भारत और चीन संबंधों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने प्रतिक्रिया दी है. पीएम मोदी ने हाल ही में अमेरिकी पत्रिका न्यूजवीक को दिए इंटरव्यू में कहा था कि भारत के लिए चीन के साथ संबंध महत्वपूर्ण हैं. भारत और चीन को जल्द से जल्द सीमा स्थिति को सुलझाने की जरूरत है ताकि हमारे द्विपक्षीय संबंधों के आड़े आ रही अड़चनों को दूर किया जा सके.
ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में कहा कि पीएम मोदी का कहना है कि भारत और चीन के बीच स्थाई और शांतिपूर्ण संबंध सिर्फ दोनों देशों के लिए ही जरूरी नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं. रॉयटर्स ने उनकी इस टिप्पणी को चीन-भारत द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर भारत के नरम रुख के तौर पर पेश किया है.
अखबार लिखता है कि भारत, विशेष रूप से सैन्य और राजनयिक स्तर पर अधिकारी कई बार चीन और भारत संबंधों और सीमा मुद्दों पर टिप्पणियां करते रहे हैं. ये टिप्पणियां कभी नरम होती हैं तो कभी बेहद सख्त. हालांकि, पीएम मोदी का ये बयान, विशेष रूप से इस मामले पर उनका स्पष्ट रुख कभी-कभी ही देखने को मिलता है लेकिन ये समयबद्ध हैं. पिछली बार मोदी ने इस तरह का बयान 2023 में जापान के हिरोशिमा में हुई G-7 समिट के दौरान दिया था. उन्होंने कहा था कि चीन के साथ भारत की सीमा पर शांति दोनों देशों के सामान्य संबंधों के लिए जरूरी है और भारत अपनी संप्रभुता और गरिमा की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इस बार उनका ये बयान अमेरिका के पक्षपाती रुख की वजह से चीन और भारत का सीमा तनाव बढ़ने और भारत के लोकसभा चुनाव से पहले आया है.
संपादकीय में आगे कहा गया कि पीएम मोदी के इंटरव्यू से चीन और भारत के संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं. यह एक तरह से सीमा विवाद को लेकर भारत के रवैये में नरमी का संकेत है कि भारत व्यावहारिक रूप से समस्याओं और द्विपक्षीय संबंधों को सुलझाना चाहता है. संपादकीय में कहा गया कि सीमा विवाद केवल चीन और भारत संबंधों का नहीं है. इसे द्विपक्षीय संबंधों में उचित महत्व दिया जाना चाहिए. दोनों पक्षों ने राजनयिक और सैन्य माध्यमों से इस मुद्दे को सुलझाने में समझदारी दिखाई है. अगर भारत पीएम मोदी के बयान पर अमल करता है और चीन से सहमति जताता है तो दोनों देशों के संबंध सही दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे.
अखबार लिखता है कि यकीनन बेहद प्रभावशाली अमेरिकी पत्रिका न्यूजवीक में मोदी का इंटरव्यू प्रकाशित हुआ है. उनके (मोदी) इस तरह के बयान शायद अमेरिका में कुछ लोगों को रास नहीं आ सकते, जो चीन और भारत के खराब संबंधों के जरिए चीन को कमजोर करने की मंशा रखते हैं.
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
अमेरिकी पत्रिका न्यूजवीक को दिए गए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने चीन के साथ सीमा विवाद पर कहा था कि मेरा मानना है कि हमें अपनी सीमाओं पर लंबे समय से चली आ रही स्थिति को तत्काल सुलझाने जरूरत है ताकि हमारी द्विपक्षीय बातचीत में आड़े आ रही दिक्कतों को दूर किया जा सके. भारत और चीन के बीच स्थिर और शांतिपूर्ण संबंध न केवल हमारे दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है.'
भारत और चीन के बीच सीमा पर 2020 से ही तनाव है. 5 मई 2020 को भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प हो गई थी. इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में भारी गतिरोध की स्थिति रही है.
हालांकि, इस गतिरोध का व्यापार संबंधों पर ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है. गतिरोध को सुलझाने के लिए दोनों पक्ष अब तक कोर कमांडर स्तर की 21 दौर की वार्ता कर चुके हैं.
चीनी सेना के अनुसार, दोनों पक्ष अब तक चार बिंदुओं, गलवान घाटी, पैंगोंग झील, हॉट स्प्रिंग्स और जियानान दबन (गोगरा) से पीछे हटने पर सहमत हुए हैं.
भारत पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए, चीनी सेना) पर देपसांग और डेमचोक इलाकों से सेना हटाने का दबाव बना रहा है. भारत का कहना रहा है कि सीमा पर स्थिति सामान्य नहीं होगी तब तक चीन के साथ उसके संबंधों में सामान्य स्थिति की बहाली नहीं हो सकती.