
गुलाब का फूल यूं तो पूरे साल ही डिमांड में रहता है. अपनों को ख़ुश करने के लिए हर कोई सबसे पहला सहारा गुलाब का ही लेता है और प्यार के इस मौसम में तो गुलाब की अहमियत कई गुना ज़्यादा बढ़ जाती है. इस वैलेंटाइन वीक में हमने गुलाब और उससे जुड़े बाज़ार की इकॉनामी जानने की कोशिश की. इसके लिए हम सीधा दिल्ली की गाज़ीपुर फूल मंडी पहुंचे, जो इंडिया की सबसे बड़ी फूल मंडी है.
‘25 से ज़्यादा रंग का गुलाब, 10 पर्सेंट दुकानदार सिर्फ़ गुलाब के’
ग़ाज़ीपुर फूल मंडी में लगभग 25 से ज़्यादा रंग के गुलाब पहुंचते हैं. यहां गुलाब की अलग-अलग क्वालिटी भी हैं. गुलाब की पंखुड़ी से लेकर गुलाब के गुलदस्ते तक का यहां बड़ा बाज़ार है. ग़ाज़ीपुर फूल मंडी में 400 से ज़्यादा छोटे और बड़े दुकानदार मौजूद हैं, जिनमें से 40 से ज़्यादा दुकानदार सिर्फ़ गुलाब का काम करते हैं. इन सभी का कहना है कि गुलाब तो पूरे साल डिमांड में रहता है लेकिन वैलेंटाइन वीक में इसकी डिमांड और रेट बहुत ऊपर चले जाते हैं.
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‘वैलेंटाइन वीक में 4 गुना तक बढ़ गए दाम’
गुलाब का काम करने वाले पंकज राजपूत बताते हैं कि उनके पास 25 रंग के गुलाब मिलते हैं. सभी की क़ीमत अलग-अलग है लेकिन सबसे ज़्यादा डिमांड रेड रोज़ की होती है. वो बताते हैं कि उनके पास बेंगलुरु, पुणे, नासिक, सोनीपत जैसे इलाकों से टॉप क्वालिटी के गुलाब आते हैं. वो कहते हैं-अमूमन बीस गुलाब का एक गुच्छा 120-150 रुपये के बीच बिकता है लेकिन इस वक़्त यानी वैलेंटाइन वीक में वही गुच्छा 280-300 रुपये के बीच बिक रहा है. जैसे जैसे वैलेंटाइन डे पास आता जाएगा. इसकी क़ीमत 400-500 तक भी पहुंच सकती है.

‘गुलाब से जुड़ी हर चीज़ महंगी’
ऐसा नहीं है कि वैलेंटाइन वीक में सिर्फ़ गुलाब की ही क़ीमत दो तीन गुना ज़्यादा हो गई है बल्कि गुलाब के साथ जिन चीज़ों का इस्तेमाल एक गुलदस्ता तैयार करने में किया जाता है उनके दामों में भी इज़ाफ़ा हो गया है. फूल व्यापारी हरीश बताते हैं कि छोटा या बड़ा गुलदस्ता बनाने में गुलाब के साथ जिप्सो या गोल्डन (पत्तियां) का इस्तेमाल किया जाता है. आमतौर पर इनकी क़ीमत 30 रुपये बंडल होती है लेकिन इस वक्त इनके दाम भी लगभग 50 रुपये तक पहुंच चुके हैं.
बाज़ार में गुलाब या फूल के गुलदस्ते के लिए लकड़ी का भी इस्तेमाल होता है इनकी क़ीमतों में भी इज़ाफ़ा हुआ है. लकड़ी का काम करने वाले राम बताते हैं कि इस वक्त हार्ट का आकार सबसे ज़्यादा बिकता है. इसकी क़ीमत वैसे तो 30-40 रुपये होती है लेकिन आजकल ये 50 रुपये से भी ऊपर बिक रहा है.

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‘वैलेंटाइन वीक में किसानों के नुक़सान की भी हो जाती है भरपाई’
ग़ाज़ीपुर फ्लावर ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर तेग सिंह चौधरी बताते हैं कि वैलेंटाइन वीक में किसानों को अच्छा मुनाफ़ा होता है. यहां तक कि जिन किसानों को पहले कभी नुक़सान हुआ हो, वो भी इस वैलेंटाइन वीक में अपने नुक़सान की भरपाई कर लेते हैं.
‘गुलाब से गुलशन रोज़गार’
मंडी से गुलाब ख़रीदकर छोटे दुकानदार अपने इलाक़े में बेचते हैं वैलेंटाइन वीक में इनके चेहरे भी गुलाब जैसे खिले-खिले दिखाई पड़ते हैं. वह बताते हैं कि वैसे तो गुलाब 15-बीस रुपये में बिकता है लेकिन वैलेंटाइन वीक में गुलाब 50 रुपये तक आराम से बिक जाता है और ज़्यादा क्वांटिटी में बिकता है. फूल मंडी में फूल और गुलाब से कई लोगों को इनडायरेक्टली भी रोज़गार मिलता है. ये लोग न तो फूलों के किसान है और न दुकानदार हैं.
मंडी में कुछ महिलाएं भी मिलीं, जो रोज़ सुबह मंडी पहुंचती हैं और वहां पर गुलाब की पंखुड़ियां तोड़कर अलग करती हैं. इन पंखुड़ियों का इस्तेमाल ज़्यादातर मंदिर और पूजा पाठ में किया जाता है. अमूमन ये टूटी हुई पंखुड़ी 30-40 रुपये किलो मिलती हैं लेकिन राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दिन इनकी क़ीमत 4 सौ रुपये किलो तक पहुंच गई थी.
रितु और कंचन नाम की इन महिलाओं ने बताया कि वो रोज़ सुबह चार पांच बजे आ जाती हैं. दस रुपये प्रति किलो के हिसाब से इनको पैसे मिलते हैं. ये हर रोज़ कुछ ही घंटों में 250-300 रुपये आराम से कमा लेती हैं.हालांकि ये कमाई सीजन पर निर्भर करती है. इनकी कमाई का लेखा जोखा वैलेनटाइन वीक और वेडिंग सीज़न का है.