रूस के उफा में स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में भारतीय छात्रों पर चाकू से हमला करने वाला आरोपी महज 15 साल का बताया जा रहा है. शुरुआती जांच और चश्मदीदों के बयानों से लगता है कि आरोपी नव-नाजी विचारधारा से प्रभावित है और ये हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया है.
रविवार को हमलावर ने स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के विदेशी छात्रों के हॉस्टल (डॉर्मिटरी) को निशाना बनाया. आरोपी ने चाकू से छात्रों पर हमला किया, जिसमें 4 भारतीय छात्र घायल हो गए. जानकारी के मुताबिक, उसने पीड़ितों के खून से दीवार पर स्वास्तिक का निशान भी बनाया.
रूसी सुरक्षा तंत्र से जुड़े बाजा चैनल ने चाकूबाज को लेकर दावा किया, वो बैन हो चुके एनएस/डब्ल्यूपी नव-नाजी संगठन से संबंधित था. हमले के दौरान वो होलोकॉस्ट के बारे में उग्रवादी नारे लगा रहा था. बताया जा रहा है कि हमले के बाद जब पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की, तो उसने पुलिसकर्मियों पर भी हमला कर दिया और खुद को भी गंभीर रूप से घायल कर लिया.
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भारत ने हमले की कड़ी निंदा की
मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने छात्रों पर हुए इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. दूतावास ने इसे एक 'दुखद घटना' करार दिया है. वहीं, भारत ने रूसी अधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. AIMSA ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि रूस में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा का खास ख्याल रखा जाए.
नाजीवाद की विचारधारा क्या है?
बता दें कि नव-नाजी संगठन नाजीवाद की विचारधारा को पुनर्जीवित और बढ़ावा देते हैं, जो नफरत और नस्लवाद पर आधारित एक धुर दक्षिणपंथी राजनीतिक सिद्धांत है. इसका ताल्लुक 20वीं सदी के जर्मनी में एडॉल्फ हिटलर और नाजी पार्टी से है.