पाकिस्तान में तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने ईंधन बचाने के लिए कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आज (सोमवार) प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकारी विभागों और शिक्षण संस्थानों के कामकाज में बड़े बदलाव की घोषणा की है. सरकार का मकसद किसी भी तरह से ईंधन की खपत को कम करना है ताकि इस संकट का सामना किया जा सके.
दो हफ्ते तक बंद रहेंगे स्कूल
सरकार के नए फैसले के मुताबिक, इस हफ्ते के खत्म होते ही पाकिस्तान के सभी स्कूल अगले दो हफ्तों के लिए बंद कर दिए जाएंगे. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साफ किया कि तेल बचाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी है. इसके साथ ही, उच्च शिक्षा यानी कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई को तुरंत 'ऑनलाइन' शिफ्ट करने का आदेश दिया गया है, ताकि छात्रों और शिक्षकों को कॉलेज न आना पड़े और ईंधन की बचत हो सके.
हफ्ते में सिर्फ 4 दिन खुलेंगे दफ्तर
सरकारी दफ्तरों को लेकर भी सरकार ने बड़ा बदलाव किया है. अब सरकारी कार्यालय हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही काम करेंगे. हालांकि, इस फैसले से बैंकों को बाहर रखा गया है, यानी बैंक पहले की तरह ही खुलेंगे. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जरूरी सेवाओं को छोड़कर बाकी सरकारी विभागों के 50% कर्मचारी अब घर से ही काम करेंगे.
तेल के बजट में 50% की कटौती
सरकार ने ईंधन बचाने के लिए सरकारी विभागों पर एक और पाबंदी लगा दी है. अगले दो महीनों तक सभी सरकारी विभागों को मिलने वाले तेल के कोटे में 50% की कटौती का सामना करना पड़ेगा. इसका मतलब है कि सरकारी कामकाज में इस्तेमाल होने वाले ईंधन को अब आधा कर दिया गया है. ये सभी उपाय इसलिए किए जा रहे हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी तेल की कीमतों के असर को कम किया जा सके.
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बांग्लादेश में भी मचा हाहाकार, बंद हुए विश्वविद्यालय
तेल और बिजली के इस संकट का असर पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी देखने को मिल रहा है. ईरान में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी के बाद बांग्लादेश ने भी ईंधन और बिजली बचाने के लिए सोमवार को विश्वविद्यालयों को बंद रखने का फैसला किया. ढाका विश्वविद्यालय के गेट बंद कर दिए गए और बसों की आवाजाही रोक दी गई है. दरअसल, कुवैत और इराक द्वारा तेल उत्पादन में कटौती के बाद कीमतों में 25% तक का उछाल आया है, जिसका असर पूरे एशियाई बाजार पर पड़ रहा है.