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मुनीर ईरान में, शहबाज तुर्की में, मुल्क अंधेरे में... LNG के बैगर PAK में मारामारी

पाकिस्तान में 6000 MW की क्षमता वाले ये संयंत्र इस समय केवल लगभग 500 MW बिजली ही पैदा कर पा रहे हैं, जिससे कुल बिजली उत्पादन पर गंभीर असर पड़ रहा है. इसकी वजह LNG सप्लाई की कमी है. पाकिस्तान के कई बिजली प्लांट LNG पर ही चलते हैं. लेकिन जंग की वजह से LNG की सप्लाई बाधित हो गई है.

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पाकिस्तान में 16 घंटे की बिजली कटौती चल रही है. (Photo: ITG)
पाकिस्तान में 16 घंटे की बिजली कटौती चल रही है. (Photo: ITG)

पाकिस्तान गंभीर बिजली संकट की चपेट में है. देश के बड़े हिस्सों में लंबे समय तक और बिना किसी सूचना के बिजली कटौती हो रही है. कई इलाकों में बिजली कटौती 15 घंटे तक चल रही है, जिससे रोजमर्रा की ज़िंदगी, कारोबार और उद्योग-धंधे पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गए हैं. सरकार माफी मांग रही है और लोग मारपीट पर उतारू हैं. 

लाहौर और कराची जैसे बड़े शहर इस संकट से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं, जहां के निवासियों का कहना है कि बिजली कटौती का समय सरकारी शेड्यूल से कहीं ज़्यादा है. जहां एक तरफ अधिकारियों ने शाम के व्यस्त समय में लगभग 2 से 2.5 घंटे की सीमित लोड शेडिंग की घोषणा की थी, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. कई शहरी इलाकों में 3 से 8 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों में लोगों को 16 घंटे या उससे भी ज़्यादा समय तक बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है. 

पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ईरान में हैं, जबकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तुर्की के एंटाल्या डिप्लोमेसी फोरम में शामिल होने के लिए वहां मौजूद हैं. मुल्क के दोनों टॉप नेता देश के बाहर सक्रिय कूटनीति चला रहे हैं, लेकिन घर में बिजली संकट ने आम पाकिस्तानी को अंधेरे में छोड़ दिया है. 

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LNG की कमी से बिजली की किल्लत

इस संकट की गंभीरता लगभग 3400 मेगावाट की बिजली की भारी कमी के कारण और बढ़ गई है. गर्मी की वजह से बिजली की मांग तेज़ी से बढ़ी है. अप्रैल की शुरुआत में ये मांग 9000 MW थी जो अब बढ़कर लगभग 20,000 MW हो गई है. 

पाकिस्तान के कई पावर हाउस LNG से चलते हैं. लेकिन पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण LNG की सप्लाई में काफी बंद हो गई है. इस्लामाबाद में पाकिस्तान-ईरान के बीच शांति वार्ता करवा रहा पाकिस्तान अपने मुल्क के लिए LNG भी हासिल नहीं कर पा रहा है. 

पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री ओवैस लेघारी ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में चल रही मौजूदा स्थिति के कारण LNG आधारित अधिकांश बिजली प्लांट को होने वाली गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है. 6000 MW की क्षमता वाले ये संयंत्र इस समय केवल लगभग 500 MW बिजली ही पैदा कर पा रहे हैं, जिससे कुल बिजली उत्पादन पर गंभीर असर पड़ रहा है. 

इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार फर्नेस ऑयल जैसे महंगे विकल्पों पर निर्भर है, लेकिन इनकी आपूर्ति भी बड़ी मुश्किल से हो पा रही है. 

सबसे ज़्यादा प्रभावित शहर 

यह संकट पूरे पाकिस्तान में फैला हुआ है. जिससे पूरे पाकिस्तान के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाके प्रभावित हैं. 

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लाहौर: 3–8 घंटे, बार-बार बिना किसी सूचना के बिजली कटौती.
फैसलाबाद: शहर में 5–8 घंटे, ग्रामीण इलाकों में इससे ज़्यादा
मुल्तान और दक्षिण पंजाब: 10–16 घंटे तक, सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक
इस्लामाबाद/रावलपिंडी: 4–8 घंटे 
पेशावर: 10-16 घंटे, खासकर ग्रामीण इलाकों में
कराची: 2-12 घंटे

कसूर, झंग और बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों जैसे अन्य क्षेत्रों में भी लंबे समय तक बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है. 

संकट और भी गंभीर क्यों होता जा रहा है

पाकिस्तान में बिजली की किल्लत कई कारणों से और भी बढ़ती जा रही है. गर्मी बढ़ने से बिजली की मांग बढ़ी है, इधर हाइड्रो पावर प्लांट में पानी का लेवल नीचे चला गया है, LNG और आयातित ईंधन की सप्लाई लगातार डंवाडोल है. 

कुल पावर शॉर्टफॉल रात के समय 4500 मेगावाट तक पहुंच गया है. सरकार ने उपभोक्ताओं से माफी मांगी और कहा कि ईरान संकट के चलते ईंधन की कीमतें बढ़ने और एलएनजी की कमी के कारण यह कदम उठाना पड़ा. दिन में लोडशेडिंग नहीं है, लेकिन रात के बाजार, छोटे उद्योग और आम घरों में अंधेरा छा रहा है. 

पाकिस्तान पहले से ही ऊर्जा संकट झेल रहा था. ईरान-यूएस युद्ध ने क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति को और प्रभावित किया है, 

ऐसे में विपक्ष और सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि जब शीर्ष नेता विदेश में 'शांति' दूत बन रहे हैं, तो देश की बिजली समस्या का हल कब निकलेगा?

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