पाकिस्तान ने अपनी नौसेना में एक बड़ा कदम उठाया है. उसने अपनी पहली हैंगर-क्लास पनडुब्बी को नौसेना में शामिल कर लिया है. ये पनडुब्बी चीन ने बनाई है और इसका उद्घाटन चीन के बंदरगाह शहर सान्या में हुआ.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी खुद इस समारोह में मौजूद थे. पाकिस्तान और चीन के बीच एक समझौते के तहत पाकिस्तान को कुल 8 ऐसी पनडुब्बियां मिलनी हैं. इस खबर का भारत के लिए भी बड़ा मतलब है क्योंकि इस पनडुब्बी का नाम उस पनडुब्बी के नाम पर रखा गया है जिसने 1971 की जंग में भारतीय युद्धपोत को डुबोया था.
उद्घाटन समारोह चीन के सान्या बंदरगाह में हुआ. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी मुख्य अतिथि थे. दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. पाकिस्तान की सेना ने आधिकारिक बयान में कहा कि ये दोनों देशों की गहरी दोस्ती का एक और अध्याय है.
पाकिस्तान के नेताओं ने क्या कहा?
राष्ट्रपति जरदारी ने इसे नौसेना के लिए एक 'ऐतिहासिक पल' बताया. उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि पाकिस्तान अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा करने, अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने और अपनी संप्रभुता यानी अपने देश की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है.
पाकिस्तानी नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ ने कहा कि दुनिया के अहम समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ रहा है जो व्यापार और ऊर्जा की आपूर्ति को नुकसान पहुंचा सकता है. उन्होंने कहा कि ये पनडुब्बियां अरब सागर और हिंद महासागर में स्थिरता बनाए रखने में मदद करेंगी.
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चीन-पाकिस्तान रक्षा रिश्ते कितने गहरे हैं?
पाकिस्तान और चीन के बीच एक समझौता हुआ है जिसके तहत पाकिस्तान को कुल 8 हैंगर-क्लास पनडुब्बियां मिलनी हैं. पहली अब मिल गई है, बाकी आगे मिलेंगी. पिछले कुछ सालों में जरदारी और दूसरे पाकिस्तानी नेता कई बार चीन का दौरा कर चुके हैं. दोनों देशों के रक्षा संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं.
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
पाकिस्तान की नौसेना पहले से ही भारत के लिए एक चुनौती रही है. अब 8 आधुनिक पनडुब्बियां मिलने से पाकिस्तान की समुद्री ताकत काफी बढ़ जाएगी. अरब सागर जो भारत के पश्चिमी तट के पास है वहां इन पनडुब्बियों की मौजूदगी भारत की नौसेना के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. और जब इस पनडुब्बी का नाम वही 'हैंगर' रखा गया है जिसने 1971 में INS खुक्री डुबोया था तो इसका संदेश भी साफ है.