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हनीमून पर पत्नी की हत्या के मामले में देवानी बरी

दक्षिण अफ्रीका की एक अदालत ने हनीमून के दौरान पत्नी की हत्या की साजिश रचने के आरोपी ब्रिटिश-भारतीय करोड़पति कारोबारी श्रीयेन देवानी के खिलाफ मामले को आज सबूत के अभाव का हवाला देते हुए खारिज कर दिया. इसके साथ ही चार साल से चले आ रहे इस मामले का अंत हो गया.

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श्रीयेन देवानी
श्रीयेन देवानी

दक्षिण अफ्रीका की एक अदालत ने हनीमून के दौरान पत्नी की हत्या की साजिश रचने के आरोपी ब्रिटिश-भारतीय करोड़पति कारोबारी श्रीयेन देवानी के खिलाफ मामले को आज सबूत के अभाव का हवाला देते हुए खारिज कर दिया. इसके साथ ही चार साल से चले आ रहे इस मामले का अंत हो गया.

वेस्टर्न केप हाई कोर्ट की उप न्यायाधीश जेनेट ट्रावर्सो ने 34 साल के देवानी की ओर से अपने बचाव की शुरुआत करने से पहले ही उनके खिलाफ मामले को खारिज कर दिया. जेनेट ने कहा कि देवानी के खिलाफ अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर है और इसको लेकर वह कोई तार्किक संभावना नहीं देखतीं कि देवानी को दोषी ठहराएं. उन्होंने कहा, एक अदालत जिस स्तर के सबूत पर दोषी करार दे सके, अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किया गया सबूत उस स्तर से काफी नीचे का है.

न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह टैक्सी चालक जोला टांगो का सबूत अपवादों से भरा है और इस पर काफी बहस हो सकती है. अभियोजन पक्ष ने छह हफ्ते लंबी चली सुनवाई के दौरान कहा कि देवानी समलैंगिक है और वह शादी से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा था. देवानी ने खुद स्वीकार किया कि उसका दोहरा यौन रुझान है, लेकिन वह अपनी पत्नी से प्यार करता था.

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दक्षिण अफ्रीका में हनीमून के दौरान 13 नवंबर, 2010 को देवानी की 28 वर्षीय पत्नी एनी की हत्या हुई थी. देवानी पर उसकी हत्या के लिए तीन लोगों- टैक्सी चालक जोला टांगो, जिवामडोडा क्वाबे और शोलिले मगेनी को सुपारी देने का आरोप था.

हनीमून के दौरान एनी की हत्या के इस मामले में मगेनी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन जेल में उसकी मौत हो गई. क्वाबे को 25 साल की सजा सुनाई गई. टांगो को इस मामले में सहयोग करने संबंधी समझौते के बाद 18 साल की सजा सुनाई गई. देवानी ने दक्षिण अफ्रीका प्रत्यर्पि‍त किए जाने से बचने के लिए ब्रिटेन में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार इस साल अप्रैल में उसे दक्षिण अफ्रीका सुनवाई के लिए भेज दिया गया. वह अब तत्काल ब्रिटेन लौटने के लिए आजाद है.

उसके वकीलों ने यह दलील देते हुए अपने मुवक्किल को बरी करने के लिए आवेदन दिया था कि उनके खिलाफ सबूत इतना कमजोर है कि उन्हें बरी ही होना चाहिए. जेनेट ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘यह आरोपी इस आरोप में दोषी नहीं पाया गया है.’ फैसला सुनने के बाद देवानी के परिवार के लोगों की आंखों से आंसू छलक आए और उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया, हालांकि देवानी के चेहरे पर कोई विशेष भाव नहीं था. दूसरी तरफ फैसले से निराश एनी के मायके पक्ष का परिवार (हिंडोचा परिवार) तुरंत कोर्ट से बाहर चला गया.

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हिंडोचा परिवार ने कोर्ट के बाहर एक बयान में कहा, ‘हम बहुत दुखी हैं क्योंकि हमने पूरी कहानी नहीं सुनी. श्रीयेन ने दोहरी जिंदगी जी है.’ एनी की बहन एम डेनबोर्ग ने कहा, ‘न्याय व्यवस्था ने हमें नाकाम कर दिया.’ भाई अनीश हिंडोचा ने पिछले हफ्ते ही कहा था कि देवानी को खुद बताना चाहिए कि उस रात क्या हुआ था, जब उनकी बहन की मौत हुई.

- इनपुट भाषा से

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