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कम MSP, लंबी लाइनें.. सरकार को धान की फसल बेचने से क्यों बच रहे यूपी के किसान?

सरकार का दावा है कि वह 2 महीने में धान बेचने की प्रक्रिया को पूरा कर लेगी लेकिन जमीन पर किसान फिलहाल क्रय केंद्रों से ज्यादा खुले में व्यापारियों और प्राइवेट तौर पर अपना धान बेचने को इच्छुक नजर आ रहे हैं, जिसके चलते धान की खरीद की रफ्तार भी अब धीमी नजर आ रही है.

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Farmers selling paddy to government (Photo-Ashish Mishra)
Farmers selling paddy to government (Photo-Ashish Mishra)

देश में धान के दूसरे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में धान की खरीद को शुरू हुए लगभग 3 महीने पूरे हो चुके हैं. सरकार ने इस बार धान की खरीद के लिए 70 लाख मैट्रिक टन का लक्ष्य रखा है, जिसके मुकाबले सरकार अभी तक केवल 29 लाख मैट्रिक टन ही धान खरीद पाई है. हालांकि सरकार का दावा है कि वह 2 महीने में इस प्रक्रिया को पूरा कर लेगी लेकिन जमीन पर किसान फिलहाल क्रय केंद्रों से ज्यादा खुले में व्यापारियों और प्राइवेट तौर पर अपना धान बेचने को इच्छुक नजर आ रहे हैं, जिसके चलते धान की खरीद की रफ्तार भी अब धीमी नजर आ रही है.

बाराबंकी के किसानों को घर की चौखट पर मिल रहा केंद्र जितना मूल्य

आजतक की टीम कई जिलों में पहुंची, जिसमें सबसे पहले बात बाराबंकी की करते हैं. यहां सरकार ने एक लाख 85 हजार मैट्रिक टन का लक्ष्य रखा है. जिसके मुकाबले अभी तक 51 हजार मैट्रिक टन धान ही क्रय केंद्र खरीद पाए हैं. जिले के विपणन अधिकारी भी मानते हैं कि कई किसान अपने धान को बाहर खुले या मंडी में बेच रहे हैं और अभी तक धान की खरीद चल रही है जो आने वाले 2 महीने में पूरी हो जाएगी.

वहीं, जिले के किसान सरकार की बजाय अपनी धान की फसल को निजी व्यापारियों को बेचना पसंद कर रहे हैं. बाराबंकी के मसौली के एक किसान प्रमोद कुमार वर्मा ने कहा कि पिछले साल एमएसपी और बाजार मूल्य के बीच का अंतर लगभग दोगुना था. समर्थन मूल्य 1,940 रुपये था और बाजार भाव 900 रुपये से 1,100 रुपये के आसपास चल रहा था. नतीजतन, लगभग हर किसान खरीद केंद्रों पर कतार लगाए खड़ा था लेकिन इस साल स्थिति इसके ठीक उलट है. किसानों को उनकी उपज का तकरीबन उतना ही मूल्य उनके घर की चौखट पर मिल रहा है, तो वह सरकारी केंद्र में क्यों जाएगा.

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ऐसा ही कारण जिले के बंकी के विश्वपाल सिंह किसान ने बताया कि किसान को यहां क्वालिटी में रिजेक्ट होने के बाद अपना धान लेकर वापस जाना पड़ता है. ऐसे में धान का ठीक दाम उसे खेत पर ही व्यापारी और प्राइवेट में मिल जा रहा है. इस बार धान की पैदावार भी ज्यादा नहीं हुई और पानी की कमी के चलते धान की क्वालिटी भी हल्की हुई है. जिसके चलते किसानों का ज्यादातर धान केंद्रों के बजाय खुले में बिक रहा है.

