अप्रैल से जून तक की चिलचिलाती गर्मी किसानों के लिए सिर्फ एक मौसम नहीं, बल्कि खेती की सबसे बड़ी ताकत भी होती है. इस समय किसान अगर खेत की गहरी जुताई कर लें तो फसल की पैदावार में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है. कृषि एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस समय खेत में 9-12 इंच गहरी जुताई कर दी जाए तो मिट्टी खुद ही कीटों, रोगों और खरपतवारों से छुटकारा पा लेती है. जिससे अगली फसल ज्यादा अच्छी होती है.
गहरी जुताई क्या है और क्यों जरूरी है?
गर्मी में 9 से 12 इंच तक मिट्टी पलटने वाली जुताई को गहरी जुताई कहते हैं. इस समय खेत सूखे और गर्म होते हैं, जो जुताई के लिए सबसे अच्छी स्थिति है. जब ट्रैक्टर या हल से मिट्टी को गहराई तक उलटा जाता है, तो नीचे दबी पुरानी जड़ें, कीड़े, लार्वा और रोगाणु ऊपर आ जाते हैं. तेज धूप और गर्म हवा उन्हें जलाकर नष्ट कर देती है. जिससे अगली फसल स्वस्थ और बढ़िया होती है.
गहरी जुताई के 5 बड़े फायदे
मिट्टी में छिपे हानिकारक कीड़े, लार्वा और अंडे धूप में मर जाते हैं. इससे रासायनिक दवाओं की जरूरत भी कम हो जाती है.
गहरी जुताई से खरपतवारों की जड़ें सूख जाती हैं. जिससे अगली फसल में घास-फूस बहुत कम उगते हैं.
पुरानी फसल की जड़ें, डंठल और पत्तियां मिट्टी में मिलकर ह्यूमस (Humus) बनाती हैं. इससे मिट्टी पौष्टिक और उपजाऊ हो जाती है.
गहरी जुताई से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है. बारिश का पानी आसानी से अंदर तक चला जाता है और कम बर्बाद होता है.
नीचे की मिट्टी ऊपर आने से ऑक्सीजन बढ़ता है और पौधों को जरूरी पोषक तत्व एक्टिव हो जाते हैं.
गहरी जुताई कब और कैसे करें?
समय: रबी फसल कटाई के तुरंत बाद अप्रैल-मई में, जब तापमान 35-45 डिग्री सेल्सियस हो तो गहरी जुताई करनी चाहिए.
उपकरण: MB Plough (मोल्ड बोर्ड हल) या डिस्क हैरो का इस्तेमाल करें. ये 9-12 इंच तक मिट्टी अच्छे से पलटते हैं.
दिशा: अगर खेत का ढलान पूर्व-पश्चिम है, तो जुताई उत्तर-दक्षिण दिशा में करें. इससे बारिश का पानी खेत में रुकता है.
ध्यान दें कि हर साल गहरी जुताई न करें लेकिन 3 साल में कम से कम एक बार गहरी जुताई जरूर करें.