दक्षिण कोरिया में छात्रों ने सरकार के खिलाफ विरोध का बिगुल बजा दिया है. एक कॉलेज में दाखिले के लिए हो रही परीक्षा को 90 सेकंड जल्दी खत्म कर दिया गया, जिससे छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा. ऐसे में छात्र सरकार के खिलाफ कोर्ट पहुंच गए. दिलचस्प बात ये है कि यह परीक्षा आठ घंटे लंबी थी.
यह मामला राजधानी सियोल के एक एग्जाम सेंटर में हुई. अदालत का रुख कर रहे हरेक छात्र ने सरकार से 12,000 पाउंड हर्जाने की मांग की है. छात्रों ने मंगलवार को कोर्ट में यह मुकदमा दायर किया. इस पर 39 छात्रों के हस्ताक्षर हैं. छात्रों ने इसके लिए सरकार को भी जिम्मेदार ठहराया है. इन छात्रों ने उस एग्जामिनर (परीक्षक) के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया है, जिसने परीक्षा खत्म होने के तय समय से 90 सेकंड पहले घंटी बजा दी थी. छात्रों का कहना है कि कोरियन लैंग्वेज के एग्जाम के दौरान तय समय से 90 सेकंड पहले घंटी बजाई गई थी.
हालांकि, इस मामले में छात्रों ने तुरंत विरोध किया था. लेकिन उसके बाद भी सुपरवाइजर ने छात्रों से पेपर छीन लिए. लेकिन इस बीच शिक्षकों को दूसरे सेशन के एग्जाम से पहले अहसास हुआ और उन्होंने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की. लेकिन तब तक छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा था.
कैसे होता है ये एग्जाम?
यह परीक्षा अपनी समयावधि को लेकर हमेशा चर्चा में रहती है. आठ घंटे की इस परीक्षा में बैक टू बैक कई विषयों के एग्जाम होते हैं. इसे दुनिया की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक माना जाता है. छात्रों के वकील का कहना है कि इस लापरवाही से छात्रों को भारी नुकसान हुआ है क्योंकि इस परीक्षा को सबसे खर्चीली परीक्षा मान जाता है. इसके लिए छात्र पूरे साल कड़ी तैयारी करते हैं.
छात्रों के वकील किम वू सुक का कहना है कि इस मामले में शिक्षा विभाग को अभी माफी मांगनी है. इस परीक्षा को देशभर में छात्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी से यूनिवर्सिटी प्लेसमेंट्स और नौकरियां तय होती हैं.