आजकल किसान पारंपरिक फसलों के अलावा ऐसी सब्जियों की खेती करना पसंद करते हैं जो कम लागत, कम मेहनत और लंबे समय तक अच्छी कमाई दे सकें. परवल (पॉइंटेड गॉर्ड) इन्हीं में से एक है. यह बारहमासी सब्जी है जो एक बार लगाने के बाद 4-5 साल तक लगातार फसल देती है. बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और अन्य पूर्वी राज्यों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर हो रही है. परवल की खेती से किसान कम निवेश में बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.
परवल की खेती क्यों है फायदेमंद?
परवल की फसल एक बार लगाने के बाद 4-5 साल तक उपज देती है. शुरू के साल में थोड़ी कम पैदावार होती है, लेकिन बाद के सालों में प्रति हेक्टेयर 150-190 क्विंटल तक उपज मिल सकती है. लागत कम (लगभग 25-50 हजार रुपये प्रति एकड़) और मुनाफा 1 लाख रुपये से ज्यादा तक हो सकता है. यह बारहमासी फसल है, यानी एक बार रोपाई कर दी तो साल भर फल मिलते रहते हैं. हालांकि, सर्दियों में फसल थोड़ी कम होती है.
परवल की रोपाई का सही समय क्या है?
परवल को गर्म और नम जलवायु पसंद होती है. परवल की खेती के लिए 25-35 डिग्री सेल्सियस आदर्श तापमान माना जाता है. मैदानी इलाकों में परवल की खेती के लिए जुलाई से अक्टूबर तक सबसे अच्छा समय होता है. इसके अलावा फरवरी-मार्च और जून-जुलाई में भी परवल की रोपाई की जा सकती है.
परवल की रोपाई के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी होनी चाहिए. pH मान 6-7.5 बेहतर होता है. खेत की 3-4 बार अच्छी जुताई करें. सड़ी गोबर खाद 20-25 टन प्रति एकड़ मिलाएं. खेत समतल रखें ताकि पानी न रुके.
बुवाई (रोपाई) का आसान तरीका
परवल बीज से नहीं, बल्कि लताओं की कटिंग (vine cutting) या जड़/कंद से उगाया जाता है. इसके लिए लंबी लताओं को गोल घुमाकर (रिंग बनाकर) गड्ढे में लगा सकते हैं. इसके अलावा सीधी कटिंग को भी मिट्टी में लगा सकते हैं. रानी जड़ों से नए पौधे निकालकर भी परवल की रोपाई की जा सकती है. बेलों को चढ़ाने के लिए लोहे, बांस या तार का मचान बनाएं. इससे रोग कम लगते हैं और फसल को तोड़ना आसान होता है. इसके लिए ड्रिप सिंचाई सबसे अच्छी होती है.
उन्नत किस्में
बता दें कि काशी सुफल, काशी अलंकार, स्वर्ण अलौकिक, राजेंद्र परवल-1, HP-1 परवल की उन्नत किस्में हैं.