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US: तुलसी गबार्ड को नहीं थी वेनेजुएला ऑपरेशन की जानकारी, प्लानिंग से क्यों बाहर रखा गया?

ट्रंप प्रशासन की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड को वेनेजुएला मिशन की योजना से पूरी तरह बाहर रखा गया था.

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वेनेजुएला ऑपरेशन के वक्त छुट्टियां मना रही थीं तुलसी गबार्ड (Photo: AP)
वेनेजुएला ऑपरेशन के वक्त छुट्टियां मना रही थीं तुलसी गबार्ड (Photo: AP)

व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने अमेरिकी खुफिया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड को पिछले साल गर्मियों से ही वेनेजुएला प्लान से बाहर रखा था. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निकोलस मादुरो को पकड़ने के मिशन की जानकारी सीमित रखने के लिए गबार्ड को इससे दूर रखा क्योंकि उनके मुताबिक गबार्ड को यह जानने की जरूरत नहीं थी. जिस वक्त सुरक्षा टीम अंतिम तैयारियों में जुटी थीं, गबार्ड हवाई के समुद्र के किनारे अपनी छुट्टियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रही थीं और उन्हें मिशन के विवरण की जानकारी नहीं थी. 

विदेश मंत्री मार्को रुबियो उन बड़े अधिकारियों में शामिल थे, जो गबार्ड को इन चर्चाओं से दूर रखना चाहते थे. ट्रंप अब अहम खुफिया परामर्श के लिए गबार्ड के बजाय सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ पर अधिक भरोसा कर रहे हैं. 

यह घटनाक्रम गबार्ड के ट्रंप के आंतरिक घेरे में पैठ बनाने के संघर्ष और उनकी बढ़ती अलगाव की स्थिति को दर्शाता है.

पुराने बयानों और विदेश नीति पर मतभेद

तुलसी गबार्ड लंबे वक्त से विदेशी हस्तक्षेपों की आलोचक रही हैं. साल 2019 में उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा था कि अमेरिका को वेनेजुएला से दूर रहना चाहिए और वहां के लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने देना चाहिए. उन्होंने ट्रंप पर नव-रूढ़िवादियों के दबाव में काम करने का आरोप भी लगाया था. 

हालांकि, प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि उनके पुराने विचारों पर ध्यान केंद्रित करना गलत है क्योंकि अन्य अधिकारियों ने भी पूर्व में राष्ट्रपति से असहमति जताई है. मौजूदा वक्त में गबार्ड राष्ट्रपति को नियमित खुफिया ब्रीफिंग देती हैं, लेकिन वेनेजुएला जैसे संवेदनशील सैन्य विकल्प से उन्हें दूर रखा गया.

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ईरान और हिरोशिमा वीडियो से बढ़ी नाराजगी

गबार्ड और ट्रंप के बीच दूरियां जून में तब और बढ़ गईं, जब अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर हमले की योजना बना रहा था. गबार्ड ने कांग्रेस में गवाही दी थी कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा है, जिस पर ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी. इसी बीच गबार्ड ने हिरोशिमा दौरे का एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने राजनीतिक अभिजात्य वर्ग को 'युद्धोन्मादी' (Warmongers) बताते हुए कहा कि वे दुनिया को परमाणु विनाश की कगार पर ले आए हैं. इस वीडियो ने प्रशासन के अधिकारियों को हैरान कर दिया था.

यह भी पढ़ें: वेनेजुएला अब अमेरिका का 'उपनिवेश', ट्रंप के ऐलान ने काट दिए दुनिया से रिश्ते, क्या है अमेरिकी रणनीति?

सीआईए के साथ तनाव...

अगस्त में गबार्ड ने तब सीआईए को नाराज कर दिया, जब उन्होंने एक अंडरकवर सीनियर ऑफिसर का नाम पब्लिक लिस्ट में शामिल कर दिया, जिनकी सुरक्षा मंजूरी (Security Clearance) रद्द की गई थी. इस उथल-पुथल के बीच ट्रंप का भरोसा सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ पर बढ़ता गया. शनिवार को जब फ्लोरिडा में वेनेजुएला ऑपरेशन का ऐलान हुआ, तो रैटक्लिफ राष्ट्रपति के साथ थे, जबकि गबार्ड यूएस के हवाई (Hawaii) में थीं. ऑपरेशन के तीन दिन बाद गबार्ड ने सोशल मीडिया पर 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' की तारीफ की और इसे ट्रंप के वादों की पूर्ति बताया.

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