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'अमेरिका की किराए की बंदूक...', अफगानिस्तान पर हमले को लेकर मुनीर पर भड़के पाकिस्तानी

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शुक्रवार रात से लड़ाई शुरू हो गई है. पाकिस्तान ने काबुल और कंधार पर हमले कर दिए हैं जिसे लेकर पाकिस्तान के लोग अपने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को कोस रहे हैं और कह रहे हैं अफगानिस्तान के तालिबान शासन को जो मन चाहे, मुनीर के साथ वो वैसा कर सकते हैं.

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पाकिस्तान ने शुक्रवार आधी रात को अफगानिस्तान पर हमला कर दिया (File Photo: Reuters)
पाकिस्तान ने शुक्रवार आधी रात को अफगानिस्तान पर हमला कर दिया (File Photo: Reuters)

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव और सीमा पर छिटपुट झड़पें अब युद्ध में बदल गई हैं. शुक्रवार रात को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और कंधार पर ताबड़तोड़ हमले किए. अफगान रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना के हमलों में महिलाओं और मासूम बच्चों की जान गई. पाकिस्तानी सरकार ने दावा किया कि अब तक उसके ऑपरेशनों में अफगान तालिबान के 133 लोग मारे गए हैं और 200 से ज्यादा घायल हुए हैं. 

इधर, अफगान रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अफगान सैनिकों ने पकतिका, पकतिया, खोस्त, नंगरहार, कुनार और नूरिस्तान प्रांतों में जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे धकेल दिया. अफगान तालिबान सैनिकों ने पाकिस्तान के दो मिलिट्री बेस समेत 19 पोस्ट पर कब्जा कर लिया और चार पोस्ट से पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ दिया.

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगान तालिबान के खिलाफ खुली जंग की घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान का धीरज अब खत्म हो गया है और अब खुली जंग होगी.

आसिम मुनीर को कोस रहे पाकिस्तानी- 'रमजान के महीने में...'

ख्वाजा आसिफ के बयान से साफ हो गया है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान के रिश्तों में कितनी कड़वाहट घुल चुकी है और युद्ध कितना भीषण हो सकता है. इस युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. पाकिस्तान के यूजर्स अपने आर्मी चीफ आसिम मुनीर को टार्गेट करते हुए लिख रहे हैं तालिबान को जैसा ठीक लगे, मुनीर के साथ वैसा ही व्यवहार करें, पूरी मुस्लिम दुनिया खुश हो जाएगी.

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जुहा मलिक नाम की एक पाकिस्तानी यूजर ने एक्स पर लिखा, 'डियर अफगान मुजाहिदीन, आपको जैसा ठीक लगे, आसिम मुनीर के साथ वैसा ही बर्ताव करें. इसके लिए केवल पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरी मुस्लिम दुनिया आपका शुक्रिया अदा करेगी.'

उनके इस ट्वीट पर जवाब देते हुए अफगानिस्तान के एक यूजर ने लिखा, 'अफगान सेना और मुजाहिदीन को पाकिस्तान के नागरिकों से कोई दिक्कत नहीं है. दिक्कत सिर्फ सैन्य शासन (आसिम मुनीर) से है और ये सभी जानते हैं. अफगान मुजाहिदीन केवल सेना को टार्गेट करते हैं न कि नागरिकों को.'

हिना यूसुफजई नाम की एक महिला यूजर ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमले को शर्मनाक बताते हुए लिखा, 'रमजान के महीने में पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर हमला करना शर्मनाक है. अमेरिका अफगानिस्तान से तालिबान सरकार को हटाना चाहता है, और यह काम पाकिस्तान को सौंपा गया है, जिसके बदले में पाकिस्तान को बहुत कुछ दिया जा सकता है.'

पाकिस्तानी यूजर ने आसिम मुनीर पर निशाना साधते हुए आगे लिखा, 'ये सैन्य जनरल हमें बेवजह के युद्धों में घसीटते हैं और देश को बर्बाद करते हैं, फिर हम हैरान होते हैं कि पाकिस्तान तरक्की क्यों नहीं करता. पाकिस्तान बार-बार अमेरिका की किराए की बंदूक बन जाता है.'

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रहमतुल्लाह नबील नाम के एक अफगान यूजर ने लिखा, 'पाकिस्तान अफगानिस्तान में कदम रखकर उसी जाल में फंस गया है, जिसे वह दशकों से दूसरों के लिए बिछाता रहा था. गलत नीतियों के नतीजे अंततः लौटकर आते ही हैं; और अब पाकिस्तान के लिए न तो पीछे हटना आसान है और न ही बिना कीमत चुकाए आगे बढ़ना.'

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई क्या बोले?

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने पाकिस्तान के हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, 'पाकिस्तानी विमानों ने एक बार फिर काबुल, कंधार और पकतिया पर बमबारी की. अफगान सभी परिस्थितियों में पूरी एकजुटता के साथ अपने प्यारे वतन की रक्षा करेंगे और किसी भी हमले का हिम्मत के साथ जवाब देंगे.'

हामिद करजई ने लिखा कि पाकिस्तान ने जो बोया है, वही काट रहा है. वो लिखते हैं, 'पाकिस्तान खुद को हिंसा और बम धमाकों से अलग नहीं कर सकता क्योंकि ये समस्याएं उसी की बनाई हुई हैं. लेकिन उसे अपनी नीति बदलकर अफगानिस्तान के साथ अच्छे पड़ोसी की तरह रहना चाहिए, सम्मान के साथ रहना चाहिए और सभ्य संबंधों का रास्ता चुनना चाहिए.'

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची हमले पर क्या बोले?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी रमजान के महीने में पाकिस्तान-अफगानिस्तान युद्ध को अनुचित बताया.

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उन्होंने एक्स पर लिखा, 'बरकतों वाला महीना रमजान आत्म-संयम और इस्लामी दुनिया की एकता को मजबूत करने का समय है. इस महीने में यही उचित है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान अपने मौजूदा मतभेदों को अच्छे पड़ोसियों की तरह बातचीत से संभालें और सुलझाएं. इस्लामी गणराज्य ईरान दोनों देशों के बीच बातचीत को आसान बनाने और दोनों के बीच समझ, सहयोग को मजबूत करने के लिए किसी भी मदद को तैयार है.'

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