इस तकनीक से खेती करने के लिए पौधों के विकास के लिए जलवायु का कोई खास रोल नहीं होता है. इसमें आप गोभी, पालक, स्ट्राबेरी, शिमला मिर्च, चेरी टमाटर, तुलसी, लेट्यूस सहित कई विदेशी सब्जियों और फलों का भी उत्पादन कर सकते हैं.