भारत ने वेनेजुएला में ट्रंप के ऑपरेशन 'Absolute Resolve' के प्रति चिंता जताई है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत वेनेजुएला में हुई हालिया घटनाओं को लेकर चिंतित है. पिछले हफ्ते अमेरिका ने अपने ऑपरेशन के तहत राजधानी काराकास में हवाई हमले किए और तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया. इस मुद्दे पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि सभी पक्षों को बातचीत के जरिए ऐसा समाधान निकालना चाहिए जो वेनेजुएला की जनता के हित में हो.
मंगलवार को लक्जमबर्ग की आधिकारिक यात्रा के दौरान एक प्रोग्राम में जयशंकर ने कहा कि भारत के वेनेजुएला के साथ लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं.
उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि हमने कल (सोमवार) एक बयान जारी किया था और मैं आग्रह करूंगा कि आप उस बयान को देखें. अगर मैं उस बयान का सार बताऊं तो यह है कि हम मौजूदा घटनाओं को लेकर चिंतित हैं. लेकिन हम सभी संबंधित पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे अब बैठकर ऐसी स्थिति पर पहुंचें जो वेनेजुएला की जनता की भलाई और सुरक्षा के हित में हो. अंततः हमारी चिंता यही है.'
जयशंकर ने आगे कहा कि भारत और वेनेजुएला के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं और भारत चाहता है कि घटनाओं का रुख चाहे जो भी हो, वहां की जनता का भला होना चाहिए.
सोमवार को विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम गहरी चिंता का विषय हैं और सरकार स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है.
बयान में कहा गया, 'भारत वेनेजुएला की जनता की भलाई और सुरक्षा के प्रति अपने समर्थन की दोबारा पुष्टि करता है. हम सभी संबंधित पक्षों से बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से मुद्दों के समाधान का आह्वान करते हैं, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित हो सके. काराकास स्थित भारतीय दूतावास वहां रह रहे भारतीयों के संपर्क में है और हरसंभव सहायता करता रहेगा.'
सरकार ने बढ़ते तनाव के बीच एक एडवाइजरी भी जारी की है, जिसमें भारतीय नागरिकों से वेनेजुएला की गैर-जरूरी यात्रा से बचने को कहा गया है. वहीं, वेनेजुएला में रह रहे भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने और अपनी आवाजाही सीमित रखने की सलाह दी गई है.
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, 3 जनवरी की देर रात अमेरिका की डेल्टा फोर्स ने काराकास में हवाई हमले किए और एक सैन्य परिसर में स्थित उनके आवास से निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लिया. दोनों को अमेरिका ले जाया गया, जहां उन पर नशीले पदार्थों की तस्करी और नार्को-टेररिज्म समेत कई आरोप लगाए गए हैं.
सोमवार को न्यूयॉर्क की एक अदालत में 63 साल के मादुरो ने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्हें 'अपहरण' कर अमेरिका लाया गया है.
उन्होंने कहा कि अब भी वो वेनेजुएला के राष्ट्रपति हैं और उन्हें युद्धबंदी बनाया गया. मादुरो ने कहा, 'मैं एक सभ्य व्यक्ति हूं, अपने देश का राष्ट्रपति हूं. मैं निर्दोष हूं और यहां लगाए गए किसी भी आरोप का दोषी नहीं हूं.'
उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस ने भी अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया.
मादुरो पर नार्को-आतंकवाद, कोकीन आयात की साजिश, मशीनगनों और घातक हथियारों के अवैध कब्जे सहित चार आरोप लगाए गए हैं. अमेरिकी अभियोजन पक्ष का दावा है कि मादुरो ने मेक्सिको के सिनालोआ और जेटास कार्टेल, कोलंबिया के एफएआरसी विद्रोहियों और वेनेजुएला के ट्रेन दे अरागुआ गिरोह जैसे संगठनों के साथ मिलकर ड्रग्स की तस्करी में मदद की.
आरोपों में यह भी कहा गया है कि मादुरो के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों से संबंध रहे हैं और उन्होंने कथित तौर पर देश के संसाधनों का इस्तेमाल ड्रग तस्करी के लिए किया.
मादुरो लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और उनका कहना है कि अमेरिका वेनेजुएला में अपनी पसंद की सरकार के जरिए वहां के तेल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है. अमेरिका 2018 के चुनावों में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद से मादुरो को अवैध शासक मानता रहा है.