प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को स्वीडन का अपना दौरा पूरा करने के बाद नॉर्वे पहुंच चुके हैं. नॉर्वे एक ऐसा देश है, जो दुनिया के प्रमुख तेल और गैस निर्यातकों में से एक माना जाता है. पीएम मोदी की यह यात्रा किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी. प्रधानमंत्री मोदी का इस नॉर्डिक देश का यह पहला दौरा है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे के ओस्लो पहुंच गए हैं. नॉर्वे के पीएम जोनास गहर स्टोर ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली यात्रा है, और 43 वर्षों में भारत की ओर से नॉर्वे की यह पहली प्रधानमंत्री-स्तरीय यात्रा है."
उन्होंने आगे कहा कि नॉर्वे भारत के लिए एक मूल्यवान साझेदार है. आज, पीएम मोदी द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और कल तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे. इस यात्रा से भारत-नॉर्वे साझेदारी में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है."
नॉर्वे में PM मोदी का कार्यक्रम
11:20- ओस्लो के लिए विमान से प्रस्थान
12:55- गार्डरमोएन एयरपोर्ट, ओस्लो, नॉर्वे में आगमन
14:00-14:20- होटल में स्वागत समारोह
15:30-17:00- सरकारी गेस्ट हाउस में नॉर्वे के PM के साथ द्विपक्षीय वार्ता
17:15-18:45- रॉयल पैलेस में शाही परिवार के साथ बैठक
20:00-20:45- ओस्लो सिटी हॉल में नॉर्वे-इंडिया ट्रेड एंड रिसर्च समिट
22:35-00:25 बजे (19 मई)- एकरशस कैसल में नॉर्वे के PM द्वारा आयोजित रात्रिभोज
इससे पहले पीएम मोदी स्वीडन पहुंचे थे. इस विजिट के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया और सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश की.
स्वीडन की अपनी दो-दिवसीय यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने अपने स्वीडिश समकक्ष उल्फ क्रिस्टरसन के साथ बातचीत की, जिसमें व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया.
भारत-स्वीडन संबंधों को नई रफ्तार
नरेंद्र मोदी ने भारत-स्वीडन संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की और द्विपक्षीय संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई, जो इन संबंधों में एक अहम पड़ाव है. सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा कि स्वीडन की उनकी यात्रा के कई अहम नतीजे निकले हैं, जिनसे भारत-स्वीडन संबंधों को नई रफ्तार मिलेगी.
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उन्होंने कहा, "हमारे संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने से लेकर, 'ज्वाइंट इनोवेटिव पार्टनरशिप 2.0' और 'इंडिया-स्वीडन टेक्नोलॉजी एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोरिडोर' की शुरुआत करने तक, और अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने तक, चर्चाएं बेहद सार्थक रहीं."