अमेरिका-इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद से ही हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और युद्ध के थमने की कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है. इस बीच भू-राजनीतिक एक्सपर्ट फरीद जकारिया ने मौजूदा संघर्ष पर कई अहम जानकारी दी है.
जकारिया ने कहा इन हमलों से ईरान की लीडरशिप क्षमता कमजोर हो रही है. ऐसे हमले ईरानी शासन को और अधिक कठोर और सैन्यवादी रुख अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और तनाव और बढ़ सकता है.
ऐसा लग रहा है कि इजरायल ईरानी सरकार के पूरे लीडरशीप को एक-एक करके निशाना बना रहा है. फरीद जकारिया ने कहा, "ऐसी संभावना है कि पूरा शासन ध्वस्त हो जाए, लेकिन आप जानते हैं कि सेना की संरचना में कई परतें होती हैं. कर्नल वहां जनरल बनने की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं और लेफ्टिनेंट भी कर्नल बनने के इंतजार में हैं."
इसके नतीजों पर विस्तार से बताते हुए, जकारिया ने चेतावनी दी कि यह रणनीति संभावित समाधानों को कठिन बना देती है.
अली लारीजानी के बाद होगी मुश्किल
जकारिया ने बताया कि अली लारीजानी जैसे प्रमुख नेगोशिएटर के चले जाने के बाद, जो पहले कतर और ओमान जैसे खाड़ी देशों के साथ ईरान के मुख्य वार्ताकार थे, अब संवाद के लिए भरोसेमंद व्यक्तियों को ढूंढना मुश्किल हो गया है.
जकारिया ने इजरायल और अमेरिका की रणनीति में सबसे बड़ा अंतर बताते हुए कहा कि जहां इजरायल का ध्यान शासन के प्रमुख व्यक्तियों को हटाने पर केंद्रित है, वहीं अमेरिका मुख्य रूप से सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाता है.
उनके अनुसार, इस तरह अमेरिका बातचीत के लिए एक अवसर बनाए रखता है, जबकि इजरायल की रणनीति का नेतृत्व को कमजोर करने पर ज़्यादा फोकस है.
इज़रायली सचमुच शासन को जड़ से उखाड़ फेंकने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. वहीं अमेरिकी ज्यादातर सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. इसी वजह से यहां एक दिलचस्प अंतर दिखाई देता है. अमेरिकी शायद किसी तरह का बचाव या बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं, जबकि इजरायली इसे अभी बंद कर रहे हैं.
जकारिया ने यह भी बताया कि ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को आगे बढ़ाने वाली मुख्य शक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नहीं, बल्कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हैं.
जकारिया के अनुसार, इजरायल का ध्यान ईरान के नेतृत्व और सत्ता के गहरे ढांचे को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने पर रहा है. जिसमें अयातुल्ला अली खामेनेई और अली लारीजानी जैसे प्रमुख अधिकारी शामिल हैं.
तनाव बढ़ा तो वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ेगा असर
जकारिया ने चेतावनी दी कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो इसके बड़े आर्थिक असर देखने को मिल सकते हैं. अगर ईरान के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा.
अगर तेल सुविधाओं पर हमले शुरू होते हैं, तो तनाव का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा. जकारिया के मुताबिक, ऐसी स्थिति में ब्रेंट क्रूड की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है.
जकारिया ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करता है, तो इससे वैश्विक आपूर्ति घटेगी और इसका सीधा असर दुनिया भर में ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों पर पड़ेगा, क्योंकि ईरान एक बड़ा तेल निर्यातक देश है.
इजरायल की रणनीति फिलहाल सटीक और सीमित है, जकारिया ने बताया कि अगर ऑपरेशन को बढ़ाकर अहम तेल और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया, तो इससे संघर्ष और बढ़ेगा, क्षेत्रीय अस्थिरता गहराएगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा.
जकारिया ने यह भी कहा कि अगर ईरान के तेल ढांचे पर हमले जारी रहते हैं, तो वैश्विक तेल कीमतें कम से कम 3 से 4 महीनों तक ऊंची बनी रह सकती हैं.