मध्य प्रदेश के रीवा में आम की एक खास किस्म 'सुंदरजा' पाई जाती है. इस आम को अपनी खुशबू और गुणों के चलते GI टैग भी मिला हुआ है. शुगर मरीज भी इस आम को खा सकते हैं. फिलहाल, तमाम गुणों के चलते इस आम की विदेशों में भी काफी डिमांड है.
शुगर फ्री है ये आम
सुंदरजा आम कई खूबियों से भरा हुआ है. यह आम शुगर फ्री होने के साथ ही लंबे समय स्टोर करके रखा जा सकता है. इस आम का डाक टिकट भी जारी हो चुका है. रीवा का सुंदरजा आम दिल्ली में आयोजित मेले में पुरस्कृत हो चुका है. रीवा जिले में गोविंदगढ़ और उसके आस-पास प्रमुख रूप से पैदा होने वाली सुंदरजा आम की किस्म को जीआई टैगिंग प्रदान किया गया है. इसके लिए पिछले 2 वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे थे.
किसने लगाया था ये पेड़?
अब सुंदरजा आम विंध्य की पहचान बनकर पूरी दुनिया में जाना जा रहा है. इस आम को रीवा जिले की एक जिला एक उत्पाद योजना में भी शामिल किया गया है, सुंदरजा की विशिष्ट पहचान को जीआई टैग मिलने पर आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है. रीवा रियासत के महाराज रघुराज सिंह ने गोविंदगढ़ में इस आम का बगीचा लगाया था. इस आम में खूबी है कि खाने के बाद भी खुशबू बनी रहती है.
500 ग्राम से अधिक तक वजन
इसका वजन 250 ग्राम से लेकर 500 ग्राम से अधिक का होता है. साथ ही लंबाई 13.5 सेमी चौड़ाई 7.5 होती है. इस आम में गुठली का हिस्सा 12 और छिलके का हिस्सा 14 प्रतिशत होता है. देश के साथ ही सुंदरजा की मांग विदेशों में बहुतायत मात्रा में है. इस आम को जीआई टैग दिलाने के लिए के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा. इस आम का डीएनए फिंगर प्रिंट भी लिए गए है. जीआई टैग मिल जाने से इंटरनेशनल मार्किट में इस आम को आसानी से बेचा जा सकता है.