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बिजनेस, बंदरगाह और बिरयानी... ईरान में ट्रंप ने बढ़ा दी टेंशन, जंग जैसे हालात का असर थाली पर!

ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन और अमेरिकी दखल के कारण भारत के बासमती चावल निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है. ट्रंप टैरिफ के कारण निर्यात में बाधाएं आ रही हैं, जिससे लगभग 1500 करोड़ रुपये की खेप बंदरगाहों पर अटकी हुई है. इंडियन राइस एक्सपोर्टर फेडरेशन ने पेमेंट को लेकर एडवाइजरी जारी की है.

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ईरान में अमेरिका के दखल से भारत के बासमती चावल निर्यात पर असर
ईरान में अमेरिका के दखल से भारत के बासमती चावल निर्यात पर असर

ईरान में करीब दो सप्ताह से चल रहे सरकार विरोधी आंदोलन और अमेर‍िका के दखल ने भारत के चावल बाजार को ह‍िलाकर रख द‍िया है. कुछ साल पहले तक ईरान भारतीय बासमती का सबसे बड़ा खरीदार हुआ करता था, जो अब ग‍िरकर तीसरे नंबर पर आ गया है. व‍िशेषज्ञों का कहना है क‍ि अगर हालात ऐसे ही रहेंगे तो भारत से होने वाला एक्सपोर्ट और घट जाएगा. बहरहाल, ईरान में कई भारतीय चावल एक्सपोर्टरों की पेमेंट फंस गई है, ज‍िससे उनकी नींद उड़ गई है. ज‍िसके बाद इंड‍ियन राइस एक्सपोर्टर फेडरेशन ने ईरान में चावल न‍िर्यात करने वालों के ल‍िए एक एडवाइजरी जारी की है. बताया गया है क‍ि करीब 1500 करोड़ रुपये से अध‍िक की बासमती चावल की खेप बंदरगाहों पर अटकी हुई है.

भारतीय कृष‍ि उत्पादों के ल‍िए ईरान एक बड़ा बाजार रहा है. लेक‍िन, अब वहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के शासन के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण इस बाजार में अलग-अलग कृष‍ि उपजों का कारोबार करने वालों की टेंशन बढ़ गई है. ईरान में मचे कोहराम से खासतौर पर भारत के बासमती चावल न‍िर्यातक परेशान हैं, क्योंक‍ि उन्हें बड़े नुकसान का डर सता रहा है. एक बना बनाया बाजार ब‍िखरते हुए नजर आ रहा है. 

भारत के ल‍िए बड़ा बाजार 
ईरान में राजनीत‍िक हालात नहीं संभले तो भारत से न स‍िर्फ एग्री एक्सपोर्ट बुरी तर‍ह से प्रभाव‍ित होगा बल्क‍ि न‍िर्यातकों का पैसा भी लंबे समय तक फंसा रह सकता है. डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टेटिस्टिक्स (DGCIS) के मुताब‍िक, भारत ने साल 2024-25 के दौरान ईरान को 8,897 करोड़ रुपये के कृष‍ि उत्पादों का एक्सपोर्ट क‍िया, ज‍िसमें से 6,374 करोड़ रुपये तो अकेले बासमती का ह‍िस्सा है. कुल बासमती एक्सपोर्ट में ईरान का ह‍िस्सा इस समय 12.67 फीसदी है, ज‍िसे अगले चार महीने में कम होने का अनुमान है. क्योंक‍ि वहां महंगाई बढ़ गई है. ईरान की करेंसी रियाल की वैल्यू अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी गिर गई है.  