किसानों की खरीद पर ट्रेडर सुमेर सिंह कहते हैं कि किसान को बाहर अपने धान की कीमत 1600 से लेकर 1950 रुपए तक मिल रही है, जिसमें उसका महीन और लो क्वालिटी का धान भी बिक जाता है. जिसके चलते अपनी लागत वसूलने के लिए किसान सेंटर के बजाय बाहर खुले में भी अपना धान बड़ी तादाद में बेच रहे हैं. हालांकि अच्छी किस्म का धान सेंटर में ही जाता है लेकिन उसकी उपज कम है और ज्यादातर किसान अपना धान बाहर बेचना पसंद करते हैं.

लखीमपुर खीरी में केंद्रों पर सन्नाटा

अब बात लखीमपुर खीरी जिले की, जिसमें अच्छी खासी धान की खेती होती है. 2022-23 में लखीमपुर खीरी जिले में धान खरीद एजेंसियों को 2 लाख 50 हजार मैट्रिक टन धान खरीदने का टारगेट मिला था, जिसके सापेक्ष अब तक 21513 किसानों से 1 लाख 64 हजार 60 मैट्रिक टन धान की खरीद से की जा चुकी है. अधिकारियों के इस दावे की पड़ताल करने जब आजतक की टीम धान खरीद केंद्र पर पहुंची तो वहां पर सन्नाटा पसर मिला और वहां मौजूद अधिकारी कैमरे के सामने पहले तो कुछ बोलने से हिचकिचा रहे थे लेकिन आखिरकार उन्होंने धान खरीद सेंटर पर हो रही धान खरीद की हकीकत बताई.

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धान खरीद में लगे विपणन विभाग के अधिकारी ने आज तक के कैमरे पर बोलते हुए कहा कि यहां पर किसान कम आ रहा है और धान की कम खरीद हो रही है. जिले के डीएम महेंद्र बहादुर सिंह बोले कि अब तक हम धान खरीद के लक्ष्य को पहुंचते हुए 65 परसेंट धान की खरीद कर चुके हैं, तो वहीं जिले के डिप्टी आरएमओ संतोष पटेल बोले कि हमने अब तक 164060 मेट्रिक टन धान खरीद लिया है.

धान खरीद केंद्र पर एक भी किसान ना मिलने पर जब आजतक की टीम आगे पहुंची तो वहां व्यापारियों को ओने पौने दाम में अपना धान बेचने आए किसान बोले कि सेंटर पर हम लोगों का धान नहीं खरीदा जाता है. वहां पर इसमें कमी निकाल दी जाती है, इसलिए हम लोग मजबूर हैं और वहां पेमेंट भी नहीं होता और यहां नगद पेमेंट हो जाता है. जबकि मंडी में ही अपना धान बेचने आए बेझम के ओमप्रकाश ने कहा कि हम अपना धान मंडी में बेच रहे हैं. सेंटर पर वह कहते हैं कि धान मानक के हिसाब से नहीं बैठता है. वहां पर नकद भुगतान नहीं है. हमको नकद भुगतान के लिए यहां बेचना पड़ता है.

देवरिया में ऑनलाइन के झमेले से परेशान किसान

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अब बात कृषि मंत्री के इलाके देवरिया जिले की. जहां धान क्रय केंद्र प्रभारियों की लापरवाही के चलते किसानों को औने-पौने दाम पर अपने नजदीकी बनिया/व्यापारी को धान बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है. किसानों ने अलग-अलग समस्याएं गिनाते हुए कहा कि सबसे पहले तो किसान को ऑनलाइन कराने का झमेला, उसके बाद विभाग से सत्यापन कराने की झिकझिक और यह सब जैसे-तैसे हो भी जाये तो क्रय केंद्र पर या तो बोरा नहीं है या तो लाइन लगी है, यह कहकर लौटा दिया जाता है. यह भी कह दिया जाता है कि आपके धान में काफी नमी है या तो क्रय केंद्र पर डस्टर मशीन लगाई गई है, जहां पर धान ले जाने के बाद उस मशीन से उसकी सफाई कराई जाती है तब जाकर फ्रेश धान का वजन कर तौल किया जाता है.

