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PAK की कंगाली, दूतावास हो रहे खाली... सैलरी नहीं मिली तो नौकरी छोड़ रहे कर्मचारी

पाकिस्तान की कंगाली से विदेशों में स्थित पाकिस्तानी दूतावास बेहाल हो चुके हैं. अमेरिका स्थित पाकिस्तान के दूतावास के पास इतने पैसे नहीं हैं कि स्टाफ़ को सैलरी दी जा सके. स्टाफ़ को सैलरी देने के लिए कर्ज़ का सहारा लेना पड़ रहा है.

कंगाली से जूझ रहा पाकिस्तान कंगाली से जूझ रहा पाकिस्तान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • विदेशों में स्थित पाकिस्तानी दूतावास हुए कंगाल
  • दूतावास के एक स्टाफ़ ने छोड़ दी नौकरी
  • स्टाफ़ को सैलरी देने के लिए लेना पड़ा कर्ज़

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पिछले महीने कहा था कि उनके पास देश को चलाने के लिए पैसे नहीं हैं और देश पर कर्ज़ का बोझ बढ़ता जा रहा है. इसी बीच ऐसी ख़बरें आ रहीं हैं कि विदेशों में स्थित पाकिस्तानी दूतावास कंगाल हो चुके हैं. अमेरिका स्थित पाकिस्तान के दूतावास के पास इतने पैसे नहीं है कि स्टाफ़ को सैलरी दी जा सके.
 

दूतावास के एक स्टाफ़ ने छोड़ दी नौकरी
पाकिस्तान की न्यूज़ वेबसाइट, 'द न्यूज़' की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पाकिस्तानी दूतावास में अनुबंध पर काम करने वाले क़रीब पांच कर्मचारियों को अगस्त महीने से सैलरी नहीं मिली है. रिपोर्ट में बताया गया है कि पांच में से एक स्टाफ़, जो कि 10 सालों से दूतावास में नौकरी कर रहा था, उसने सैलरी में देरी की वजह से नौकरी छोड़ दी.


स्थानीय कर्मचारियों को नहीं मिलता कोई विशेषाधिकार
पाकिस्तानी दूतावास के इन स्थानीय कर्मचारियों को वार्षिक अनुबंध पर नियुक्त किया गया था. अमेरिका के न्यूनतम सैलरी के हिसाब से इन कर्मचारियों को 2000 से 2500 डॉलर प्रति महीने देने होते हैं.

दूतावास में नियुक्त स्थानीय कर्मचारी, चाहे परमानेंट हों या अनुबंध पर, उन्हें विदेशी कर्मचारियों की तरह कोई विशेषाधिकार नहीं मिलता. इन स्थानीय स्टाफ़ को काउंसलर सेक्शन में वीज़ा, पासपोर्ट, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के साथ-साथ अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तानियों की मदद के लिए नियुक्त किया जाता है.

सूत्रों के अनुसार, ऐसे कर्मचारियों को वेतन पाकिस्तान कम्युनिटी वेलफेयर फंड (PCW) से मिलता है. PCW में यह फंड स्थानीय सर्विस फंड से आता है.


स्टाफ़ को सैलरी देने के लिए लेना पड़ा कर्ज़
रिपोर्ट में यह बताया गया है कि पाकिस्तानी दूतावास से जुड़े लोगों का कहना है कि PCW फंड पिछले साल ही खाली हो गया था. कोविड-19 महामारी के दौरान उस पैसे का इस्तेमाल कर वेंटिलेटर्स और मेडिकल उपकरण ख़रीद लिए गए थे.

बताया जा रहा है कि स्थानीय स्टाफ़ को सैलरी देने के लिए कर्ज़ लेना पड़ा है. रिपोर्ट में इस बात का भी ज़िक्र है कि स्थानीय कर्मियों ने अक्टूबर में सैलरी को लेकर दूतावास को एक चिट्ठी लिखी थी. दूतावास ने इस मामले को लगातार इस्लामाबाद के विदेश कार्यालय में उठाया जिससे पिछले हफ़्ते ही सभी स्टाफ़ को सैलरी मिली है.

सर्बिया में पाकिस्तानी दूतावास ने भी बदहाली पर साधा था निशाना
पिछले हफ़्ते ही सर्बिया में पाकिस्तानी दूतावास के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट कर पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली पर निशाना साधा गया था.

ट्वीट में लिखा गया था, 'महंगाई सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है. इमरान ख़ान, आप ये कब तक उम्मीद करते हैं कि हम सरकारी अधिकारी तीन महीने से बिना वेतन के चुपचाप आपके लिए काम करते रहें? हमारे बच्चे स्कूल छोड़ने पर मजबूर हैं क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं हैं. क्या यही नया पाकिस्तान है?'

हालांकि बाद में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने सफ़ाई दी थी कि दूतावास का ट्विटर अकाउंट हैक हो गया था. 
 

 

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