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ट्रंप शहबाज-मुनीर को देते रहे दोस्ती का 'लॉलीपॉप', उधर अमेरिका को सताते रहे ये 3 डर

ईरान जंग के बीच पाकिस्तान को लेकर अमेरिका की चिंता बढ़ती दिख रही है. एक तरफ ट्रंप पाकिस्तान के नेताओं की तारीफ कर रहे हैं, वहीं खुफिया रिपोर्ट उसे मिसाइल, आतंकवाद और परमाणु हथियारों के चलते बड़ा खतरा बता रही है.

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शहबाज शरीफ, आसिम मुनीर राष्ट्रपति ट्रंप के साथ. (Photo- White House)
शहबाज शरीफ, आसिम मुनीर राष्ट्रपति ट्रंप के साथ. (Photo- White House)

ईरान में जारी जंग के बीच अब पाकिस्तान भी एक बार फिर अमेरिका की रडार पर आ गया है. दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की खुलकर तारीफ करते नजर आते हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान को लेकर गंभीर खतरे की चेतावनी दे रही हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को "ग्रेट लीडर" और "शानदार लोग" बताते रहे हैं. उन्होंने मुनीर को "कठोर और गंभीर फाइटर" और यहां तक कि "21वीं सदी का सबसे बड़ा फाइटर" तक करार दिया. इस दौरान ट्रंप ने मुनीर को अपने साथ डिनर पर भी बुलाया. शहबाज शरीफ को बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में भी शामिल किया.

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हालांकि, इन राजनीतिक बयानों के उलट, अमेरिका की इंटेलिजेंस रिपोर्ट पाकिस्तान को तीन बड़े मोर्चों पर बड़ा खतरा मानती है. मिसाइल प्रोग्राम, आतंकवाद और परमाणु हथियार, लेकिन क्यों? आइए समझते हैं.

1. बैलिस्टिक मिसाइल: बढ़ती मारक क्षमता से चिंता

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान लगातार अपनी बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक को मजबूत कर रहा है. इन मिसाइलों में परमाणु और पारंपरिक हथियार ले जाने की क्षमता है और भविष्य में ये लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हो सकती हैं. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2035 तक दुनिया भर में ऐसे खतरों की संख्या 3000 से बढ़कर 16,000 से ज्यादा हो सकती है. चीन, रूस, उत्तर कोरिया और ईरान के साथ पाकिस्तान भी इस दौड़ में शामिल है.

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अमेरिका को खास चिंता इस बात की है कि अगर यही रफ्तार जारी रही, तो पाकिस्तान भविष्य में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) विकसित कर सकता है, जो सीधे अमेरिका तक पहुंच सकती है. इसी खतरे को देखते हुए अमेरिका ने 2024 के आखिर और 2025 की शुरुआत में पाकिस्तान के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स (NDC) समेत कई संस्थाओं पर प्रतिबंध भी लगाए, ताकि उसके मिसाइल प्रोग्राम की रफ्तार को धीमा किया जा सके.

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2. आतंकवाद: पुराना खतरा अब भी कायम

पाकिस्तान को लेकर अमेरिका की दूसरी बड़ी चिंता आतंकवाद है. मार्च महीने की शुरुआत में कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने हाई अलर्ट जारी किया और लाहौर और कराची से गैर-जरूरी कर्मचारियों को वापस बुला लिया. अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन जैसे TRF, TTP, ISIS-K और अल-कायदा से जुड़े नेटवर्क न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक खतरा बन सकते हैं.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसे संगठन भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ाकर बड़े सैन्य टकराव या यहां तक कि परमाणु युद्ध की स्थिति पैदा कर सकते हैं. अप्रैल 2025 का पहलगाम हमला इसका ताजा उदाहरण बताया गया है. इतिहास भी इस खतरे की पुष्टि करता है. 2006 में कराची में एक आत्मघाती हमले में अमेरिकी राजनयिक की हत्या हुई थी, जबकि 1995 में अमेरिकी कॉन्सुलेट के कर्मचारियों पर हमला किया गया था.

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इन खतरों को देखते हुए अमेरिका लगातार पाकिस्तान पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बना रहा है. FATF निगरानी, प्रतिबंध, संपत्ति फ्रीज और आतंवाद की वजह से "डू नॉट ट्रैवल" जैसी एडवाइजरी इसी रणनीति का हिस्सा रहा है.

3. परमाणु हथियार: सबसे बड़ा सिरदर्द

अमेरिका की एनुअल थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट में पाकिस्तान को अब सीधे तौर पर "टॉप-टियर न्यूक्लियर थ्रेट" की श्रेणी में रखा गया है. पहले अमेरिका की चिंता सिर्फ इस बात तक सीमित थी कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार कहीं आतंकियों के हाथ न लग जाएं. लेकिन अब चिंता का दायरा बढ़ गया है. अब पाकिस्तान की परमाणु क्षमता खुद एक रणनीतिक खतरे के रूप में देखी जा रही है.

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2001 के बाद से अमेरिका लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता रहा है कि पाकिस्तान का परमाणु जखीरा सुरक्षित रहे. इसके लिए उसने कई आपातकालीन सैन्य योजनाएं भी तैयार की हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत-पाकिस्तान संबंध अभी भी बेहद संवेदनशील हैं. किसी भी बड़े आतंकी हमले के बाद हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं और परमाणु टकराव का खतरा बढ़ सकता है.

कुल मिलाकर तस्वीर साफ है कि ट्रंप भले ही पाकिस्तान के नेताओं की तारीफ कर रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. अमेरिका के लिए पाकिस्तान अब भी एक चुनौती बना हुआ है. मिसाइल तकनीक की तेजी से बढ़ती क्षमता, आतंकवाद का लगातार खतरा और परमाणु हथियारों की मौजूदगी - ये तीनों ऐसे फैक्टर हैं, जो पाकिस्तान को अमेरिका की नजर में एक संवेदनशील और संभावित खतरे वाला देश बनाते हैं. यानी कूटनीति में भले ही "लॉलीपॉप" दिया जा रहा हो, लेकिन सुरक्षा के स्तर पर अमेरिका पूरी तरह अलर्ट मोड में है.

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