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ग्लासगो: क्लाइमेट चेंज से जंग के लिए PM मोदी का पंचामृत फॉर्मूला, दुनिया को दिया 'LIFE' मंत्र

पीएम ने कहा कि दुनिया को एडप्टेशन पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन एडप्टेशन पर ध्यान नहीं दिया गया. जलवायु पर वैश्विक बहस में एडप्टेशन को उतना महत्व नहीं मिला है. ये उन विकासशील देशों के साथ अन्याय है जो जलवायु परिवर्तन से ज्यादा प्रभावित हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
11:39
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' में पीएम मोदी का संबोधन
  • पीएम ने कहा- दुनिया को एडप्टेशन पर ध्यान देना चाहिए

ग्लासगो में आयोजित 'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखा. क्लाइमेट चेंज पर इस वैश्विक मंथन के बीच पीएम ने पंचामृत की सौगात दी. 

पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि आज मैं आपके बीच उस भूमि का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं जिस भूमि ने हजारों वर्षों पहले ये मंत्र दिया था 'संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्'  आज 21वीं सदी में ये मंत्र और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है. 

पीएम ने कहा कि मैं आज आपके सामने एक One-Word Movement का प्रस्ताव रखता हूं. यह One-Word एक शब्द, क्लाइमेट के संदर्भ में, One World- एक विश्व का मूल आधार बन सकता है, अधिष्ठान बन सकता है. ये एक शब्द है- LIFE...एल, आई, एफ, ई, यानि Lifestyle For Environment

क्लाइमेट चेंज पर इस वैश्विक मंथन के बीच मैं भारत की ओर से इस चुनौती से निपटने के लिए पांच अमृत तत्व रखना चाहता हूं, पंचामृत की सौगात देना चाहता हूं. 

पहला- भारत, 2030 तक अपनी Non-Fossil Energy Capacity को 500 गीगावाट तक पहुंचाएगा. 

दूसरा- भारत, 2030 तक अपनी 50 प्रतिशत energy requirements, renewable energy से पूरी करेगा.

तीसरा- भारत अब से लेकर 2030 तक के कुल प्रोजेक्टेड कार्बन एमिशन में एक बिलियन टन की कमी करेगा. 

चौथा- 2030 तक भारत, अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेन्सिटी को 45 प्रतिशत से भी कम करेगा.

पांचवा- वर्ष 2070 तक भारत, नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करेगा. 

ये सच्चाई हम सभी जानते हैं कि क्लाइमेट फाइनेंस को लेकर आज तक किए गए वादे, खोखले ही साबित हुए हैं. जब हम सभी क्लाइमेट एक्शन पर अपनी महत्वकांक्षा बढ़ा रहे हैं, तब क्लाइमेट फाइनेंस पर विश्व की महत्वकांक्षा वही नहीं रह सकते जो पेरिस अग्रीमेंट के समय थे. 

मेरे लिए पेरिस में हुआ आयोजन, एक समिट नहीं, सेंटीमेंट था, एक कमिटमेंट था. भारत वो वादे विश्व से नहीं कर रहा था, बल्कि वो वादे सवा सौ करोड़ भारतवासी अपने आप से कर रहे थे. 

विकासशील देश जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लासगो में आयोजित 'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' (PM Modi in COP26) को संबोधित किया. पीएम मोदी ने कहा कि विकासशील देश जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. किसानों पर इसका सबसे ज्यादा असर हो रहा है. ऐसे में पिछड़े देशों को वैश्वक मदद मिलनी चाहिए. 

पीएम ने कहा कि दुनिया को एडप्टेशन पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन एडप्टेशन पर ध्यान नहीं दिया गया. जलवायु पर वैश्विक बहस में एडप्टेशन को उतना महत्व नहीं मिला है. ये उन विकासशील देशों के साथ अन्याय है जो जलवायु परिवर्तन से ज्यादा प्रभावित हैं.

एडप्टेशन के तरीके चाहे लोकल हों पर पिछड़े देशों को इसके लिए ग्लोबल सहयोग मिलना चाहिए. लोकल एडप्टेशन के लिए ग्लोबल सहयोग के लिए भारत ने कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिस्टेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पहल की शुरूआत की थी. मैं सभी देशों को इस पहल से जुड़ने का अनुरोध करता हूं.

 

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में नल से जल, स्वच्छ भारत मिशन और उज्जवला जैसी परियोजनाओं से हमारे जरूरतमंद नागरिकों को अनुकूलन लाभ तो मिले ही हैं उनके जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है. कई पारंपरिक समुदाय में प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने का ज्ञान है. हमारी अनुकूलन नीतियों में इन्हें उचित महत्व मिलना चाहिए. स्कूल के पाठ्यक्रम में भी इसे जोड़ा जाना चाहिए.

रविवार को पीएम मोदी स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर पहुंचे जहां वह संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं. पीएम मोदी जैसे ही ग्लासगो में उतरे, वहां मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों ने 'मोदी है भारत का गहना' गाना गाकर उनका स्वागत किया. 

ग्लासगो में वैश्विक शिखर सम्मेलन के लिए स्कॉटिश इवेंट कैंपस (SEC) में होने जा रहे जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के रूपरेखा समझौते (UNFCCC) के लिए पक्षकारों के 26वें शिखर सम्मेलन (COP-26) में वैश्विक नेताओं के सम्मेलन (WLS) में मोदी समेत 120 विभिन्न सरकारों के प्रमुख और राष्ट्र प्रमुख शामिल हुए.

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी20 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इटली की राजधानी रोम पहुंचे थे. रविवार को जी20 का समापन हो गया जिसमें 20 सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने वैश्विक स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और जलवायु जैसे मुद्दों पर चर्चा की. 

बोरिस जॉनसन के साथ द्विपक्षीय संवाद

मंगलवार तक की अपनी तीन दिवसीय ब्रिटेन यात्रा के दौरान मोदी COP-26 सम्मेलन को संबोधित करेंगे और सोमवार को दोपहर बाद के एक सत्र में भारत की जलवायु कार्रवाई योजना के बारे में राष्ट्रीय बयान जारी किया जाएगा. उनके बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान संबोधित करेंगे. 

शिखर सम्मेलन से पहले क्या बोले मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन से पहले एक बयान में कहा, ‘नवीकरणीय ऊर्जा, पवन और सौर ऊर्जा की क्षमता के लिहाज से भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है. WLS में मैं जलवायु कार्रवाई और हमारी उपलब्धियों पर भारत के उत्कृष्ट ट्रैक रिकॉर्ड को साझा करुंगा.’ उन्होंने कहा, ‘मैं कार्बन स्पेस के समान वितरण, शमन और अनुकूलन के लिए समर्थन और लचीलापन लाने के उपायों, वित्त जुटाने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और हरित तथा समावेशी विकास के लिए टिकाऊ जीवन शैली के महत्व सहित जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को व्यापक रूप से संबोधित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालूंगा.’

विदेश मंत्रालय ने कहा कि COP-26 सम्मेलन प्रधानमंत्री को साझेदार देशों के नेताओं, नवोन्मेषकों तथा अंतर-सरकारी संगठनों समेत सभी पक्षकारों से मुलाकात का तथा हमारी स्वच्छ वृद्धि को और तेजी से बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने का अवसर भी देगा.

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