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ट्रंप ने और बढ़ा दी टेंशन 
ईरानी मुद्रा रियाल का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर की गिरावट से वहां के आयतकों को भारतीय निर्यातकों को भुगतान करने में समस्या आ रही है. कुछ माल बंदरगाहों पर रुका हुआ है तो भुगतान मिलने में द‍िक्कत होने की वजह से कुछ सौदे भी रद्द होने का डर है. यही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने के ऐलान ने टेंशन और बढ़ा दी है. ईरान को होने वाली बासमती चावल की आपूर्ति ज्यादा द‍िन रुकी तो हरियाणा और पंजाब के राइस मिलर्स सबसे अधिक प्रभावित होंगे, इसका असर क‍िसानों तक भी आएगा, क्योंक‍ि दाम ग‍िरने की संभावना बढ़ जाएगी.

इस साल क‍ितना हुआ एक्सपोर्ट? 
इंड‍ियन राइस एक्सपोर्टर फेडरेशन के डायरेक्टर जनरल ब‍िनोद कौल के मुताब‍िक, 2025-26 के अप्रैल से नवंबर म‍हीने तक भारत ने ईरान को 5.99 लाख मीट्र‍िक टन बासमती चावल का एक्सपोर्ट क‍िया है, जो प‍िछले साल की इसी अवध‍ि से ज्यादा है. साल 2024-25 के अप्रैल से नवंबर तक मात्र 4.95 लाख मीट्र‍िक टन बासमती चावल का ही एक्सपोर्ट हुआ था. हालांक‍ि, वर्तमान में चल रहे आंदोलन के कारण द‍िसंबर 2025 से मार्च 2026 तक के क्वार्टर में एक्सपोर्ट बुरी तरह से प्रभाव‍ित होने का अनुमान है. क्योंक‍ि इतनी अस्थ‍िरता के दौर में कोई कैसे आयात करेगा और न‍िर्यातक के पेमेंट की क्या गारंटी होगी? अभी भी कई लोगों की पेमेंट फंसी हुई है. इसल‍िए हमने सभी न‍िर्यातकों के ल‍िए एक एडवाइजरी भी जारी की है. ज‍िसमें खासतौर पर पेमेंट को लेकर सावधान रहने की सलाह दी गई है.

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Agri Export to Iran from India

ईरान में बदलते हालात
कोई भी देश प्रीम‍ियम राइस तब ज्यादा मंगाएगा जब उसके लोगों के पास उसे खरीदने की क्षमता हो. ईरान में हालात कैसे बदलते गए हैं उसका अनुमान आप भारत से होने वाले बासमती चावल के न‍िर्यात में लगातार आई ग‍िरावट से लगा सकते हैं. साल 2018-19 में 33.03 और 2019-20 में 28.45 फीसदी ह‍िस्सेदारी के साथ ईरान भारतीय बासमती का सबसे बड़ा आयातक था, जो धीरे-धीरे तीसरे नंबर पर चला गया है. DGCIS के आंकड़ों के मुताब‍िक, साल 2018-19 में ईरान ने भारत से 14,83,697 मीट्र‍िक टन बासमती चावल का आयात क‍िया. लेक‍िन, 2019-20 में यह घटकर 13,19,156 टन, 2022-23 में 9,98,877 और 2024-25 में महज 8,55,133 टन रह गया. 

चाय न‍िर्यातकों की भी बढ़ी टेंशन 
इस समय 20.25 फीसदी ह‍िस्सेदारी के साथ भारतीय बासमती का सबसे बड़ा खरीदार सऊदी अरब है. ईरान स‍िर्फ भारतीय प्रीमियम बासमती का ही नहीं बल्क‍ि चाय का भी बड़ा आयातक है. साल 2024-25 में ईरान ने भारत से लगभग 11 हजार टन चाय का आयात क‍िया. वहां की अस्थ‍िरता से भारतीय चाय न‍िर्यातक भी टेंशन में हैं. भारत से ईरान में कॉफी, ताजे फल, मसाले, डेयरी प्रोडक्ट, दालें और चीनी का भी न‍िर्यात क‍िया जाता है. इन सब से जुड़े लोगों की च‍िंता बढ़ी हुई है और वो ईरान में राजनीत‍िक स्थ‍िरता की दुआ कर रहे हैं. 

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