वहीं, किसानों को धान मोईस्चर के नाम पर काफी शोषण किया जा रहा है. इन्ही सब दिक्कतों की वजह से किसान क्रय केंद्र से मोह त्याग कर कम दाम पर व्यापारी को अपना धान बेच रहा है. जिला विपणन अधिकारी बी सी गौतम ने बताया कि इस वर्ष धान खरीद का लक्ष्य एक लाख अस्सी हजार मीट्रिक टन है जबकि अभी तक मात्र 35 हज़ार 5 सौ मीट्रिक टन ही धान की खरीद की जा सकी है.

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सहारनपुर के किसान को बाहर मिल रही बेहतर कीमत

अब बात पश्चिमी यूपी के सहारनपुर की, जहां किसानों ने धान को सरकारी क्रय केंद्रों में बेचने से परहेज़ किया है. सहारनपुर के यह सरकारी धान क्रय केंद्र आज किसान के आने का इंतज़ार कर रहे हैं और सूने पड़े हैं. दरअसल सरकार द्वारा खोले गए धान क्रय केंद्र पर ज़्यादातर किसान आने से परहेज़ करते हैं क्योंकि उन्हें सरकारी धान क्रय केंद्रों से ज्यादा पैसा घर बैठे मिल जाता है. किसानों का कहना है कि उन्होंने तो अपना धान प्राइवेट में ही बेचा है क्योंकि प्राइवेट कंपनी उनके खेत से आकर धान ले जाता है और पैसे भी हाथों हाथ वहीं दे जाता है.

जबकि सरकारी धान क्रय केंद्र उनके गाँव से काफ़ी दूर पड़ते हैं और वहाँ पर बहुत सारी प्रक्रियाओं के साथ-साथ धान की क़ीमत भी काफ़ी कम मिलती है इसलिए वह अपने खेत में ही बाहर के व्यापारियों को अच्छी क़ीमतों में कैश पेमेंट पर धान बेच देते हैं. वहीं सरकारी अधिकारियों का भी कहना है कि क्रय केंद्रों पर फ़िलहाल इक्का-दुक्का किसान ही आ रहे हैं. अधिकारी का भी मानना है कि जब किसान को बाहर ज्यादा क़ीमत मिलती है तो वह बाहर धान बेचता है लेकिन उनके अनुसार फ़िलहाल बाहर धान की कीमत ज्यादा नहीं है.

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औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर महराजगंज के किसान

वहीं यूपी के महराजगंज जिले में कड़ी मेहनत से फसल उगाने के बाद अब धान बिक्री करने में किसानों के पसीने छूट रहे हैं. विभागीय पचड़े से बचने के लिए किसान अपनी फसलों को औने पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं. जिले में 28 लाख 50 हजार कुंतल धान खरीद का लक्ष्य है, किसानों की सहूलियत के लिए 174 केंद्र बनाया गया है, लक्ष्य के सापेक्ष अबतक सिर्फ 31 प्रतिशत ही खरीद हो सकी है, इन सबके बावजूद किसानों को क्रय केंद्रों के धक्के खाने पड़ रहे हैं. विभागीय प्रक्रिया से बचने के लिए किसान अपनी फसलों को कम भाव पर जल्द बेचने को मजबूर हैं.

आजतक से बात करते हुए प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि धान की खरीद लगातार चल रही है और अब तक 29 लाख मैट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है, मंत्री कहते हैं कि सरकारी रेट बढ़ने से किसान को इसका लाभ मंडी और प्राइवेट में भी मिल रहा है. इसीलिए वह बाहर भी बेच रहा है लेकिन सरकार अपना लक्ष्य 2 महीने तक पूरा कर लेगी और इसको लेकर प्रक्रिया तेज है. हालांकि मंत्री जी ने कई केंद्रों पर अधिकारियों की सुस्ती और किसानों की शिकायतों को नकारते हुए कहा कि खरीद चल रही है और अपने दावे से वह आश्वस्त नजर आए.

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