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ये 3 रोग कर सकते हैं बैंगन के पौधे को बर्बाद! टिप्स अपनाकर करें सही देखभाल

बैंगन की शानदार ग्रोथ के लिए सिर्फ अच्छी किस्म का चयन ही नहीं, बल्कि पौधों की सही देखभाल भी बेहद ज़रूरी है. रोगों और कीटों से बचाव करना बैंगन की ग्रोथ में अहम भूमिका निभा सकता है. कुछ आसान टिप्स और सावधानियां अपनाकर आप बैंगन को नुकसान से बचा सकते हैं और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं.

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उचित देखभाल से बैंगन के पौधे को अच्छी ग्रोथ मिल सकती है. (Photo: Pixabay)
उचित देखभाल से बैंगन के पौधे को अच्छी ग्रोथ मिल सकती है. (Photo: Pixabay)

बैंगन भारत की सबसे आम और पसंद की जाने वाली सब्जियों में से एक है. आप घर पर बैंगन उगा सकते हैं. यह सेहत और स्वाद दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है. बैंगन के पौधे की सही देखभाल करने पर इसकी ग्रोथ अच्छी होती है,  ध्यान रहे कि बैंगन का पौधा रोगों और कीटों के प्रति काफी संवेदनशील माना जाता है.

बैंगन के पौधों में गलन रोग गंभीर समस्या बन सकता है. इस रोग में तने के पास से भूरा-काला पड़कर गल सकता है. यह रोग मुख्य रुप से फफूंद जैसे पाइथियम, राइजोक्टोनिया और फ्यूजेरियम की वजह से फैल सकता है. प्रभावित पौधों की जड़ें भूरी और चिपचिपी दिखाई देती हैं, जिससे उनकी वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ने लगता है.

बैंगन को गलन रोग से बचाने के लिए आपको बेस्ट किस्म के बीजों का चयन करना चाहिए. आप बैंगन की पूसा पर्पल, क्लस्टर जैसी वैरायटी का चयन कर सकते हैं. आप अच्छी क्वालिटी के बीज ऑनलाइन एनएससी स्टोर से भी मंगा सकते हैं. बैंगन की अच्छी ग्रोथ के लिए जलभराव जैसी समस्या से बचाना चाहिए. 

छोटी पत्ती रोग

छोटी पत्ती रोग बैंगन की पत्तियों पर असर डालता है. इस रोग में पत्तियां असामान्य रूप से छोटी हो जाती हैं और पौधे की शाखाओं का विकास रुक जाता है. धीरे-धीरे पौधा कमजोर हो जाता है. इस रोग से बचाव के लिए सबसे पहले संक्रमित पौधों को तुरंत हटा देना चाहिए.

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इसके अलावा नीम के तेल का छिड़काव इसमें प्रभावी माना जाता है. जरूरत पड़ने पर आप उपयुक्त कीटनाशक का प्रयोग भी कर सकते हैं, ताकि रोग का फैलाव रोका जा सके और स्वस्थ पौधों की वृद्धि बनी रहे.

फल और तना छेदक कीट
फल और तना छेदक कीट बैंगन की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक माना जाता है. यह कीट पौधे को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. जिससे तना मुरझाकर लटक जाता है और पौधा कमजोर हो जाता है.

इस कीट से बचाव के लिए सबसे पहले रोगग्रस्त फलों को तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि संक्रमण आगे न फैले. अगर प्रकोप अधिक हो जाए तो ट्राइजोफॉस 40 ईसी या क्वीनालफास 25 ईसी का उचित मात्रा में पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है. इससे कीटों पर प्रभावी नियंत्रण होता है और स्वस्थ पौधों की सुरक्षा बनी रह सकती है.

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