लिए डीएम ने किसान को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया, डीएम ने कहा कि किसान वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई फसलों को जंगल के पास के खेतों में लगाए. जिससे घास खाने वाले जानवर बाहर ना आएं और उनके पीछे बाघ भी खेत तक ना पहुंच पाएं. गन्ने की खेती से बाघ, तेंदुआ, भालू जैसे जानवरों के हमले का डर बना रहता है. छोटी फसलें होने पर यह जानवर नहीं आएंगे, जिससे खुद की भी सुरक्षा हो सकेगी और विभिन्न प्रकार की फसलों को उगाने से आय में वृद्धि होगी. डीएम ने किसान हर्षित द्वारा की जा रही नींबू व हल्दी की खेती का खेत में जाकर जायजा लिया. किसान हर्षित ने डीएम को बताया कि गन्ने की खेती के मुकाबले उनको अब चार गुना से अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है. 

जिले में कुछ जगह जंगल के किनारे किसानों ने लेमन ग्रास की भी खेती भी की हुई है. फिलहाल आंकड़े बताते हैं कि जंगल के किनारे जहां नींबू या लेमन ग्रास की खेती की गई है वहां, मानव व पालतू जानवरों की तरफ से हानि न के बराबर हुई है. धीरे धीरे इस तरह की खेती का चलन बढ़ रहा है.

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