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Green Chilli Cultivation: मिर्च की खेती ने बदली इस गांव के लोगों की किस्मत, किसान कमा रहे हैं भारी मुनाफा

Green Chilli Cultivation: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले का धनौरी गांव हरी मिर्च की खेती के लिए काफी प्रसिद्ध है. यहां पर बड़े पैमाने पर किसान हरी मिर्च की खेती करते हैं. एक अरसे से धनौरी गांव में किसानों के लिए मुख्य फसल मिर्च ही है. गांव के ही संतराम राजपूत तकरीबन 30 वर्षों से हरी मिर्च की खेती कर रहे हैं. वे एक बीघे में तकरीबन 50 से 55 हजार रुपये तक के हरी मिर्च का उत्पादन कर ले जाते हैं.

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Green Chilli Cultivation
Green Chilli Cultivation
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हरी मिर्च की खेती के लिए प्रसिद्ध है धनौरी गांव
  • देसी मिर्च की खेती को प्राथमिकता देते हैं यहां के किसान

Green Chilli Cultivation: उत्तर प्रदेश में गेहूं-धान, गन्ना, मक्का और बाजरे जैसे फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों से यहां के किसान भी परंपरागत किसानी को छोड़ वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग फसलों की खेती कर ठीक-ठाक मुनाफा कमा रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले का धनौरी गांव हरी मिर्च की खेती के लिए बेहद प्रसिद्ध है. यहां पर बड़े पैमाने पर किसान हरी मिर्च की खेती करते हैं. एक अरसे से धनौरी गांव में किसानों के लिए मुख्य फसल मिर्च ही है. गांव के ही संतराम राजपूत तकरीबन 30 वर्षों से मिर्च की खेती कर रहे हैं. वे एक बीघे में तकरीबन 50 से 55 हजार रुपये तक के हरी मिर्च का उत्पादन कर ले जाते हैं.

हरी मिर्च की खेती ने बदली गांव वालों की किस्मत

तीन बीघे में मिर्च की खेती करने वाले अरविंद बताते हैं फसल के रूप में हम लोग देसी मिर्च ही लगाते हैं. इस मिर्च में रोग लगने की संभावना बेहद कम रहती है, साथ ही तीखापन भी अन्य प्रजातियों के मुकाबले बेहतर रहता है. वे आगे बताते हैं कि आज इसी मिर्च की खेती के बदौलत उन्होंने निजी ट्यूबवेल भी लगवा लिया है, सिंचाई की चौकस व्यवस्था है. 

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मिर्च की खेती से धनौरी गांव के अन्य किसानों की भी किस्मत बदली है. यहीं के रहने वाले वृंदावन पाल पिछले कई सालों से मिर्च की खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं.  मिर्च की खेती सहारे उन्होंने ढाई बीघा जमीन खरीद ली है. इसके अलावा नया ट्रैक्टर भी ले लिया है. वहीं गांव के ही बृजेंद्र राजपूत ने इस बार 9 बीघा में मिर्च की पौध तैयार की है. वे बताते हैं कि पिछली बार 4 बीघा में हाइब्रिड बीज का प्रयोग किया था. जिससे तैयार मिर्च में तीखापन नहीं आया. जिस कारण मंडी में अच्छा भाव नहीं मिला और उत्पादन भी देसी मिर्च के मुकाबले आधा रहा. 

सरकार की उदासीनता पर नाराज किसान

हालांकि धनौरी के किसान मिर्च की खेती को लेकर सरकार की तरफ से बरती जा रही उदासीनता को लेकर नाराज हैं. उनका कहना है सरकार की तरफ से मिर्च की खेती को लेकर किसी भी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है. साथ ही तैयार फसल को बेचने के लिए आसपास की मंडियों में दर-दर भटकना पड़ता है. हमें अपने माल को किसी भी मंडी में समर्थन मूल्य के बिना ही सब्जी व्यापारियों को बेचना पड़ता है. किसानों का कहना है कि अगर उन्हें सरकारी सुविधाएं मिलने लगे और उनके द्वारा पैदा की जा रही मिर्च की खरीद की व्यवस्था हो जाए तो उनका मुनाफा दोगुना हो सकता है..

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