गर्मी का मौसम आते ही ज्यादातर लोग अपने पौधों की देखभाल को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं. तेज धूप और बढ़ते तापमान को देखते हुए पानी की मात्रा बढ़ा दी जाती है, क्योंकि आम धारणा यही है कि ज्यादा गर्मी में पौधों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है लेकिन बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि यही आदत कई बार पौधों के लिए नुकसानदेह साबित होती है.
दरअसल, पौधों की जड़ों को सिर्फ पानी ही नहीं बल्कि ऑक्सीजन भी चाहिए होती है. जब हम बार-बार पानी देते हैं और मिट्टी लगातार गीली बनी रहती है, तो जड़ों तक हवा पहुंचना बंद हो जाता है. ऐसी स्थिति में जड़ें धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं और उनमें सड़न शुरू हो सकती है. इसे ही रूट रॉट कहा जाता है, जो पौधों के खराब होने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है.
गर्मी में एक और बड़ी गलतफहमी यह होती है कि अगर पौधा मुरझा रहा है, तो उसे तुरंत पानी की जरूरत है जबकि कई बार मुरझाने की वजह तेज धूप, गर्म हवा या हीट स्ट्रेस होती है. ऐसे में बिना मिट्टी की नमी जांचे पानी डाल देना स्थिति को और खराब कर देता है. इसलिए जरूरी है कि पहले मिट्टी को थोड़ा खोदकर देखा जाए कि अंदर नमी है या नहीं. अगर मिट्टी पहले से नम है, तो पानी देना टालना ही बेहतर होता है.
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पौधों को बार-बार थोड़ा-थोड़ा पानी देने के बजाय कम बार लेकिन गहराई तक पानी देना ज्यादा फायदेमंद होता है. इससे पानी जड़ों तक सही तरीके से पहुंचता है और पौधा मजबूत बनता है। इसके साथ ही पानी देने का समय भी बहुत मायने रखता है. सुबह का समय सबसे बेहतर माना जाता है, क्योंकि उस समय तापमान कम होता है और पानी जल्दी सूखता नहीं है.
इसके अलावा, गमलों और मिट्टी का ड्रेनेज सही होना बेहद जरूरी है. अगर पानी बाहर निकलने का रास्ता नहीं होगा, तो मिट्टी दलदली हो जाएगी और जड़ें सड़ने लगेंगी. ऐसे में चाहे आप कितनी भी देखभाल करें, पौधा स्वस्थ नहीं रह पाएगा. अगर पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगें, मिट्टी लंबे समय तक गीली रहे या पत्ते बिना वजह गिरने लगें, तो यह संकेत हो सकता है कि पौधे को जरूरत से ज्यादा पानी मिल रहा है.
कुल मिलाकर, गर्मी में पौधों को पानी देना जरूरी जरूर है, लेकिन ज्यादा पानी देना समाधान नहीं है. सही मात्रा, सही समय और सही तरीके से पानी देना ही पौधों को स्वस्थ रखने का असली मंत्र है.